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एआर रहमान: 'राम-सीता विवाह में कुन फाया वाली फील क्यों'?, 'रामायण' के गाने पर छिड़ा विवाद; भड़के यूजर्स
Mon, 26 Oct 2026 12:43 PM IST
राजश्री वर्मा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: राजश्री वर्मा
Updated Mon, 26 Oct 2026 12:43 PM IST
सार
- फिल्म 'रामायण' का गाना 'मंगल रंग' हाल ही में रिलीज हुआ है।
- इसका म्यूजिक हंस जिमर और एआर रहमान ने दिया है, जिसे लेकर अब वह ट्रोल हो रहे हैं।
- यूजर्स का कहना है कि इससे सुनने के बाद उन्हें कव्वाली वाली फील आ रही है।
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मंगल रंग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
नितेश तिवारी की फिल्म 'रामायण' का नया गाना 'मंगल रंग' रिलीज होते ही चर्चा में आ गया है। हालांकि, गाना अपनी धुन या बोल से ज्यादा विवादों की वजह से सुर्खियां बटोर रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोग गाने के संगीत को लेकर सवाल उठा रहे हैं और संगीतकार एआर रहमान की आलोचना कर रहे हैं। कुछ यूजर्स का कहना है कि भगवान राम और माता सीता की शादी पर बनाए गए इस गाने में कव्वाली और सूफी संगीत का इस्तेमाल किया गया है, जो रामायण की कहानी और उसके माहौल के हिसाब से सही नहीं है।
बता दें कि रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर 'रामायण' इस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। फिल्म में रणबीर भगवान 'राम' और साई पल्लवी माता 'सीता' की भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, फिल्म का नया गाना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग गाने की तुलना रहमान के पुराने गानों से कर रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इसका संगीत रामायण जैसे महाकाव्य के मुताबिक नहीं है।
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बता दें कि रणबीर कपूर और साई पल्लवी स्टारर 'रामायण' इस साल की सबसे चर्चित फिल्मों में से एक है। फिल्म में रणबीर भगवान 'राम' और साई पल्लवी माता 'सीता' की भूमिका निभा रही हैं। हालांकि, फिल्म का नया गाना सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग गाने की तुलना रहमान के पुराने गानों से कर रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि इसका संगीत रामायण जैसे महाकाव्य के मुताबिक नहीं है।
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रामायण
- फोटो : यूट्यूब
'मंगल रंग' में क्या देखने को मिला?
'मंगल रंग' फिल्म में भगवान राम और माता सीता के विवाह के जश्न को दिखाया गया है। इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गाने का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है। उन्होंने ही इसे प्रोड्यूस और अरेंज भी किया है। वहीं, इसके बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।
गाना सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसके संगीत को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई एक्स यूजर्स ने दावा किया कि गाने में कव्वाली की झलक सुनाई देती है। वहीं, कुछ लोगों ने इसकी तुलना रहमान के पुराने गानों से भी की।
'मंगल रंग' फिल्म में भगवान राम और माता सीता के विवाह के जश्न को दिखाया गया है। इसे अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल ने अपनी आवाज दी है। गाने का संगीत एआर रहमान ने तैयार किया है। उन्होंने ही इसे प्रोड्यूस और अरेंज भी किया है। वहीं, इसके बोल कुमार विश्वास ने लिखे हैं।
गाना सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसके संगीत को लेकर चर्चा शुरू हो गई। कई एक्स यूजर्स ने दावा किया कि गाने में कव्वाली की झलक सुनाई देती है। वहीं, कुछ लोगों ने इसकी तुलना रहमान के पुराने गानों से भी की।
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रामायण
- फोटो : यूट्यूब
क्यों तमिल गानों से हुई तुलना?
एक यूजर ने 'मंगल रंग' का वीडियो शेयर करते हुए इसकी तुलना एआर रहमान के तमिल गाने 'एना सोल्ला पोगिराई' से की। यह गाना साल 2000 में आई फिल्म 'कंडुकोंडेन कंडुकोंडेन' का है, जिसमें अजित कुमार, ममूटी, तब्बू और ऐश्वर्या राय बच्चन नजर आए थे।
यूजर ने लिखा, ''रामायण' का 'मंगल रंग' साफ तौर पर कव्वाली लग रहा है। इसका कोरस 'रंग' शब्द का इस्तेमाल, जो मशहूर कव्वाली 'आज रंग है' में भी सुनने को मिलता है और गिटार की धुन बुलबुल तरंग की याद दिलाती है। इसके अलावा यह रहमान के अपने ही पुराने गाने 'एना सोल्ला पोगिराई' से प्रेरित लगता है।
एक यूजर ने 'मंगल रंग' का वीडियो शेयर करते हुए इसकी तुलना एआर रहमान के तमिल गाने 'एना सोल्ला पोगिराई' से की। यह गाना साल 2000 में आई फिल्म 'कंडुकोंडेन कंडुकोंडेन' का है, जिसमें अजित कुमार, ममूटी, तब्बू और ऐश्वर्या राय बच्चन नजर आए थे।
यूजर ने लिखा, ''रामायण' का 'मंगल रंग' साफ तौर पर कव्वाली लग रहा है। इसका कोरस 'रंग' शब्द का इस्तेमाल, जो मशहूर कव्वाली 'आज रंग है' में भी सुनने को मिलता है और गिटार की धुन बुलबुल तरंग की याद दिलाती है। इसके अलावा यह रहमान के अपने ही पुराने गाने 'एना सोल्ला पोगिराई' से प्रेरित लगता है।
रामायण
- फोटो : यूट्यूब
'कुन फाया कुन' से भी हुई तुलना
इसके अलावा कई लोगों ने 'मंगल रंग' की तुलना फिल्म 'रॉकस्टार' के मशहूर गाने 'कुन फाया कुन' से भी की। साल 2011 में आई रणबीर कपूर की इस फिल्म का संगीत भी एआर रहमान ने दिया था। एक यूजर ने गाने पर नाराजगी जताते हुए लिखा, 'निराशाजनक! एआर रहमान इस फिल्म के लिए संगीतकार के तौर पर सबसे खराब पसंद थे। यह गाना किसी कव्वाली जैसा लगता है। इसमें 'रॉकस्टार' और 'जोधा अकबर' के उनके पुराने संगीत की झलक है। खासकर 'कुन फाया कुन' जैसी फीलिंग आती है। रहमान ने 'छावा' में भी ऐसा ही औसत काम किया था। अजय-अतुल या शंकर-एहसान-लॉय इस फिल्म के संगीत के साथ ज्यादा न्याय कर सकते थे।'
इसके अलावा कई लोगों ने 'मंगल रंग' की तुलना फिल्म 'रॉकस्टार' के मशहूर गाने 'कुन फाया कुन' से भी की। साल 2011 में आई रणबीर कपूर की इस फिल्म का संगीत भी एआर रहमान ने दिया था। एक यूजर ने गाने पर नाराजगी जताते हुए लिखा, 'निराशाजनक! एआर रहमान इस फिल्म के लिए संगीतकार के तौर पर सबसे खराब पसंद थे। यह गाना किसी कव्वाली जैसा लगता है। इसमें 'रॉकस्टार' और 'जोधा अकबर' के उनके पुराने संगीत की झलक है। खासकर 'कुन फाया कुन' जैसी फीलिंग आती है। रहमान ने 'छावा' में भी ऐसा ही औसत काम किया था। अजय-अतुल या शंकर-एहसान-लॉय इस फिल्म के संगीत के साथ ज्यादा न्याय कर सकते थे।'
एआर रहमान
- फोटो : अमर उजाला
एआर रहमान पर गानों के इस्लामीकरण का आरोप
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गाने को लेकर एआर रहमान पर धार्मिक सवाल भी उठाए। एक यूजर ने उन पर गानों के इस्लामीकरण का आरोप लगाते हुए लिखा, 'पहले 'छावा' के गानों का इस्लामीकरण किया गया और अब 'रामायण' के स्वयंवर वाले गाने को एक तमिल गाने से कॉपी करके सूफी कव्वाली बना दिया गया है। एआर रहमान गानों का इस्लामीकरण करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं।'
वहीं, एक अन्य यूजर का कहना था कि रामायण जैसे विषय पर बने गाने में पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों और संस्कृत शब्दों का ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए था। यूजर ने लिखा, 'यह गाना 'कुन फाया कुन' जैसा लग रहा है। इसमें वीणा, सितार, मृदंग और तबले का ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए था। साथ ही गाने के बोल में संस्कृत शब्द होने चाहिए थे, क्योंकि यह रामायण पर आधारित है। निराश करने वाली बात यह है कि इसके बोल में 'तू तेरा मेरा' जैसे शब्द हैं। गाने में भगवान से जुड़ा भाव पूरी तरह गायब है।'
कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने गाने को लेकर एआर रहमान पर धार्मिक सवाल भी उठाए। एक यूजर ने उन पर गानों के इस्लामीकरण का आरोप लगाते हुए लिखा, 'पहले 'छावा' के गानों का इस्लामीकरण किया गया और अब 'रामायण' के स्वयंवर वाले गाने को एक तमिल गाने से कॉपी करके सूफी कव्वाली बना दिया गया है। एआर रहमान गानों का इस्लामीकरण करने का एक भी मौका नहीं छोड़ रहे हैं।'
वहीं, एक अन्य यूजर का कहना था कि रामायण जैसे विषय पर बने गाने में पारंपरिक भारतीय वाद्ययंत्रों और संस्कृत शब्दों का ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए था। यूजर ने लिखा, 'यह गाना 'कुन फाया कुन' जैसा लग रहा है। इसमें वीणा, सितार, मृदंग और तबले का ज्यादा इस्तेमाल होना चाहिए था। साथ ही गाने के बोल में संस्कृत शब्द होने चाहिए थे, क्योंकि यह रामायण पर आधारित है। निराश करने वाली बात यह है कि इसके बोल में 'तू तेरा मेरा' जैसे शब्द हैं। गाने में भगवान से जुड़ा भाव पूरी तरह गायब है।'
रणबीर कपूर, एआर रहमान
- फोटो : सोशल मीडिया
'रामायण' के लिए रहमान को चुनने पर भी उठे सवाल
कुछ यूजर्स ने फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी के एआर रहमान को संगीतकार चुनने के फैसले पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, 'यही वजह है कि मुझे नमित और नितेश का 'रामायण' के लिए एआर रहमान को चुनने का फैसला पसंद नहीं आया था। उन्होंने 'छावा' में उर्दू संगीत लाकर फिल्म को खराब कर दिया, वरना वह और भी बड़ी ब्लॉकबस्टर बन सकती थी।
इतनी ट्रोलिंग के बाद भी वह 'रामायण' में सूफी संगीत लाने से नहीं रुके। समझ नहीं आता कि निर्देशक ने इसे कैसे स्वीकार कर लिया।' वहीं, एक दूसरे यूजर ने रहमान पर तंज कसते हुए उन्हें 'ओवरहाइप्ड सस्ता तानसेन' बताया और कहा कि उन्होंने एक बार फिर गाने का माहौल खराब कर दिया।
कुछ यूजर्स ने फिल्म के निर्माता नमित मल्होत्रा और निर्देशक नितेश तिवारी के एआर रहमान को संगीतकार चुनने के फैसले पर भी सवाल उठाए। एक यूजर ने लिखा, 'यही वजह है कि मुझे नमित और नितेश का 'रामायण' के लिए एआर रहमान को चुनने का फैसला पसंद नहीं आया था। उन्होंने 'छावा' में उर्दू संगीत लाकर फिल्म को खराब कर दिया, वरना वह और भी बड़ी ब्लॉकबस्टर बन सकती थी।
इतनी ट्रोलिंग के बाद भी वह 'रामायण' में सूफी संगीत लाने से नहीं रुके। समझ नहीं आता कि निर्देशक ने इसे कैसे स्वीकार कर लिया।' वहीं, एक दूसरे यूजर ने रहमान पर तंज कसते हुए उन्हें 'ओवरहाइप्ड सस्ता तानसेन' बताया और कहा कि उन्होंने एक बार फिर गाने का माहौल खराब कर दिया।