ना उम्र की सीमा हो, ना जन्म का हो बंधन; हेमा की मोहब्बत से सायरा के समर्पण तक; सितारों ने लिखी इश्क की दास्तां
Valentine Week 2026: मोहब्बत में जिंदगी भर का साथ पाना हर प्रेमी जोड़े का सपना होता है। मगर कम ही लोग होते है जिनकी मोहब्बत शादी की दहलीज पार कर पाती है। फिल्मी दुनिया में भी कई ऐसे सितारे हैं जो रिलेशनशिप में आने के बाद ताउम्र साथ रहे और हर मुश्किल वक्त में एक दूसरे के साथी बने। पढ़ें ऐसे ही सितारों की कहानी..
विस्तार
‘तारे हैं बाराती, चांदनी है ये बारात
सातों फेरे होंगे अब हाथों में लेके हाथ...’
जावेद अख्तर का लिखा यह गीत उन फिल्मी सितारों के ऊपर खूब जंचा जो जब एक हुए तो पूरा बॉलीवुड ही इश्क की चांदनी से जगमगा उठा। एक बार जो इनकी जोड़ी बनी तो आखिरी सांस तक हाथ थामें रही।
दिलीप साहब और सायरा का रिश्ता हो या धर्मेंद्र और हेमा का, किसी ने धर्म की दीवार तोड़ी तो किसी ने बंटे हुए रिश्ते को भी इश्क के रुप में अपनाया।
वैलेंटाइन वीक सीरीज के दूसरे दिन बात करेंगे सिल्वर स्क्रीन की ऐसे जोड़ियों के बारे में जिन्होंने ताउम्र दिया एक-दूजे का साथ दिया।
सायरा को जब छोटी सी उमर में लगा दिलीप का रोग
जिस उम्र में लड़कियां को प्रेम का मतलब भी नहीं जानतीं। 12 साल की इस लड़की को इश्क हुआ हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार दिलीप कुमार से। बड़ी होकर यही लड़की बनी अभिनेत्री सायरा बानो।
सायरा स्कूल के दिनों से ही मिसेज दिलीप कुमार बनना चाहती थी। उनकी मां ने उन्हें सलाह दी कि अगर वो वाकई मिसेज दिलीप कुमार बनना चाहती हैं तो वैसे ही शौक पैदा करें जैसे दिलीप साहब फरमाते हैं।
इसके बाद सायरा ने सितार बजाना और उर्दू सीखना शुरू किया। दिलीप साहब के बंगले से केवल दो बंगले दूर ही अपना बंगला बनवाया। 23 अगस्त 1966 का दिन था जब सायरा की मां ने उनके 22वें जन्मदिन पर एक हाउस वार्मिंग पार्टी रखी। फिल्मिस्तान स्टूडियो से शूटिंग करके घर लौटी सायरा ने देखा कि पार्टी में उनके कई को-स्टार्स और निर्देशकों का जमावड़ा लगा हुआ है।
इसी पार्टी में उनकी चाहत दिलीप साहब भी शामिल थे। सायरा की मां ने उन्हें खास इनवाइट किया था। इस दिन के लिए वो मद्रास फ्लाइट लेकर सूट-बूट पहन कर, बड़े हैंडसम होकर मेरी पार्टी में आए थे। सायरा इसे अपनी जिंदगी का सबसे अच्छा गिफ्ट बताती है।
इसके बाद लगभग आठ दिन तक दिलीप साहब मद्रास से आते और सायरा के घर डिनर वगैरह करके शूटिंग के लिए जाते थे। पूरे आठ दिन बाद दिलीप कुमार ने सायरा को प्रपोज किया। उनकी मां और दादी के पास गए और बोले कि मैं आपकी बेटी से शादी करना चाहता हूं। और इस तरह सायरा का मुद्दतों का इंतजार खत्म हुआ।
11 अक्टूबर 1966 को, जब सायरा 22 साल की थीं और दिलीप साहब 44 वर्ष के थे, दोनों शादी के बंधन में बंध गए। आगे दाेनों ने गोपी, सगीना, बैराग समेत कई फिल्मों में साथ काम किया। हालांकि, शादी के बाद सायरा ने फिल्मी दुनिया से दूरी बना ली और दिलीप साहब की देखभाल में अपना जीवन समर्पित कर दिया।
22 साल के उम्र के अंतर के बावजूद, दोनों के बीच का रिश्ता बेहद मजबूत था और वे एक-दूसरे के प्रति समर्पित थे। जुलाई 2021 में 98 वर्ष की उम्र में लंबी बीमारी के बाद दिलीप कुमार का निधन हो गया। दोनों का लगभग 54 साल का साथ रहा।
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नरगिस की आंखों के सिवा सुनील की दुनिया में रखा क्या है
हिंदी सिनेमा में कई लव स्टोरीज ऐसी हैं जो फैंस के लिए भी यादगार हैं। ऐसी ही कहानी है सुनील दत्त और नरगिस की। फिल्म ‘मदर इंडिया’ के सेट पर लगी एक आग में सब कुछ तबाह हो गया पर इस आग ने सुनील के दिल में एक चिंगारी जला दी।
इस आग में नरगिस को बचाने पहुंचे सुनील दत्त उन्हें अपना दिल दे बैठे। उन्होंने नरगिस के टूटे हुए दिल को इस कदर जोड़ा कि दाेनों फिर कभी जुदा नहीं हुए। जहां सुनील ने नरगिस को इमोशनल सपोर्ट दिया, वहीं नरगिस ने भी पूरी शिद्दत से न सिर्फ सुनील से प्यार किया बल्कि उनकी बीमार बहन की सेवा भी की।

धर्म की दीवार तोड़ते हुए मार्च 1958 में दोनों ने शादी कर ली। एक्ट्रेस ने प्यार में अपना नाम बदला और नरगिस से निर्मला हो गईं। कपल तीन बच्चों संजय, नम्रता और प्रिया के माता-पिता बने। 3 मई 1981 में 51 साल की उम्र में नरगिस का कैंसर से निधन हो गया। इसके बाद सुनील दत्त ने सारी जिंदगी उन्हें अपने दिल में समेट कर बिताई।
धर्मेंद्र की ड्रीम गर्ल बनीं हेमा
ड्रीम गर्ल हेमा मालिनी एक वक्त पर बॉलीवुड समेत फैंस के दिलों पर राज कर रहीं थीं। मगर उनके दिल में थे धर्मेंद्र। दोनों की प्रेम कहानी 1970 में फिल्म ‘जो तू हसीन मैं जवान’ से शुरू हुई तो धर्मेंद्र की जिंदगी ही बदल गई।
कुछ और साल बीते और 1975 में फिल्म 'शोले' की शूटिंग के दौरान इनका प्यार परवान चढ़ा। इस फिल्म में धर्मेंद्र ने जानबूझकर वीरू का रोल चुना ताकि वे हेमा के करीब रह सकें। सेट पर धर्मेंद्र अक्सर लाइटमैन और स्पॉटबॉय को पैसे देते थे ताकि वे सीन के दौरान गलतियां करें, जिससे हेमा के साथ ज्यादा से ज्यादा रीटेक मिल सकें और उन्हें साथ समय बिताने का मौका मिले।
दोनों एक दूसरे के प्यार में थे और एक होना चाहते थे। मगर ये संभव नहीं था क्योंकि एक्टर का एक परिवार और भी था। धर्मेंद्र पहले से ही शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे। वहीं हेमा के पिता भी इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। उन्होंने हेमा की शादी अभिनेता जितेंद्र से तय कर दी थी।
इसी बीच जब धर्मेंद्र को जितेंद्र और हेमा की शादी की खबर मिली, तो वे तुरंत चेन्नई पहुंचे और शादी रुकवा दी। वहीं दूसरी तरफ जब संजीव कुमार ने हेमा को शादी का प्रस्ताव दिया तो उन्होंने उसे ठुकरा दिया। कई मुश्किलों के बाद भी मई 1980 में हेमा मालिनी और धर्मेंद्र ने शादी की और अपनी बेटियों के साथ एक अच्छा जीवन बिताया। शादी के बाद इनकी दो बेटियां हुईं—ईशा और अहाना देओल।
24 नवंबर 2025 को 89 वर्ष की आयु में धर्मेंद्र का निधन हो गया। अभिनेता के छोड़कर जाने का दुख आज भी हेमा की आंखों में दिखता है।
जावेद को भा गई शबाना की झुकी-झुकी सी नजर
लेखक जावेद अख्तर और शबाना आजमी को बॉलीवुड की कामयाब जोड़ियों में गिना जाता है। दाेनों की पहली मुलाकात शबाना के पिता, प्रसिद्ध शायर कैफी आजमी के घर पर हुई थी। जावेद वहां शायरी और लिखने की कला सीखने जाया करते थे।
शुरुआत में तो शबाना जावेद से दूर रहती थीं, लेकिन फिल्म 'स्पर्श' के लिए जब जावेद ने उनकी सराहना की तो दोनों के बीच बातचीत का दौर शुरू हुआ। शबाना को जावेद में अपने पिता की छवि और वैसी ही संवेदनशीलता नजर आई।
हालांकि, यह रिश्ता आसान नहीं था क्योंकि जावेद पहले से हनी ईरानी से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे (फरहान और जोया) थे। शबाना की मां, शौकत आजमी भी दोनों के इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थीं क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि शबाना किसी का घर तोड़ें।
‘रोंदेवू विद सिमी गरेवाल' के चैट शो पर जावेद ने एक बार अपने और शबाना के रिश्ते के बारे खुल कर बातें की थीं। उन्होंने बताया था कि एक वक्त था जब शबाना को 'घर तोड़ने वाली' महिला कहा गया। घर वाले भी खिलाफ थे।
ऐसे में दोनों ने अपना रिश्ता खत्म करने का फैसला किया और तीन महीने तक बात नहीं की, लेकिन वे एक-दूसरे से दूर नहीं रह पाए। अंत में हनी ईरानी ने खुद जावेद को 'आजाद' करने का फैसला किया और 1984 में जावेद और शबाना ने रीति-रिवाजों से शादी कर ली।
अपनी शादी की सफलता का राज बताते हुए शबाना अक्सर मजाक में कहती हैं कि वो दोनों इसलिए साथ हैं क्योंकि जावेद ‘कभी मिलते ही नहीं’। हालांकि सच तो यह है कि दाेनों की गहरी दोस्ती उनके रिश्ते की नींव है। आज 41 साल बाद भी कपल पहले की तरह ही एक दूसरे का हाथ थामे हुए है।
राजेश खन्ना की आंखों की भूल-भूलैया में खोई डिंपल
साल 1971 में राज कपूर अपने बेटे ऋषि कपूर को लेकर टीनएज रोमांस पर फिल्म 'बॉबी' बनाना चाहते थे। इसके लिए वो एक कम उम्र की एक्ट्रेस की तलाश कर रहे थे। यह तलाश खत्म हुई जब उन्हें 14 साल की डिंपल कपाड़िया मिलीं।
इसी फिल्म की शूटिंग के दौरान पहली बार डिंपल की मुलाकात उस दौर के सुपरस्टार राजेश खन्ना से हुई। कुछ मुलाकातों के बाद ही टीनएज डिंपल ने अपने से 15 साल बड़े राजेश खन्ना से पूछा, ‘क्या आप मेरा हाथ हमेशा के लिए पकड़े रहेगें ?' राजेश भी डिंपल की खूबसूरती के इस कदर दीवाने हुए कि उन्होंने जल्द ही शादी का फैसला कर लिया।
1973 में डिंपल की डेब्यू फिल्म ‘बाॅबी’ की रिलीज से महीनाें पहले ही 31 साल के राजेश ने 16 साल की डिंपल से शादी कर ली। शादी के बाद डिंपल ने राजेश खन्ना के कहने पर फिल्मों से दूरी भी बना ली। हालांकि, शादी के बाद समय के साथ दोनों के रिश्ते में तनाव आने लगा। राजेश खन्ना के करियर का गिरता ग्राफ और डिंपल की फिल्मों में वापस लौटने की इच्छा उनके अलगाव का एक बड़ा कारण बनी।
1984 में दोनों अलग हो गए पर उन्होंने कभी एक दूसरे से तलाक नहीं लिया। अलग होने के बाद डिंपल फिल्मों में जरूर लौट आईं पर राजेश खन्ना के साथ उनका एक अनकहा रिश्ता हमेशा बना रहा। डिंपल अक्सर उनके राजनीतिक दौरों और मुश्किल समय में उनके साथ देखी जाती थीं। 2012 में राजेश खन्ना के अंतिम समय में भी डिंपल उनके साथ खड़ी रहीं और अंतिम सांस तक उनकी देखभाल की।
श्रीदेवी के नैनों में सजे बोनी के सपने
श्रीदेवी और बोनी कपूर की मोहब्बत का सिलसिला फिल्म ‘मिस्टर इंडिया’ के सेट पर शुरू हुआ। बोनी ने सेट पर जब श्रीदेवी को पहली बार देखा, तभी उन्हें उनसे प्यार हो गया। शूटिंग के दौरान बोनी ने श्रीदेवी की हर इच्छा का ख्याल रखा और उन्हें सबसे अच्छे मेकअप रूम और कॉस्ट्यूम मुहैया कराए।
हालांकि, बोनी ने जब श्रीदेवी को प्रपोज किया तो वे हैरान रह गईं क्योंकि बोनी पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे (अर्जुन और अंशुला कपूर) थे। इसके बाद श्रीदेवी ने लगभग 6-8 महीने तक बोनी से बातचीत बंद कर दी।
हालांकि, इसके बाद जब 1993 में मुंबई में जब श्रीदेवी के साथ एक होटल में बदतमीजी हुई तो बोनी ने ही श्रीदेवी और उनकी मां को सहारा दिया, जिससे दोनों का विश्वास मजबूत हुआ। इसी दौरान जब इस बात की खबर बोनी की पत्नि मोना को लगी तो दोनों की शादी खत्म हो गयी। बोनी का घर टूटने के बाद श्रीदेवी को भी कई बार ‘घर तोड़ने वाली’ महिला कहकर बुलाया गया पर वे अपने प्यार में अडिग रहीं और अंततः उनका रिश्ता समाज की बाधाओं को पार कर गया।
जून 1996 में श्रीदेवी और बोनी कपूर ने शादी कर ली। कपल की दो बेटियां (जान्हवी और खुशी) हुईं। साल 2018 में दुबई में श्रीदेवी के असामयिक निधन तक, दोनों का रिश्ता अटूट प्यार और समर्पण का प्रतीक बना रहा। आज भी श्रीदेवी, बोनी की यादो में जिंदा हैं।
शाहरुख ने गौरी से कहा मैं हूं ना
शाहरुख और गौरी की लव स्टोरी तब शुरू हुई जब शाहरुख 19 के थे और गौरी मात्र 14 की। दोनों की पहली मुलाकात 1984 में दिल्ली में हुई एक क्लब पार्टी में हुई थी। शाहरुख ने गौरी को देखा और ताउम्र के लिए अपना दिल हार बैठे। किसी तरह एक्टर ने गौरी का नंबर हासिल कर लिया। सिलसिला आगे बढ़ा और कभी कभार होने वाली मुलाकातें रोज होने लगीं।
शाहरुख काफी शर्मीले थे और गौरी को लेकर काफी प्रोटेक्टिव भी थे। इससे परेशान होकर गौरी उन्हें बिना बताए मुंबई चली गईं। शाहरुख अपनी मां से 10,000 रुपये लेकर उन्हें ढूंढने मुंबई पहुंच गए और अंततः उन्हें गोराई बीच पर ढूंढ निकाला, जहां दोनों के बीच सुलह हुई।
जब दोनों ने शादी का मन बनाया तो बीच में धर्म की दीवार खड़ी हो गई पर शाहरुख ने किसी तरह गौरी के परिवार वालों को मना लिया। 25 अक्टूबर, 1991 में दोनों हमेशा के लिए एक दूसरे के हो गए।
आज कपल तीन बच्चों (आर्यन, सुहाना और अबराम) के माता-पिता हैं और साथ मिलकर एक सफल प्रोडक्शन कंपनी चलाते हैं। शाहरुख और गौरी को आज इंडस्ट्री में आइकॉनिक कपल माना जाता है।
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वैलेंटाइन वीक की इस कड़ी में कल पढ़िए
एक ओर जहां आज के दौर में जरा सी बात पर रिश्त बिखर जाते हैं। वहीं कुछ ऐसे सेलेब्रिटी कपल्स भी हैं जो खुद कर जोड़कर रखे हुए हैं और युवाओं के लिए मिसाल भी बने हैं।