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रवि किशन ने की 'धुरंधर' और 'लापता लेडीज' की तुलना, बोले- 'अगर 5 करोड़ में बनी फिल्म ऑस्कर जाती है..'
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Wed, 04 Feb 2026 12:52 PM IST
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सार
Ravi Kishan: रवि किशन ने भारतीय सिनेमा में बड़े बजट और छोटे बजट की फिल्मों को लेकर बात की है। उन्होंने अपनी अपकमिंग फिल्म को लेकर उम्मीद भी जताई है।
सोशल मीडिया
- फोटो : यूट्यूब
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विस्तार
एक्टर और पॉलिटिशियन रवि किशन अपनी अपकमिंग फिल्म 'भाभीजी घर पर हैं! फन ऑन द रन' को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने भारतीय सिनेमा के बारे में बात की है। उनका मानना है कि 'लापता लेडीज' जैसी फिल्में दुनिया भर में भारतीय सिनेमा को नई उम्मीद देती हैं। उनका मानना है कि ऐसी कहानी वाली फिल्में इस बात का सबूत हैं कि बड़े बजट से ज्यादा अच्छा कंटेंट मायने रखता है। उन्होंने इस फिल्म में एक रोल निभाया। यह फिल्म ऑस्कर के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री थी।
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'लापता लेडीज' को लेकर क्या बोले रवि किशन?
इंडिया टुडे से बातचीत में रवि किशन ने छोटे प्रोजेक्ट्स और भारतीय सिनेमा पर उनके बढ़ते असर के बीच तुलना की। उन्होंने कहा, 'अगर फिल्म (भाभीजी घर पर हैं) 6 तारीख तक रफ्तार पकड़ लेती है, तो यह ऐतिहासिक होगा। ठीक वैसे ही जैसे 5 करोड़ रुपये के छोटे बजट में बनी फिल्म 'लापता लेडीज' ऑस्कर तक पहुंची थी। यह एक मिसाल कायम करेगी कि जहां 'धुरंधर' और 'बॉर्डर 2' जैसी बड़े बजट की फिल्में हैं, वहीं इस तरह के छोटे बजट की फिल्में भी कामयाब हो सकती हैं। इससे इंडस्ट्री में हर तरह के फिल्ममेकर को टिके रहने का मौका मिलेगा।'
इंडिया टुडे से बातचीत में रवि किशन ने छोटे प्रोजेक्ट्स और भारतीय सिनेमा पर उनके बढ़ते असर के बीच तुलना की। उन्होंने कहा, 'अगर फिल्म (भाभीजी घर पर हैं) 6 तारीख तक रफ्तार पकड़ लेती है, तो यह ऐतिहासिक होगा। ठीक वैसे ही जैसे 5 करोड़ रुपये के छोटे बजट में बनी फिल्म 'लापता लेडीज' ऑस्कर तक पहुंची थी। यह एक मिसाल कायम करेगी कि जहां 'धुरंधर' और 'बॉर्डर 2' जैसी बड़े बजट की फिल्में हैं, वहीं इस तरह के छोटे बजट की फिल्में भी कामयाब हो सकती हैं। इससे इंडस्ट्री में हर तरह के फिल्ममेकर को टिके रहने का मौका मिलेगा।'
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क्या है फिल्म इंडस्ट्री की खूबसूरती?
रवि किशन ने आगे कहा 'यही इस इंडस्ट्री की खूबसूरती है। एक समय था जब बासु चटर्जी और ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में यश चोपड़ा, राज खोसला और मनमोहन देसाई की फिल्मों के साथ-साथ चलती थीं। बड़े प्रोडक्शन वाली फिल्में और अमोल पालेकर की सिंपल फिल्में, दोनों ही सफल होती थीं।'
रवि किशन ने आगे कहा 'यही इस इंडस्ट्री की खूबसूरती है। एक समय था जब बासु चटर्जी और ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्में यश चोपड़ा, राज खोसला और मनमोहन देसाई की फिल्मों के साथ-साथ चलती थीं। बड़े प्रोडक्शन वाली फिल्में और अमोल पालेकर की सिंपल फिल्में, दोनों ही सफल होती थीं।'
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'लापता लेडीज' की स्टारकास्ट
ख्याल रहे कि किरण राव की फिल्म 'लापता लेडीज' एक कम बजट की फिल्म थी। स्पर्श श्रीवास्तव, नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा और छाया कदम स्टारर इस फिल्म ने साबित कर दिया कि दमदार कहानी बड़ी स्केल पर बनी फिल्मों को भी पीछे छोड़ सकती है। फिल्म में रवि किशन ने सब-इंस्पेक्टर श्याम मनोहर का रोल निभाया था। फिल्म में उनका स्वभाव दयालु है।
ख्याल रहे कि किरण राव की फिल्म 'लापता लेडीज' एक कम बजट की फिल्म थी। स्पर्श श्रीवास्तव, नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा और छाया कदम स्टारर इस फिल्म ने साबित कर दिया कि दमदार कहानी बड़ी स्केल पर बनी फिल्मों को भी पीछे छोड़ सकती है। फिल्म में रवि किशन ने सब-इंस्पेक्टर श्याम मनोहर का रोल निभाया था। फिल्म में उनका स्वभाव दयालु है।
