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System Review: न तेज कोर्टरूम ड्रामा, न बड़े ट्विस्ट; फिर क्यों बांधे रखती है सोनाक्षी-ज्योतिका की ‘सिस्टम’?

Kiran Vinod Kumar Jain Kiran Vinod Kumar Jain
Updated Fri, 22 May 2026 12:27 PM IST
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सार

System Movie Review In Hindi: सोनाक्षी सिन्हा और ज्योतिका की कोर्टरूम ड्रामा फिल्म ‘सिस्टम’ ओटीटी पर रिलीज हो चुकी है। फिल्म देखने से पहले पढ़िए रिव्यू और जानिए कैसी है यह फिल्म…

System Movie Review Sonakshi Sinha Jyotika And Ashutosh Gowarikar Courtroom Drama Impressive
सिस्टम फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
सिस्टम
कलाकार
सोनाक्षी सिन्हा , ज्योतिका , आशुतोष गोवारिकर , अदिनाथ कोठारे और सयंदीप सेनगुप्ता
लेखक
हरमन बावेजा , अक्षत घिल्डियाल और तस्नीम लोखंडवाला
निर्देशक
अश्विनी अय्यर तिवारी
निर्माता
पम्मी बावेजा , हरमन बावेजा और स्मिता बालिगा
रिलीज
22 मई 2026
रेटिंग
3/5

विस्तार

आजकल कोर्टरूम ड्रामा फिल्मों में या तो बहुत ज्यादा ड्रामा होता है या फिर उन्हें जरूरत से ज्यादा थ्रिलर बनाने की कोशिश की जाती है। 'सिस्टम' इन दोनों चीजों से थोड़ा अलग रहने की कोशिश करती है।

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फिल्म का फोकस कोर्ट में होने वाली बहसों से ज्यादा उन लोगों पर है, जो इन केसों के बीच अपनी निजी जिंदगी से भी जूझ रहे हैं। अच्छी बात यह है कि फिल्म अपने किरदारों को समय देती है, लेकिन दिक्कत यह है कि कहानी कई जगह उतनी मजबूत नहीं लगती जितनी लगनी चाहिए थी। फिल्म में इमोशन हैं, अच्छे कलाकार हैं और कुछ सीन असर भी छोड़ते हैं। फिर आखिर कहां रह जाती थोड़ी गुंजाइश…

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System Movie Review Sonakshi Sinha Jyotika And Ashutosh Gowarikar Courtroom Drama Impressive
सिस्टम फिल्म रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया

कहानी
कहानी नेहा राजवंश (सोनाक्षी सिन्हा) की है, जो मशहूर वकील रवि राजवंश (आशुतोष गोवारिकर) की बेटी है। नेहा अपने पिता के साथ काम करना चाहती है, लेकिन रवि साफ कहते हैं कि वह किसी एहसान या रिश्ते की वजह से अपनी बेटी को आगे नहीं बढ़ाएंगे। उनका मानना है कि नेहा को पहले खुद को साबित करना होगा और अपने दम पर केस जीतने होंगे।

इसी दौरान नेहा की मुलाकात सारिका (ज्योतिका) से होती है। सारिका एक स्टेनोग्राफर है, जो अपने घर की सारी जिम्मेदारियां अकेले संभाल रही है। उसका पति व्हीलचेयर पर है और जिंदगी उसके लिए आसान नहीं है। नेहा को धीरे-धीरे समझ आता है कि सारिका सिर्फ टाइपिंग का काम नहीं जानती, बल्कि उसे कानून और मुकदमों की भी अच्छी समझ है। वह उसे अपने साथ काम करने का ऑफर देती है।

इसके बाद दोनों साथ में कई केस पर काम करती हैं और उनकी प्रोफेशनल पार्टनरशिप मजबूत होती जाती है। लेकिन कहानी का असली मोड़ तब आता है, जब एक ऐसा केस सामने आता है जिसमें नेहा को अपने ही पिता के खिलाफ कोर्ट में खड़ा होना पड़ता है। इसके बाद फिल्म सिर्फ एक कानूनी लड़ाई नहीं रहती, बल्कि रिश्तों, ईगो और खुद को सही साबित करने की लड़ाई बन जाती है।

System Movie Review Sonakshi Sinha Jyotika And Ashutosh Gowarikar Courtroom Drama Impressive
सिस्टम फिल्म रिव्यू - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

एक्टिंग
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत इसका अभिनय है। ज्योतिका ने बहुत अच्छा काम किया है। उनके किरदार में एक थकान भी दिखती है और मजबूती भी। कई जगह वह बिना ज्यादा डायलॉग के भी सीन को असरदार बना देती हैं। फिल्म खत्म होने के बाद भी उनका किरदार याद रहता है।

सोनाक्षी पिछले कुछ साल में अपने रोल्स को लेकर ज्यादा प्रयोग करती नजर आई हैं और यहां भी वह पहले से ज्यादा कंट्रोल्ड परफॉर्मेंस देती हैं। ‘दहाड़’ और ‘हीरामंडी’ के बाद यह उनका एक और ऐसा रोल है जहां वह सिर्फ स्क्रीन प्रेजेंस पर नहीं, बल्कि किरदार की बेचैनी और दबाव पर काम करती दिखती हैं। कुछ इमोशनल सीन में वह काफी असर छोड़ती हैं।

आशुतोष गोवारिकर का रोल ज्यादा बड़ा नहीं है, लेकिन वह अपने हिस्से में असर छोड़ते हैं। दिलचस्प बात यह है कि निर्देशन के लिए ज्यादा पहचाने जाने वाले आशुतोष इससे पहले भी ‘वेंटिलेटर’ समेत कुछ फिल्मों में अभिनय कर चुके हैं। यहां भी उनका शांत लेकिन सख्त स्क्रीन प्रेजेंस काम आता है। उनका किरदार ऐसा नहीं लिखा गया कि ऑडियंस उन्हें पूरी तरह गलत मान लें और यही बात फिल्म को थोड़ा संतुलन देती है।

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System Movie Review Sonakshi Sinha Jyotika And Ashutosh Gowarikar Courtroom Drama Impressive
सिस्टम फिल्म रिव्यू - फोटो : यूट्यूब ग्रैब

निर्देशन
अश्विनी अय्यर तिवारी का निर्देशन संतुलित है। अच्छी बात यह है कि वह फिल्म को जरूरत से ज्यादा लाउड नहीं बनातीं। कोर्टरूम वाले सीन भी काफी सामान्य तरीके से रखे गए हैं, जो फिल्म को थोड़ा वास्तविक महसूस कराते हैं।

लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी लिखावट है। कई बार ऐसा लगता है कि कहानी कुछ बड़ा कहना चाहती है, लेकिन वहां तक पहुंच नहीं पाती। कुछ सबप्लॉट आते हैं और अचानक खत्म हो जाते हैं। कुछ ट्विस्ट पहले से अंदाजा हो जाते हैं और क्लाइमैक्स भी उतना मजबूत असर नहीं छोड़ता जितनी उम्मीद बनती है।

फिल्म की रफ्तार भी थोड़ी धीमी है। थिएटर में बैठकर देखने पर कुछ हिस्से लंबे लग सकते हैं, लेकिन ओटीटी पर शायद यह ज्यादा बेहतर अनुभव दे।

देखें या नहीं
अगर आप सिर्फ तेज कोर्टरूम थ्रिलर नहीं, बल्कि किरदारों और रिश्तों पर बनी फिल्में पसंद करते हैं, तो ये फिल्म देखी जा सकती है। ज्योतिका और सोनाक्षी सिन्हा की परफॉर्मेंस इसे संभाल लेती है। अच्छी बात यह है कि फिल्म जरूरत से ज्यादा ड्रामा या चीख-चिल्लाहट में नहीं जाती।

हां, अगर आप एक बेहद टाइट और पूरी तरह ग्रिपिंग कोर्टरूम थ्रिलर की उम्मीद से बैठेंगे, तो शायद थोड़ी कमी महसूस हो। क्योंकि फिल्म कई जगह मजबूत असर छोड़ते-छोड़ते रुक जाती है। फिर भी अपने कलाकारों और कुछ इमोशनल पलों की वजह से ‘सिस्टम’ एक बार देखी जा सकती है।

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