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Love All Review: के के मेनन की बड़े परदे पर शानदार वापसी, ‘स्पेशल ऑप्स 2’ से पहले पूरा किया मिशन बैडमिंटन

Thu, 31 Aug 2023 11:46 AM IST
Virendra Mishra वीरेंद्र मिश्र
Updated Thu, 31 Aug 2023 11:46 AM IST
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Love All Review Kay Kay Menon Swastika Mukherjee Shriswara atul srivastava film
लव ऑल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
लव ऑल
कलाकार
के के मेनन , स्वस्तिक मुखर्जी , श्रीस्वरा , अतुल श्रीवास्तव , सत्यकाम आनंद और राजा बुंदेला आदि
लेखक
सुधांशु शर्मा
निर्देशक
सुधांशु शर्मा
निर्माता
सुधांशु शर्मा और पुलेला गोपीचंद आदि
रिलीज
1 सितंबर 2023
रेटिंग
3/5

अभिनेता के के मेनन लौट आए हैं। फिल्म 'लव ऑल' के जरिए उनकी चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी हुई है और के के मेनन के अभिनय के मुरीद रहे दर्शकों के लिए ये फिल्म किसी जश्न से कम नहीं है। बाप-बेटे की भावुक कहानी है और पृष्ठभूमि बैडमिंटन की है। इस फिल्म के जरिए बैडमिंटन के वास्तविक रोमांच को पर्दे पर साकार किया गया है। साथ ही इस फिल्म में बैडमिंटन के खेल को बड़ी ही शिद्दत के साथ पेश किया गया है। हिंदी के अलावा यह फिल्म तमिल, तेलुगु, कन्नड़, मलयालम, बांग्ला और उड़िया भाषाओं में एक साथ रिलीज हुई है। के के मेनन की वेब सीरीज ‘स्पेशल ऑप्स’ के तीसरे सीजन का दर्शक इन दिनों बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं और ऐसे में इस फिल्म की रिलीज उनके प्रशंसकों के लिए किसी तोहफे से कम नहीं है।

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Love All Review Kay Kay Menon Swastika Mukherjee Shriswara atul srivastava film
लव ऑल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिल्म 'लव ऑल' कहानी उस सिद्धार्थ शर्मा की है जिसे बैडमिंटन खेल को लेकर एक जुनून था। सत्ता में बैठे लोगों की अस्वीकृति और उपेक्षा से असंतुष्ट होकर वह चिड़चिड़ा और एक अलग थलग रहने वाला व्यक्ति बन जाता है। इसका असर उसके परिवार पर भी पड़ता है। खेल के प्रति उसकी पीड़ा और  नफरत उसके परिवार पर हावी हो जाती है और वह अपने बेटे को ये खेल खेलने से मना कर देता है। लेकिन, नियति उसे फिर से उसी शहर भोपाल में वापस ले आती है जहां उसके सपने टूट कर बिखर गए थे। उसने सोचा भी नहीं था कि इसी शहर में उसे इन हालात में दोबारा आना होगा।


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Love All Review Kay Kay Menon Swastika Mukherjee Shriswara atul srivastava film
लव ऑल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अक्सर इंसान अपनी हार को अपने बच्चों में भी देखना शुरू कर देता है। जीवन में चाहे उसे जिस भी वजह से हार या निराशा मिली हो, उसे लगता है कि उस रास्ते पर चलकर उसके बच्चों को भी निराशा ही हाथ लगेगी। सिद्धार्थ ने अपने बेटे को खेल खेलने से मना कर दिया, उसे लगता है कि खेल या कोई भी गतिविधि,  उसे पढ़ाई के स्थापित रास्ते से भटका देती है। उनका मानना है कि अपने बेटे को खेल से बचाना ही उसके लिए गरिमा और सम्मान का जीवन सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है। जब आदित्य शर्मा की टीचर सिद्धार्थ शर्मा से पूछती है कि वह अपने बेटे को खेलने से मना करके उसे क्यों चोट पहुंचाना चाहता है। सिद्धार्थ शर्मा कहता कि चोट नहीं पहुंचा रहा हूं, बल्कि आगे जो चोट लगने वाली है, उससे बचा रहा हूं। लेकिन, एक समय के बाद सिद्धार्थ शर्मा को अपनी गलती का अहसास होता है और वह अपने बेटे का ही कोच बन जाता है, खेल में भी और जीवन में भी।

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Love All Review Kay Kay Menon Swastika Mukherjee Shriswara atul srivastava film
लव ऑल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस फिल्म की पृष्ठभूमि भले ही बैडमिंटन खेल पर हो। लेकिन इस फिल्म के माध्यम से निर्देशक सुधांशु शर्मा ने यह बताते की कोशिश की है कि खेल एक साधारण आदमी को भी खिलाड़ी बना सकती है। और, खेल का मैच तो ऐसा होता है कि जिसे अपने ही विरुद्ध लड़कर जीतना पड़ता है। फिल्म के निर्देशक ने बैडमिंटन खिलाड़ी के खेल के सही जज्बे को उचित तरीके से पर्दे पर पेश किया है। इंटरवल के बाद फिल्म सही रफ्तार पकड़ती है और खेल से जुड़े तमाम सीक्वेंस की शूटिंग के दौरान खेल के तकनीकी पक्ष को बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है। मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद चूंकि इस फिल्म से जुड़े हैं, लिहाजा खेल के तकनीकी पक्ष को उन्होंने कमजोर नहीं होने दिया। फिल्म का क्लाइमेक्स भी जबर्दस्त रोमांच पैदा करता है।

Love All Review Kay Kay Menon Swastika Mukherjee Shriswara atul srivastava film
लव ऑल रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म में के के मेमन ने सिद्धार्थ शर्मा की भूमिका निभाई है। देखा जाए तो पूरी फिल्म पिता पुत्र के भावनात्मक रिश्ते  के ही इर्द गिर्द घूमती हैं। के के मेमन तो मंजे हुए कलाकार हैं ही, फिल्म में बाल कलाकारों ने बहुत अच्छा काम किया है। काफी लंबे समय के बाद अभिनेता राजा बुंदेला एक ही सीन में नजर आए लेकिन एक ही सीन में उन्होंने अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी। फिल्म के बाकी कलाकारों में स्वस्तिक मुखर्जी, श्रीस्वरा, अतुल श्रीवास्तव और सत्यकाम आनंद का काम सामान्य है। गीत-संगीत और संपादन विभागों में फिल्म थोड़ी कमजोर जरूर है लेकिन के के मेनन के जीवट के लिए ये फिल्म देखी जा सकती है।

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