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The Raja Saab Movie Review: न डराती है.. न हंसाती है प्रभास की फिल्म, ऐसे ‘राजा साब’ से प्रजा की दूरी ही बेहतर

Kiran Jain किरण जैन
Updated Fri, 09 Jan 2026 12:41 PM IST
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सार

The Raja Saab Review: प्रभास और संजय दत्त की फिल्म ‘द राजा साब’ आज सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। फिल्म देखने से पहले पढ़िए ये रिव्यू और जानिए कैसी है प्रभास की ये हॉरर-कॉमेडी फिल्म…

The Raja Saab Movie Review Prabhas And Sanjay Dutt Starrer Movie Weak Story Has No Horror No Comedy
द राजा साब फिल्म रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
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Movie Review
द राजा साब
कलाकार
प्रभास , संजय दत्त , निधि अग्रवाल , मालविका मोहनन , रिद्धि कुमार , बोमन ईरानी और जरीना वहाब
लेखक
मारुति
निर्देशक
मारुति
निर्माता
टी.जी. विश्व प्रसाद
रिलीज
9 जनवरी 2026
रेटिंग
2/5

विस्तार
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'द राजा साब' को हॉरर-फैंटेसी-कॉमेडी बताकर पेश किया गया है, लेकिन असल में यह एक जॉनर-कन्फ्यूज, बिखरी हुई और जरूरत से ज्यादा लंबी फिल्म बनकर रह जाती है। प्रभास जैसे बड़े स्टार और मारुति जैसे अनुभवी निर्देशक के बावजूद फिल्म यह तय ही नहीं कर पाती कि वह आखिर बनना क्या चाहती है। बड़े सेट, भारी बजट और तामझाम के पीछे कंटेंट की भारी कमी साफ दिखती है।

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The Raja Saab Movie Review Prabhas And Sanjay Dutt Starrer Movie Weak Story Has No Horror No Comedy
द राजा साब फिल्म रिव्यू - फोटो : एक्स rajasaabmovie
कहानी
फिल्म की कहानी सुनने में दिलचस्प लगती है, लेकिन देखने में उतनी ही ज्यादा थकाऊ और उलझी हुई हो जाती है। राजा (प्रभास) अपनी अल्जाइमर पीड़ित दादी गंगम्मा (जरीना वहाब)  की एक ही जिद...कि उसके पति कनकराजू (संजय दत्त) जिंदा हैं..इसे सच मानकर उनकी तलाश में निकलता है। यह तलाश उसे हैदराबाद की एक पुरानी, रहस्यमयी हवेली तक ले जाती है, जहां आत्माएं, तंत्र-मंत्र, डर और अतीत के कई राज छुपे हुए हैं। समस्या यह नहीं कि कहानी में आइडिया कमजोर है, बल्कि यह है कि फिल्म को खुद नहीं पता कि इस आइडिया के साथ क्या करना है।
पहले आधे घंटे में कहानी इमोशनल ड्रामा बनती है... फिर अचानक कॉमेडी में बदल जाती है और उसके बाद जबरदस्ती हॉरर ठूंस दिया जाता है। कई सीन ऐसे आते हैं जिनका आगे की कहानी से कोई मतलब नहीं निकलता। क्लाइमैक्स तक पहुंचते-पहुंचते फिल्म इतनी थक चुकी होती है कि ऑडियंस को न डर लगता है, न किसी तरह की एक्साइटमेंट बचती है। कुल मिलाकर, कहानी एक मजबूत स्क्रिप्ट और टाइट ट्रीटमेंट की कमी के कारण बिखर जाती है।
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The Raja Saab Movie Review Prabhas And Sanjay Dutt Starrer Movie Weak Story Has No Horror No Comedy
द राजा साब फिल्म रिव्यू - फोटो : इंस्टाग्राम- @actorprabhas
एक्टिंग
प्रभास इस फिल्म में अपनी सुपरस्टार इमेज तोड़ने की कोशिश करते हैं, लेकिन कमजोर किरदार और ढीली स्क्रिप्ट उन्हें पूरी तरह नुकसान पहुंचाती है। कॉमेडी करने की कोशिश पूरी तरह फेल है। मज़ाक बहुत बोरिंग हैं...कॉमेडी सीन में वह कई जगह जरूरत से ज्यादा ओवरएक्टिंग करते हैं, जिससे सीन्स बनावटी लगने लगते हैं। वहीं हॉरर सीन में उनके एक्टिंग में न डर नजर आता है और न ही गंभीरता, जिस कारण ऐसे सीन असरहीन रह जाते हैं। यह किरदार न याद रह जाता है और न ही कोई खास प्रभाव छोड़ता है, बल्कि प्रभास के करियर का एक कमजोर रोल बनकर रह जाता है।
संजय दत्त फिल्म के सबसे मजबूत पहलू हैं। उनका किरदार रहस्यमय और डर पैदा करने वाला है। बोमन ईरानी ने लिमिटेड स्क्रीन टाइम में भी प्रभावशाली अभिनय किया है। जरीना वहाब दादी के रोल में ईमानदार हैं...मालविका मोहनन, निधि अग्रवाल और रिद्धि कुमार के किरदार सिर्फ गानों और ग्लैमर तक सिमट कर रह जाते हैं। कहानी पर उनका कोई असर नहीं पड़ता।

The Raja Saab Movie Review Prabhas And Sanjay Dutt Starrer Movie Weak Story Has No Horror No Comedy
द राजा साब फिल्म रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया
निर्देशन
मारुति का निर्देशन सबसे बड़ी निराशा है। हॉरर, कॉमेडी, फैंटेसी, इमोशन....सब कुछ एक ही फिल्म में डालने की कोशिश की गई है, लेकिन किसी पर भी पकड़ नहीं बन पाती। डरावने सीन डराते नहीं, कॉमेडी सीन हंसाते नहीं और इमोशनल पल जल्दी ही बनावटी लगने लगते हैं।

संगीत और तकनीकी पक्ष
बैकग्राउंड म्यूजिक माहौल बनाने में नाकाम रहता है। गाने बेवजह कहानी की रफ्तार तोड़ते हैं। VFX और ग्रीन-स्क्रीन का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल कई जगह टीवी-सीरियल जैसा फील देता है, जो इतने बड़े बजट वाली फिल्म के लिए निराशाजनक है। एडिटिंग ढीली है और फिल्म जरूरत से कहीं ज्यादा लंबी लगती है।

The Raja Saab Movie Review Prabhas And Sanjay Dutt Starrer Movie Weak Story Has No Horror No Comedy
द राजा साब फिल्म रिव्यू - फोटो : सोशल मीडिया
पॉजिटिव पॉइंट
प्रभास लंबे समय बाद कॉमिक रोल में नजर आए हैं... और कुछ सीन में हंसाते है..जरीना वहाब की एक्टिंग सधी हुई और भावनात्मक है। संजय दत्त की किरदार का साइकोलॉजिकल एंगल दिलचस्प लगता है। दूसरे हाफ में कुछ सीन बेहतर बन पड़े हैं। बोमन ईरानी के साथ संजय दत्त का साइकोलॉजिकल खेल... हॉस्पिटल वाला इमोशनल सीन असर छोड़ते हैं। ये पल फिल्म को थोड़ी देर के लिए इंटरेस्टिंग लगते हैं, लेकिन ओवरऑल इम्पैक्ट नहीं बदल पाते।

देखें या नहीं
अगर आप सिर्फ प्रभास के कट्टर फैन हैं, तो जिज्ञासा में एक बार देख सकते हैं। लेकिन अगर आप अच्छी कहानी, सच्चा हॉरर या ढंग की कॉमेडी ढूंढ रहे हैं, तो द राजा साब आपको यकीनन निराश ही करेगी। कुल मिलाकर बड़े बजट और बड़े नामों के बावजूद यह फिल्म एक मिस्ड ऑपर्च्युनिटी है ...नाम बड़े, दर्शन छोटे।
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