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Made in India- A Titan Story Review: असरदार कहानी में छाए जिम सर्भ और नसीरुद्दीन शाह, कितनी दमदार है सीरीज?
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सार
Made in India- A Titan Story Review: नसीरुद्दीन शाह और जिम सर्भ अभिनीत वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया- अ टाइटन स्टोरी' ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। यहां जानिए कैसी है यह सीरीज ?
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
मेड इन इंडिया- अ टाइटन स्टोरी
कलाकार
नसीरुद्दीन शाह
,
जिम सर्भ
,
वैभव तत्ववादी
,
नमिता दुबे
,
कावेरी सेठ
और
लक्षवीर सरन
लेखक
करण व्यास
निर्देशक
रॉबी ग्रेवाल
निर्माता
प्रभलीन संधू
रिलीज डेट
3 जून 2026
रेटिंग
4/5
विस्तार
भारत में कंपनियों पर वेब सीरीज बहुत कम बनती हैं। अगर बनती भी हैं तो शेयर बाजार, स्टार्टअप या किसी बड़े घोटाले के इर्द-गिर्द घूमती हैं। ऐसे में एक घड़ी कंपनी की कहानी पर पूरी सीरीज बनाना थोड़ा अजीब लगता है। आखिर एक घड़ी बनाने की कहानी में ऐसा क्या होगा जो ऑडियंस को छह एपिसोड तक बांधे रखे?
मजे की बात यह है कि छह एपिसोड खत्म होने तक आप घड़ियों से ज्यादा उन लोगों में दिलचस्पी लेने लगते हैं जिन्होंने टाइटन को खड़ा किया। उन लोगों की कहानी है जिन्होंने उस दौर में बड़ा सपना देखने की हिम्मत की.... जब विदेशी चीजों को ही बेहतर माना जाता था। आज टाइटन एक बड़ा ब्रांड है, लेकिन इस सीरीज में वह एक आइडिया की तरह शुरू होती है। ऐसा आइडिया, जिस पर शुरुआत में बहुत कम लोगों को भरोसा था।
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मजे की बात यह है कि छह एपिसोड खत्म होने तक आप घड़ियों से ज्यादा उन लोगों में दिलचस्पी लेने लगते हैं जिन्होंने टाइटन को खड़ा किया। उन लोगों की कहानी है जिन्होंने उस दौर में बड़ा सपना देखने की हिम्मत की.... जब विदेशी चीजों को ही बेहतर माना जाता था। आज टाइटन एक बड़ा ब्रांड है, लेकिन इस सीरीज में वह एक आइडिया की तरह शुरू होती है। ऐसा आइडिया, जिस पर शुरुआत में बहुत कम लोगों को भरोसा था।
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वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
कहानी
कहानी की शुरुआत टाटा ग्रुप के भीतर नए कारोबार की तलाश से होती है। टाटा प्रेस घाटे में है और ग्रुप को नए रास्ते खोजने हैं। इसी दौरान जेरक्सिस देसाई (जिम सर्भ) एक ऐसा प्रस्ताव लेकर आते हैं, जो सुनने में जितना अच्छा लगता है, उतना ही जोखिम भरा भी है।
भारत में ऐसी घड़ियां बनाना जो विदेशी ब्रांड्स को टक्कर दे सकें, उस दौर में आसान बात नहीं थी। जेरक्सिस के इस सपने को सबसे पहले समझते हैं जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (नसीरुद्दीन शाह) जब कई लोग इस प्लान को लेकर डाउट में हैं, तब जेआरडी टाटा उनके साथ खड़े नजर आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है। लोग इंडियन घड़ी खरीदेंगे भी या नहीं? फैक्ट्री कहां बनेगी? तकनीक कहां से आएगी? टीम कैसे तैयार होगी? कहानी इन्हीं सवालों के जवाब तलाशती है। इस सफर में जेरक्सिस की पत्नी (नमिता दुबे) भी अहम भूमिका निभाती हैं। जॉय सेनगुप्ता, कावेरी सेठ, वैभव तत्त्ववादी और टीम के दूसरे लोग भी इस सपने को सच करने में जुटे दिखाई देते हैं। वहीं मस्तान भाई (राहुल देव) के जरिए विदेशी घड़ियों की तस्करी वाली दुनिया की झलक भी देखने को मिलती है।
कहानी की शुरुआत टाटा ग्रुप के भीतर नए कारोबार की तलाश से होती है। टाटा प्रेस घाटे में है और ग्रुप को नए रास्ते खोजने हैं। इसी दौरान जेरक्सिस देसाई (जिम सर्भ) एक ऐसा प्रस्ताव लेकर आते हैं, जो सुनने में जितना अच्छा लगता है, उतना ही जोखिम भरा भी है।
भारत में ऐसी घड़ियां बनाना जो विदेशी ब्रांड्स को टक्कर दे सकें, उस दौर में आसान बात नहीं थी। जेरक्सिस के इस सपने को सबसे पहले समझते हैं जहांगीर रतनजी दादाभाई टाटा (नसीरुद्दीन शाह) जब कई लोग इस प्लान को लेकर डाउट में हैं, तब जेआरडी टाटा उनके साथ खड़े नजर आते हैं।
सबसे बड़ा सवाल भरोसे का है। लोग इंडियन घड़ी खरीदेंगे भी या नहीं? फैक्ट्री कहां बनेगी? तकनीक कहां से आएगी? टीम कैसे तैयार होगी? कहानी इन्हीं सवालों के जवाब तलाशती है। इस सफर में जेरक्सिस की पत्नी (नमिता दुबे) भी अहम भूमिका निभाती हैं। जॉय सेनगुप्ता, कावेरी सेठ, वैभव तत्त्ववादी और टीम के दूसरे लोग भी इस सपने को सच करने में जुटे दिखाई देते हैं। वहीं मस्तान भाई (राहुल देव) के जरिए विदेशी घड़ियों की तस्करी वाली दुनिया की झलक भी देखने को मिलती है।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
एक्टिंग
जिम सर्भ इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत हैं। जेरक्सिस देसाई के किरदार में उन्होंने ऐसा काम किया है जो लंबे समय तक याद रहेगा। उनके एक्टिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि वह किरदार को हीरो बनाने की कोशिश नहीं करते। वह उसे इंसान बनाए रखते हैं। कई बार सिर्फ चेहरे के भाव ही बहुत कुछ कह जाते हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने जेआरडी टाटा को किसी बड़े बिज़नेस मेन की तरह नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति की तरह निभाया है जो लोगों और उनके विचारों पर भरोसा करना जानता है। यही बात उनके किरदार को खास बनाती है।
नमिता दुबे, वैभव तत्त्ववादी, जॉय सेनगुप्ता और कावेरी सेठ जैसे एक्टर्स ने सीरीज को मजबूत सहारा दिया है। खास तौर पर वैभव तत्त्ववादी - जेरक्सिस के दोस्त आकाश बंसल के रोल में खूब जंचते हैं। दोनों की दोस्ती कहानी में कई जगह गर्माहट लेकर आती है।
राहुल देव का रोल छोटा है, लेकिन मस्तान भाई के रूप में वह अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
जिम सर्भ इस सीरीज की सबसे बड़ी ताकत हैं। जेरक्सिस देसाई के किरदार में उन्होंने ऐसा काम किया है जो लंबे समय तक याद रहेगा। उनके एक्टिंग की सबसे अच्छी बात यह है कि वह किरदार को हीरो बनाने की कोशिश नहीं करते। वह उसे इंसान बनाए रखते हैं। कई बार सिर्फ चेहरे के भाव ही बहुत कुछ कह जाते हैं।
नसीरुद्दीन शाह ने जेआरडी टाटा को किसी बड़े बिज़नेस मेन की तरह नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति की तरह निभाया है जो लोगों और उनके विचारों पर भरोसा करना जानता है। यही बात उनके किरदार को खास बनाती है।
नमिता दुबे, वैभव तत्त्ववादी, जॉय सेनगुप्ता और कावेरी सेठ जैसे एक्टर्स ने सीरीज को मजबूत सहारा दिया है। खास तौर पर वैभव तत्त्ववादी - जेरक्सिस के दोस्त आकाश बंसल के रोल में खूब जंचते हैं। दोनों की दोस्ती कहानी में कई जगह गर्माहट लेकर आती है।
राहुल देव का रोल छोटा है, लेकिन मस्तान भाई के रूप में वह अपनी छाप छोड़ जाते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, वैभव तत्ववादी
- फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन
निर्देशक की तारीफ इसलिए बनती है क्योंकि उन्होंने एक ऐसी कहानी को रोचक बनाए रखा है ..जिसमें न कोई बड़ा विलेन है, न गोलीबारी है और न ही कोई सनसनीखेज मोड़।
80 के दशक का माहौल बनाने में मेकर्स ने काफी मेहनत की है। पुराने ऑफिस, फैक्ट्री, मशीनें, सरकारी फाइलें और उस दौर का वर्क कल्चर कहानी को रियल बनाते हैं।
खास बात यह है कि सीरीज में जगह-जगह उस समय के असली फुटेज भी इस्तेमाल किए गए हैं। इससे कहानी और उस दौर के बीच का फासला कम हो जाता है। कई सीन्सडॉक्यूमेंट्री और ड्रामा के बीच का दिलचस्प बैलेंस बनाते हैं।
निर्देशक की तारीफ इसलिए बनती है क्योंकि उन्होंने एक ऐसी कहानी को रोचक बनाए रखा है ..जिसमें न कोई बड़ा विलेन है, न गोलीबारी है और न ही कोई सनसनीखेज मोड़।
80 के दशक का माहौल बनाने में मेकर्स ने काफी मेहनत की है। पुराने ऑफिस, फैक्ट्री, मशीनें, सरकारी फाइलें और उस दौर का वर्क कल्चर कहानी को रियल बनाते हैं।
खास बात यह है कि सीरीज में जगह-जगह उस समय के असली फुटेज भी इस्तेमाल किए गए हैं। इससे कहानी और उस दौर के बीच का फासला कम हो जाता है। कई सीन्सडॉक्यूमेंट्री और ड्रामा के बीच का दिलचस्प बैलेंस बनाते हैं।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
स्क्रीनप्ले
सीरीज का लेखन इसकी मजबूत कड़ी है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और हर एपिसोड टाइटन की जर्नी का नया अध्याय खोलता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बिजनेस की बातें भी आसान लगती हैं। फैक्ट्री लगाने, ब्रांड बनाने, मार्केटिंग करने और कस्टमर्स का भरोसा जीतने जैसी बातें बोझिल नहीं लगतीं। हालांकि बीच के कुछ हिस्सों में रफ्तार धीमी पड़ती है। खासकर बीच के एपिसोड थोड़ा और कसाव मांगते हैं।
म्यूजिक
सीरीज का संगीत इसके माहौल को और बेहतर बनाता है। 'ये मेरा दिल यार का दीवाना', 'है अपना दिल तो आवारा', 'मैं हूं झूम झूम प्यार का गीत', 'एक दिन बिक जाएगा', 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे पुराने गाने कहानी के साथ खूब जंचते हैं।
और फिर आती है टाइटन की वह मशहूर धुन। यह धुन सुनते ही बरसों पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। सीरीज इसका इस्तेमाल सिर्फ संगीत की तरह नहीं, बल्कि टाइटन की पहचान के रूप में करती है।
सीरीज का लेखन इसकी मजबूत कड़ी है। कहानी धीरे-धीरे आगे बढ़ती है और हर एपिसोड टाइटन की जर्नी का नया अध्याय खोलता है।
सबसे अच्छी बात यह है कि यहां बिजनेस की बातें भी आसान लगती हैं। फैक्ट्री लगाने, ब्रांड बनाने, मार्केटिंग करने और कस्टमर्स का भरोसा जीतने जैसी बातें बोझिल नहीं लगतीं। हालांकि बीच के कुछ हिस्सों में रफ्तार धीमी पड़ती है। खासकर बीच के एपिसोड थोड़ा और कसाव मांगते हैं।
म्यूजिक
सीरीज का संगीत इसके माहौल को और बेहतर बनाता है। 'ये मेरा दिल यार का दीवाना', 'है अपना दिल तो आवारा', 'मैं हूं झूम झूम प्यार का गीत', 'एक दिन बिक जाएगा', 'जिंदगी कैसी है पहेली' जैसे पुराने गाने कहानी के साथ खूब जंचते हैं।
और फिर आती है टाइटन की वह मशहूर धुन। यह धुन सुनते ही बरसों पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं। सीरीज इसका इस्तेमाल सिर्फ संगीत की तरह नहीं, बल्कि टाइटन की पहचान के रूप में करती है।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह
- फोटो : सोशल मीडिया
क्या खटकता है?
कई जगह लगता है कि सीरीज टाइटन और उसके मेकर्स से इतनी प्रभावित है कि उनसे मुश्किल सवाल पूछने से बचती है। जॉय सेनगुप्ता, कावेरी सेठ, वैभव तत्त्ववादी और टीम के कुछ दूसरे किरदारों के बारे में और जानने की इच्छा रह जाती है।
राहुल देव का मस्तान भाई वाला ट्रैक दिलचस्प है, लेकिन जल्दी खत्म हो जाता है। बीच के कुछ एपिसोड थोड़े लंबे महसूस होते हैं। टाइटन के विज्ञापनों और उसकी यादगार ब्रांडिंग वाले हिस्से को थोड़ा और समय दिया जा सकता था।
कई जगह लगता है कि सीरीज टाइटन और उसके मेकर्स से इतनी प्रभावित है कि उनसे मुश्किल सवाल पूछने से बचती है। जॉय सेनगुप्ता, कावेरी सेठ, वैभव तत्त्ववादी और टीम के कुछ दूसरे किरदारों के बारे में और जानने की इच्छा रह जाती है।
राहुल देव का मस्तान भाई वाला ट्रैक दिलचस्प है, लेकिन जल्दी खत्म हो जाता है। बीच के कुछ एपिसोड थोड़े लंबे महसूस होते हैं। टाइटन के विज्ञापनों और उसकी यादगार ब्रांडिंग वाले हिस्से को थोड़ा और समय दिया जा सकता था।
वेब सीरीज 'मेड इन इंडिया' में नसीरुद्दीन शाह, जिम सर्भ
- फोटो : सोशल मीडिया
देखें या नहीं?
टाइटन की घड़ी तो ज्यादातर लोगों ने देखी होगी, लेकिन उसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। यही बात इस सीरीज को खास बनाती है।
हां, सीरीज में कमियां हैं। कई बार यह टाइटन की तरफ थोड़ा ज्यादा झुक जाती है। कुछ किरदार और स्क्रीन टाइम डिजर्व करते थे। कुछ हिस्से थोड़े छोटे भी किए जा सकते थे। लेकिन इन कमियों के बावजूद इसमें इतना दम है कि आप इसे बीच में छोड़ना नहीं चाहेंगे।
सबसे बड़ी वजह जिम सर्भ हैं। और दूसरी वजह यह कि सीरीज आपको ऐसी दुनिया में ले जाती है जिसके बारे में हम सब जानते तो हैं, लेकिन ज्यादा जानते नहीं। अगर हर हफ्ते एक जैसे क्राइम थ्रिलर देखकर ऊब चुके हैं, तो यह सीरीज एक मौका जरूर डिजर्व करती है।
टाइटन की घड़ी तो ज्यादातर लोगों ने देखी होगी, लेकिन उसके पीछे की कहानी बहुत कम लोग जानते हैं। यही बात इस सीरीज को खास बनाती है।
हां, सीरीज में कमियां हैं। कई बार यह टाइटन की तरफ थोड़ा ज्यादा झुक जाती है। कुछ किरदार और स्क्रीन टाइम डिजर्व करते थे। कुछ हिस्से थोड़े छोटे भी किए जा सकते थे। लेकिन इन कमियों के बावजूद इसमें इतना दम है कि आप इसे बीच में छोड़ना नहीं चाहेंगे।
सबसे बड़ी वजह जिम सर्भ हैं। और दूसरी वजह यह कि सीरीज आपको ऐसी दुनिया में ले जाती है जिसके बारे में हम सब जानते तो हैं, लेकिन ज्यादा जानते नहीं। अगर हर हफ्ते एक जैसे क्राइम थ्रिलर देखकर ऊब चुके हैं, तो यह सीरीज एक मौका जरूर डिजर्व करती है।