शबाना आजमी: 'मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती'; अपनी धार्मिक पहचान पर दिग्गज अभिनेत्री ने दी ऐसी प्रतिक्रिया
- दिग्गज अभिनेत्री शबाना आजामी ने अपनी मुस्लिम पहचान और धर्म के साथ अपने ताल्लुक पर बात की।
- उन्होंने कहा कि आस्था निजी होती है। सरकार को इसमें दखल नहीं देना चाहिए।
- इसके अलावा उन्होंने धर्म को लेकर जावेद अख्तर के साथ होने वाली बातचीत का भी जिक्र किया।
विस्तार
मशहूर अभिनेत्री शबाना आजमी हाल ही में अपनी धार्मिक पहचान पर बात करती दिखीं। उन्होंने अपने धार्मिक विश्वासों और परवरिश का जिक्र किया। एक्ट्रेस ने बताया कि उनके पिता नास्तिक थे। अपने निजी विश्वासों के बारे में बात करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान को मानती हैं। ईद के त्योहार, उर्दू का अपनापन और खाने का जायका लेती हैं। मगर, वे नमाज नहीं पढ़तीं।
शबाना बोलीं- 'मेरे पिता नास्तिक थे'
शबाना आजमी का कहना है कि धर्म के साथ उनका कोई ऐसा फॉर्मल जुड़ाव नहीं है। धर्म उनका पूरी तरह से पर्सनल मामला है। अपनी परवरिश और धार्मिक बातों के साथ रोजाना के रिश्ते के बारे में बात करते हुए शबाना ने याद किया कि कैसे उनके परिवार के माहौल ने उनके विचारों को आकार दिया। IIMUN के यू्ट्यूब चैनल पर बात करते हुए शबाना आजमी ने कहा, 'मेरे पिता नास्तिक थे। और मेरी मां थोड़ी-बहुत धार्मिक थीं। मगर वे इसे लेकर बहुत गंभीर नहीं थीं'। बता दें कि शबाना आजमी दिग्गज उर्दू शायर-कवि-गीतकार कैफी आजमी की बेटी हैं।
'मैं मुस्लिम हूं, लेकिन नमाज नहीं पढ़ती'
इस्लाम के साथ अपने पर्सनल रिश्ते और अपनी सांस्कृतिक जड़ों के बारे में शबाना आजमी ने कहा, 'हां, मैं एक मुस्लिम हूं। मुझे ईद, उर्दू, खाना, ये सब पसंद हैं। लेकिन हम नमाज नहीं पढ़ते और हमारा धर्म से कोई लेना-देना नहीं है'। शबाना आजमी ने अपने और अपने पति मशहूर गीतकार और लेखक जावेद अख्तर के नजरिए के बीच के बड़े फर्क पर भी बात की। शबाना आजमी ने कहा कि जावेद अख्तर नास्तिक हैं।
जावेद अख्तर से किस बात पर बहस होती है?
शबाना आजमी ने कहा, 'मैं कभी-कभार माशाल्लाह और इंशाल्लाह जैसे शब्द बोलती हूं। इस बात पर जावेद अख्तर सवाल उठाते हैं। वे मुझसे कहते हैं, 'तुम ये क्यों बोलती हो? अगर हर समय कोई कहेगा कि 'प्रभु की मर्जी', तो तुम्हें कैसा लगेगा? लेकिन मुझे लगता है कि ये मेरी भाषा का हिस्सा है'। शबाना आजमी ने यह भी कहा कि उन्हें बचपन से ही धर्म और भगवान को लेकर कोई खास जिज्ञासा नहीं रही है। उनके घर में धार्मिक रीति-रिवाजों को जिंदगी का अहम हिस्सा नहीं बनाया गया था।
- शबाना आजमी ने जावेद अख्तर के धार्मिक विश्वासों को लेकर कहा कि वे नास्तिक हैं।
- अभिनेत्री ने कहा, 'जावेद अख्तर कट्टर नास्तिक हैं। मैं उनसे कहती हूं कि आप अपने धार्मिक विचारों को इतना मुखर होकर क्यों बोलते हो? किसी को धर्म का पालन करके सुकून मिलता है, तो उसे करने दो। किसी भावनाओं को ठेस क्यों पहुंचानी'?
- इस पर जावेद कहते हैं, 'मैं ऐसा इसलिए करता हूं, क्योंकि धार्मिक लोग भी मुझे ठेस पहुंचाते हैं'।
'यह हिंदू और मुस्लिम की लड़ाई नहीं है'
शबाना आजमी ने सोच में दरार के बारे में बताते हुए कहा, 'हमें यह समझने की जरूरत है कि यह हिंदू और मुस्लिम के बीच की लड़ाई नहीं है। यह लिबरल और इनटॉलरेंट लोगों के बीच की लड़ाई है। उन्होंने कहा कि लिबरल हिंदू और मुस्लिम दोनों इनटॉलरेंस के खिलाफ एक साथ खड़े हैं। इस तरह से चर्चा करने से लोगों को बांटने के लिए धर्म का इस्तेमाल करने के जहर को दूर करने में मदद मिलती है। शबाना आजमी के वर्क फ्रंट की बात करें तो बीते दिनों उन्हें फिल्म 'बंटवारा 1947' में देखा गया था।