Film Review: हेट स्टोरी के नक्शे-कदम पर 'वजह तुम हाे'
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निर्देशकः विशाल पंड्या
सितारेः गुरमीत चौधरी, सना खान, शरमन जोशी, रजनीश दुग्गल
रेटिंग *1/2
ऐसे दौर में जबकि टीवी न्यूज चैनल 24×7 चल रहे हैं, किसी भी पल कोई बड़ी खबर या ब्रेकिंग न्यूज आ सकती है। निर्देशक विशाल पंड्या की फिल्म में एक हैक चैनल पर लाइव मर्डर हैं! पर्दे पर न दिखने वाले एक हत्यारे द्वारा पुलिस अफसर के कत्ल के साथ शुरू होने वाला मामला पूरी तरह फिल्मी है।
वेबसाइट्स और सोशल मीडिया के अकाउंट्स होने की घटनाओं के बीच टीवी चैनल का हैक होना चौंकाता है और आप सोचते हैं कि क्या वाकई यह हो सकता है? खैर, बॉलीवुड में पहली बार किसी टीवी चैनल की हैकिंग से जुड़ी कहानी यहां देखने को मिलती है। घटनाक्रम आपको बांध कर रखते हैं और इसी बीच टीवी चैनल के मालिक राहुल (रजनीश दुग्गल) पर शक का घेरा कसता है। क्या वह है शातिर दिमाग षड्यंत्रकारी और जो हो रहा है, उसकी वजह क्या है?
फिल्म को इरॉटिक तमगा देना गलत
रहस्य-रोमांच की गलियों के बीच इस कहानी में रणवीर (गुरमीत चौधरी) और सिया (सना खान) के किरदार अपने उत्तेजनापूर्ण प्रेम दृश्यों से चौंकाते हैं। हालांकि वे इतने नहीं हैं कि फिल्म को इरॉटिक तमगा दिया जाए। फिल्म मूलतः थ्रिलर है। जिसमें एक के बाद एक हो रही हत्याएं और उनकी वजह जानने की जिज्ञासा रहती है। नायक-नायिका पेशे से वकील हैं और प्रेम प्रसंग के इतर अदालत में एक-दूसरे के विरुद्ध नजर आते हैं।
एक अन्य अहम किरदार मामले की जांच करते पुलिसवाले कबीर (शरमन जोशी) का है। जो काम कम डायलॉगबाजी ज्यादा करता है। एक डायलॉग हैः कातिल कोई और ही है। ये पता लगाने में ही तो इस वर्दी की शान है। वर्ना वर्दियां तो किराये पे भी मिलती हैं। पुलिस और अदालत मिल कर सिलसिलेवार कत्लों के रहस्य को सुलझाने की कोशिश कर रहे हैं।
रेप और मर्डर वाली थीम पर है फिल्म
कहानी में ट्विस्ट एंड टर्न हैं, जो कहीं-कहीं रोचक लगते हैं। फिल्म सिंगल स्क्रीन दर्शकों के हिसाब से बनाई गई है। सेक्स, रोमांस, हिंसा, एक्शन और डायलॉगबाजी। जिन्हें विशाल पंड्या की हेट स्टोरी-2 और 3 पसंद आई थी, वही इस फिल्म से एंटरटेन होंगे। वास्तव में वजह तुम हो की कहानी का ताना-बाना भी हेट स्टोरी की रेप और मर्डर वाली थीम पर ही है।
फिल्म का कैमरावर्क और सेट-अप भी कई जगह उन फिल्मों की याद दिलाता है। सना और गुरमीत की जोड़ी अच्छी लगी है। गुरमीत ने अपनी डेब्यू फिल्म (खामोशियां) के मुकाबले यहां बेहतर काम किया है। वे भविष्य के प्रति उम्मीद की किरण जगाते हैं। जबकि सना खूबसूरत लगी हैं। मगर वकील की भूमिका में कई बार वह फिट नहीं लगतीं।
शरमन जोशी ने करिअर की शुरुआत में जो चमक दिखाई थी, वह अब उससे न्याय करते नजर नहीं आते। जबकि निर्देशक विशाल पंड्या को लंबी पारी खेलने के लिए अपने बनाए फार्मूले को तोड़ने की जरूरत दिखाई देती है। संगीत सुनने लायक है।