Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Movie Review: क्या फिर चलेगा डेविड धवन का जादू या ट्रोल होंगे वरुण? पढ़ें रिव्यू
Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai Movie Review: 90 के दशक के मशहूर निर्देशक डेविड धवन ने एक बार फिर से बेटे वरुण धवन को लेकर रोमांटिक कॉमेडी फिल्म बनाई। कैसी है ये फिल्म? आइए जान लेते हैं?
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विस्तार
एक दौर था जब कॉमेडी का मतलब डेविड धवन होता था। उन्होंने गोविंदा, कादर खान और जॉनी लीवर जैसे कलाकारों के साथ मिलकर हिट फिल्में दीं। कहा जाता है कि गोविंदा का तो करियर ही डेविड धवन की फिल्मों के दम पर चला है।
ऐसे में जब सुनने में आया कि ‘है जवानी ताे इश्क होना है’ डेविड की आखिरी फिल्म होगी तो दर्शकों को इससे बड़ी उम्मीदें थी, पर कॉमेडी के मामले में यह फिल्म फैंसी रैपर में बेस्वाद टॉफी की तरह निकली।
फिल्म कहीं-कहीं एंटरटेनिंग तो है पर कॉमेडी और पंच लाइन्स लगभग गायब हैं। सेकंड हाफ में यह आपको टुकड़ों में हंसाती है वो भी तब जब आप यह मान लेते हैं कि इसे बिना लॉजिक के ही देखना होगा। फिल्म के फर्स्ट हाफ के साथ क्या दिक्कत है? इसके बेस्वाद होने की वजह क्या है? अब जरा इस पर बात कर लेते हैं।
कहानी
फिल्म की कहानी वेडिंग फोटोग्राफर जस्स (वरुण धवन) के इर्द-गिर्द बुनी गई है जिसकी पत्नी बानी (मृणाल ठाकुर) उससे इसलिए तलाक लेना चाहती है क्योंकि वो बच्चा चाहता है और बानी इसके लिए तैयार नहीं है। बानी अलग होते वक्त जस्स से मूव ऑन करने के लिए कहती है।
बस फिर क्या जस्स इधर-उधर मुंह मारने लगते हैं और उन्हें मिल जाती हैं प्रीत (पूजा हेगड़े)। कुछ महीनों बाद बानी को पता चलता है कि वो प्रेग्नेंट है तो वो जस्स के पास लौट आती है। दूसरी तरफ प्रीत भी प्रेग्नेंट हो जाती है। अब इस सिचुएशन में जस्स आगे क्या करता है? यह जानने के लिए आप यह फिल्म देख सकते हैं।
स्क्रीनप्ले
यही इस फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी है। वैसे तो कहानी में ही कोई लॉजिक नहीं है। ऊपर से दोनों लव स्टोरी इतनी फीकी हैं कि आपको कुछ फील ही नहीं होता। फर्स्ट हाफ में तो फिल्म हद से ज्यादा बोरिंग है। स्क्रीन पर मजाक चल रहा है और आपको हंसी ही नहीं आएगी।
किसी भी एक्टर को अच्छे डायलॉग तक नहीं दिए गए। एक दो ही सीन ऐसे बन पाए हैं, जहां आपको हंसी आती है। सेकंड हाफ में कहानी थोड़ा बेहतर होती है और कुछ अच्छे सिचुएशन बनाए गए हैं।
अभिनय
वरुण कहीं ओवरएक्टिंग करते हैं तो कहीं खुद को संभाल लेते है। ‘बॉर्डर 2’ से जो थोड़ा बहुत कमाया था वो इस हल्की फिल्म से फिर गवां देंगे। मृणाल की एक्टिंग बेहतर है, उन्होंने इस फिल्म पर सबसे ज्यादा मेहनत की है। पूजा हेगड़े की एक्टिंग तो मैंने आज तक किसी फिल्म में देखी ही नहीं। उनके फिक्स्ड एक्सप्रेशन हैं जो हर फिल्म में वैसे ही नजर आते हैं।
मनीष पाॅल ने कुछ सीन में फिल्म को संभाला है। यही काम उन्होंने ‘जुगजुग जियो’ में और अच्छा किया था क्योंकि वहां उनके पास कहानी और संवाद थे। जिमी शेरगिल का तो ऐसे मिस यूज किया है कि वो एक मिसाल है।
मौनी रॉय सेकंड हाफ में मसाला लेकर आती हैं और फिल्म में थोड़ा जान फूंकने का काम करती हैं। चंकी पांडे और अली असगर ने अपनी-अपनी हिस्से की ओवरएक्टिंग अच्छे से की है। ‘धुरंधर’ वाले राकेश बेदी का रोल छोटा है पर ठीक है। ‘साराभाई वर्सेस साराभाई’ वाले राजेश कुमार को लंबे वक्त बाद बड़े परदे पर देखकर अच्छा लगता है।
निर्देशन
सुनने में बुरा लगेगा पर डेविड ने फिल्म में कहानी और काॅमिक सिचुएशन पर काम करने के बजाय अंग प्रदर्शन दिखाने पर काम किया है। कई डबल मीनिंग डॉयलॉग तो ऐसे हैं कि यह फिल्म वल्गर कॉमेडी बनने से बस कुछ इंच ही दूर रह गई।
हैरानी होती है यह देखकर कि जो डायरेक्टर कभी फिल्म के हर सीन में कॉमेडी सिचुएशन डाला करता था, उसकी पूरी फिल्म में अब गिने-चुने कॉमिक सीन देखने को मिले। ऐसा लगता है जैसे डेविड ने फिल्म को टुकड़ों में निर्देशित किया है।
कॉमेडी फिल्म में लॉजिक ना होना एक अलग बात होती है पर फिल्म और इसको बनाने की वजह का ही पता ना होना एक अलग बात है। डेविड ने इस फिल्म को बस बनाया है इस पर मेहनत नहीं की।
क्या अच्छा
मृणाल ठाकुर ही इस पूरी फिल्म में कहीं ओवरएक्टिंग करती दिखाई नहीं दीं। मनीष पॉल भी एक लेवल तक इसे संभालने की कोशिश करते दिखे। एक दो पंच और कुछ सीन अच्छे हैं। जॉनी लीवर, राजपाल यादव और मनोज पहवा को देखकर अच्छा लगता है। 90 के दशक के कुछ गानों को अलग-अलग सिचुएशन में जोड़ा गया है। वो नॉस्टैल्जिक फील दे जाते हैं।
क्या बुरा
बिना लॉजिक की कॉमेडी तो आप फिर भी देख सकते हैं पर फिल्म में कॉमेडी भी तो हो। कलाकार तो कई भर लिए पर किरदार किसी का उभरने ही नहीं दिया। बड़े कॉमेडियंस को फिर से वेस्ट किया। डबल मीनिंग वाले डायलॉग्स और कुछ क्रिंज सिचुएशन। गाने भी एक-दो छोड़कर कोई यादगार नहीं।
देखें या नहीं
स्टारकास्ट के हार्ड कोर फैन हैं तो चले जाइए। सिर्फ रिलैक्स करने और दिमाग साइड में रखकर फिल्म देखना चाहते हैं तो भी एक बार जा सकते हैं। बच्चों को लेकर ना जाएं तो बेहतर होगा।