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मौत की धमकियां मिलने से लेकर संजीव कुमार संग दोस्ती तक, परीक्षत साहनी ने साझा किए जिंदगी के अनुभव
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: हिमांशु सोनी
Updated Wed, 15 Oct 2025 03:58 PM IST
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सार
Parikshat Sahni Interview: दिग्गज अभिनेता परीक्षत साहनी ने ANI से बात करते हुए कई दिलचस्प किस्से साझा किए हैं। उन्होंने अभिनेता संजीव कुमार के साथ अपनी दोस्ती को लेकर भी बात की।
परिक्षित साहनी
- फोटो : ANI
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विस्तार
हिंदी सिनेमा में परीक्षत साहनी वो नाम हैं, जिनके अभिनय में संवेदनशीलता, गहराई और सच्चाई की झलक साफ दिखती है। दिग्गज अभिनेता बलराज साहनी के बेटे परीक्षत साहनी ने न सिर्फ अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाया, बल्कि अपनी मेहनत और प्रतिभा से एक अलग पहचान भी बनाई। ‘अनूठी रात’, ‘तपस्या’, ‘3 इडियट्स’ और ‘हाउसफुल 4’ जैसी फिल्मों से लेकर ‘गुल गुलशन गुलफाम’ जैसे मशहूर टीवी शो तक, परीक्षत साहनी का सफर भारतीय मनोरंजन जगत के सुनहरे अध्यायों में दर्ज है।
पिता बलराज साहनी का 'नेचुरल एक्टिंग' सीक्रेट
परीक्षत साहनी ने हाल ही में बताया कि उनके पिता की अभिनय कला जितनी सहज लगती थी, उतनी ही गहराई उसमें छिपी थी। बलराज साहनी अपने डायलॉग्स को पहले गुरुमुखी लिपि में पंजाबी में लिखकर रिहर्सल किया करते थे। इसके बाद जब वो वही डायलॉग हिंदी में बोलते, तो उनकी आवाज और भाव बिल्कुल प्राकृतिक लगते। परीक्षत साहनी के अनुसार, उनके पिता हमेशा कहते थे- 'एक्ट मत करो, यकीन करो।' यही भरोसा बलराज साहनी को ‘दो बीघा जमीन’, ‘काबुलीवाला’, ‘वक्त’ और ‘गर्म हवा’ जैसी क्लासिक फिल्मों में अमर बना गया।
संजीव कुमार संग गहरी दोस्ती
अपने करियर की शुरुआत में परीक्षत साहनी की मुलाकात अभिनेता संजीव कुमार से हुई। उस समय परीक्षत साहनी रूस से पढ़ाई करके लौटे थे और उन्हें हिंदी बोलने में कठिनाई होती थी। ऐसे में संजीव कुमार ने उन्हें संवाद बोलने और अभिनय की बारीकियां समझाने में मदद की। परीक्षत साहनी ने बताया, 'वो मेरे बड़े भाई जैसे थे। हर डायलॉग में सही ठहराव और भाव डालना मैंने उन्हीं से सीखा।'
संजीव कुमार के व्यक्तित्व को याद करते हुए परीक्षत साहनी ने कहा कि वे बेहद संवेदनशील और बहुमुखी कलाकार थे- एक्शन, कॉमेडी और ट्रैजेडी, हर किरदार में जान डाल देते थे। लेकिन साथ ही उन्होंने अपने जीवन में अस्वस्थ आदतों और तनाव का भी सामना किया, जिसके चलते वे कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह गए।
शूटिंग के दौरान मौत की धमकियां
90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ शो ‘गुल गुलशन गुलफाम’ आज भी याद किया जाता है। कश्मीर की डल झील की पृष्ठभूमि पर आधारित इस धारावाहिक की शूटिंग के दौरान परीक्षत साहनी और उनकी टीम को जेकेएनएफ संगठन की ओर से धमकियां मिलीं। उन्हें कहा गया कि शूटिंग बंद करें और कश्मीर छोड़ दें, वरना जान से मार दिया जाएगा।
यह खबर भी पढ़ें: सलमान से लेकर शाहरुख तक, कई सुपरस्टार्स के साथ पंकज धीर ने किया काम; इन फिल्मों में निभाए थे यादगार किरदार
परीक्षत साहनी याद करते हैं, 'हमने तुरंत श्रीनगर छोड़ा और फिल्म सिटी में झील का पूरा सेट बनवाया। इतनी बारीकी से शूट किया गया कि दर्शकों को फर्क तक महसूस नहीं हुआ।' यह शो 45 एपिसोड तक चला और देशभर में बेहद लोकप्रिय हुआ।
अभिनय में सादगी और गहराई
परीक्षत साहनी का मानना है कि अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं बल्कि भावों को जीना है। कश्मीर की पृष्ठभूमि में बने किरदारों को निभाते हुए उन्होंने बताया कि वहां की भाषा, संस्कृति और लोगों से उनका गहरा नाता था, इसलिए वह अभिनय उनके भीतर से खुद-ब-खुद निकलता था।
पिता की सीख और सिनेमा से जुड़ाव
बलराज साहनी की सीख 'एक्ट मत करो, विश्वास करो' आज भी परीक्षत साहनी के जीवन का मूलमंत्र है। वो कहते हैं, 'मेरे पिता सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रतीक थे। उन्होंने सिखाया कि कला का असली मतलब ईमानदारी है।' परीक्षत साहनी ने न सिर्फ़ अपने पिता की परंपरा को जीवित रखा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की सादगी, संवेदना और सच्चाई का एक मानक भी स्थापित किया।
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पिता बलराज साहनी का 'नेचुरल एक्टिंग' सीक्रेट
परीक्षत साहनी ने हाल ही में बताया कि उनके पिता की अभिनय कला जितनी सहज लगती थी, उतनी ही गहराई उसमें छिपी थी। बलराज साहनी अपने डायलॉग्स को पहले गुरुमुखी लिपि में पंजाबी में लिखकर रिहर्सल किया करते थे। इसके बाद जब वो वही डायलॉग हिंदी में बोलते, तो उनकी आवाज और भाव बिल्कुल प्राकृतिक लगते। परीक्षत साहनी के अनुसार, उनके पिता हमेशा कहते थे- 'एक्ट मत करो, यकीन करो।' यही भरोसा बलराज साहनी को ‘दो बीघा जमीन’, ‘काबुलीवाला’, ‘वक्त’ और ‘गर्म हवा’ जैसी क्लासिक फिल्मों में अमर बना गया।
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संजीव कुमार संग गहरी दोस्ती
अपने करियर की शुरुआत में परीक्षत साहनी की मुलाकात अभिनेता संजीव कुमार से हुई। उस समय परीक्षत साहनी रूस से पढ़ाई करके लौटे थे और उन्हें हिंदी बोलने में कठिनाई होती थी। ऐसे में संजीव कुमार ने उन्हें संवाद बोलने और अभिनय की बारीकियां समझाने में मदद की। परीक्षत साहनी ने बताया, 'वो मेरे बड़े भाई जैसे थे। हर डायलॉग में सही ठहराव और भाव डालना मैंने उन्हीं से सीखा।'
संजीव कुमार के व्यक्तित्व को याद करते हुए परीक्षत साहनी ने कहा कि वे बेहद संवेदनशील और बहुमुखी कलाकार थे- एक्शन, कॉमेडी और ट्रैजेडी, हर किरदार में जान डाल देते थे। लेकिन साथ ही उन्होंने अपने जीवन में अस्वस्थ आदतों और तनाव का भी सामना किया, जिसके चलते वे कम उम्र में ही दुनिया को अलविदा कह गए।
शूटिंग के दौरान मौत की धमकियां
90 के दशक में दूरदर्शन पर प्रसारित हुआ शो ‘गुल गुलशन गुलफाम’ आज भी याद किया जाता है। कश्मीर की डल झील की पृष्ठभूमि पर आधारित इस धारावाहिक की शूटिंग के दौरान परीक्षत साहनी और उनकी टीम को जेकेएनएफ संगठन की ओर से धमकियां मिलीं। उन्हें कहा गया कि शूटिंग बंद करें और कश्मीर छोड़ दें, वरना जान से मार दिया जाएगा।
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परीक्षत साहनी याद करते हैं, 'हमने तुरंत श्रीनगर छोड़ा और फिल्म सिटी में झील का पूरा सेट बनवाया। इतनी बारीकी से शूट किया गया कि दर्शकों को फर्क तक महसूस नहीं हुआ।' यह शो 45 एपिसोड तक चला और देशभर में बेहद लोकप्रिय हुआ।
अभिनय में सादगी और गहराई
परीक्षत साहनी का मानना है कि अभिनय केवल संवाद बोलना नहीं बल्कि भावों को जीना है। कश्मीर की पृष्ठभूमि में बने किरदारों को निभाते हुए उन्होंने बताया कि वहां की भाषा, संस्कृति और लोगों से उनका गहरा नाता था, इसलिए वह अभिनय उनके भीतर से खुद-ब-खुद निकलता था।
पिता की सीख और सिनेमा से जुड़ाव
बलराज साहनी की सीख 'एक्ट मत करो, विश्वास करो' आज भी परीक्षत साहनी के जीवन का मूलमंत्र है। वो कहते हैं, 'मेरे पिता सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि इंसानियत के प्रतीक थे। उन्होंने सिखाया कि कला का असली मतलब ईमानदारी है।' परीक्षत साहनी ने न सिर्फ़ अपने पिता की परंपरा को जीवित रखा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिनय की सादगी, संवेदना और सच्चाई का एक मानक भी स्थापित किया।
