{"_id":"6a0af974231862a9ba08c452","slug":"samwad-2026-live-updates-inspector-avinash-series-star-randeep-hooda-at-amar-ujala-samwad-lucknow-2026-05-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Samwad 2026 Live: ‘आपने रणदीप को देखा पर मैं चाहता था आप मेरा किरदार देखें’, संवाद के मंच पर बोले रणदीप हुड्डा","category":{"title":"Entertainment","title_hn":"मनोरंजन","slug":"entertainment"}}
Samwad 2026 Live: ‘आपने रणदीप को देखा पर मैं चाहता था आप मेरा किरदार देखें’, संवाद के मंच पर बोले रणदीप हुड्डा
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Jyoti Raghav
Updated Mon, 18 May 2026 06:20 PM IST
विज्ञापन
सार
Amar Ujala Samwad Lucknow 2026: अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का आयोजन राजधानी लखनऊ में जारी है। यहां एक्टर रणदीप हुड्डा भी पहुंचे हैं। वे 'सपनों से स्टारडम' तक विषय पर अपनी बात रख रहे हैं। रणदीप ने यहां अपनी हालिय रिलीज फिल्म 'इंस्पेक्टर अविनाश 2' पर भी बात की। इसके अलावा एक्टर ने अपने करियर और पर्सनल लाइफ से जुड़ी यादें भी साझा कीं।
रणदीप हुड्डा
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
अमर उजाला संवाद उत्तर प्रदेश 2026 का मंच सज चुका है। राजधानी लखनऊ में जारी इस वैचारिक कार्यक्रम में अभिनेता रणदीप हुड्डा ने शिरकत की है। इन दिनों वे अपनी आगामी सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश' सीजन 2 को लेकर चर्चा में हैं। संवाद के मंच पर उन्होंने अपने करियर और सिनेमा को लेकर कई किस्से साझा किए। पढ़िए कुछ अंश...
कभी झक मारना एक हॉबी हुआ करती थी
अपनी हालिया रिलीज सीरीज 'इंस्पेक्टर अविनाश 2' के बारे में बात करते हुए रणदीप ने कहा, 'कोई भी कहानी हो। जीवित या चल बसे शख्स पर बायोपिक हो...यह उनकी पूरी जिंदगी होती है, जो वह बहुत वर्षों तक जीते हैं। उसे जब आप ओटीटी या बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश करते हैं तो आपको कहानी दो-तीन घंटे में दिखानी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
40 साल की कहानी को आप दो घंटे में कैसे दिखाएंगे? ऐसे में आप उनकी जिंदगी के सबसे बड़े मकसद को लेकर सबसे बड़ा ब्रिज बनाते हैं। आप 30-40 साल की फिल्म तो नहीं बना पाते। हमारी जिंदगी में हम हमेशा तो कुछ जरूरी नहीं करते। अब तो फोन में ज्यादा लगे रहते हैं। पहले झक मारना भी एक हॉबी होती थी, जिसे अब सब भूलते जा रहे हैं।'
Trending Videos
इंस्पेक्टर अविनाश का किरदार कितना मुश्किल लगा?
यह किरदार जिस पर गढ़ा गया है वो हमारे दोस्त हैं। उनसे सबने कहा कि भाई रणदीप तो तुम्हें घोलकर पी गया। मैं उनके जैसा ही हूं। मैं शायद हैंडसम थोड़ा ज्यादा हूं उनसे। मेरे साथ यह काफी बार हो चुका है। मैंने जो बायोपिक की हैं, उनके किरादरों को गूगल करिए, मेरा फोटो आएगा।
यूपी में कितना बदलाव हुआ है पिछले कुछ वर्षों में?
मैं यहां पर एक ऑब्जर्वेशन नहीं दे सकता हूं। मैं तो अपने दोस्तों और परिवार के लोगों से कही सुनी बाते हैं वही बता सकता हूं। यूपी अब बहुत सेफ हो गया है। महिलाएं आसानी से मूव कर सकती हैं। क्राइम खत्म हो गया है। यही सुनने में आया है।
मेरे एक को-स्टार थे। उनको कोई गांव में बड़ा तंग कर रहा था, उनके भाईयों को पीट दिया था। मैंने खाली एक ट्वीट किया था और यूपी पुलिस को टैग किया था। घंटों के अंदर परेशान करने वालों को ऐसा सीधा कर दिया कि वो कभी तंग करने नहीं आए। मेरे हिसाब से यूपी में यह बदलाव महसूस करते हैं सब।
सोशल मीडिया पर लोग अच्छी-अच्छी बातें दिखाते हैं। आप गांव के खेत-खलिहान सब दिखाते हैं। आप इसे कैसे देखते हैं?
सक्सेस का फॉर्मूल सबके लिए अलग-अलग होता है। कोई 100 करोड़ कमाकर भी दुखी है। कोई कुछ न होने पर भी ऐसे मुस्कुरा रहा है कि जैसे कहीं का राजा है। खुशी के स्टैंडर्ड को आप किसी से जोड़ नहीं सकते। जड़ों से जुड़े होने का मुझे यह लगता है कि अगर आपको ये नहीं पता कि आप कहां से आए हैं, तो आप कहां जा रहे हैं इसका कोई फायदा नहीं है। मुझे 25 साल मुंबई में हो गए। लेकिन, कोई पूछता है कि कहां से हो तो कहता हूं कि जसिया से हूं, रोहतक से।
जिस जिंदगी से हमारे पूर्वज गुजरे हैं। लोग कहते हैं कि विरासत। यह किसने कहा कि विरासत सिर्फ कोठी और महल ही हैं। क्या खेत-खलिहान विरासत नहीं हैं? पता नहीं किस-किस कब्जे से उसे बचाया गया है। पसीने से उसे सींचा है। मैं ऐसे परिवार से आता हूं, जिसके पास रियासत नहीं हैं, लेकिन जिसकी विरासत बहुत विशाल है। मैं उसे छिपाना पसंद नहीं करता। मैं बोलता हूं कि अपनी क्षेत्रीय भाषा अपने बच्चों को सिखाओ। आपकी यह भाषा मर नहीं जानी चाहिए।