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टीवी के आगे हाथ जोड़कर बैठते थे लोग, सूनी हो जाती थीं सड़कें; पढ़िए रामानंद सागर की 'रामायण' से जुड़े किस्से

एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: Jyoti Raghav Updated Thu, 02 Apr 2026 08:40 AM IST
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सार

Ramayan Serial Lesser Known Facts: महाकाव्य रामायण पर नितेश तिवारी फिल्म बना रहे हैं। रणबीर कपूर अभिनीत इस फिल्म का टीजर गुरुवार 02 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव पर रिलीज हो रहा है। इस बहाने जानते हैं रामायण पर बने रामानंद सागर के कालजयी सीरियिल 'रामायण' से जुड़े किस्से 

Ramanand Sagar Ramayan serial Casting and making Related Some Lesser Known and interesting Facts
रामायण सीरियल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

पवित्र ग्रंथ 'रामायण' से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है। इस पर जब-जब कोई फिल्म या सीरियल बनाने का ख्याल आता है, तो कई प्रश्न भी आकार ले लेते हैं। दर्शकों की स्वीकारोक्ति को लेकर अलग चिंता होती है। करीब चार दशक पहले धारावाहिक 'रामायण' बनाने का ख्याल, जब रामानंद सागर के मन में आया, तो उनके सामने भी ऐसे ही प्रश्न न सिर्फ आए, बल्कि कई चुनौतियां भी मार्ग में अवरोधक बनीं। मगर, राम के काज को निकलने वालों की बाधाएं स्थाई कैसे हो सकती हैं भला! आखिरकार हर बाधा और चुनौती को पार कर 'रामायण' धारावाहिक का निर्माण हुआ और जब इसका प्रसारण शुरू हुआ तो मानो छोटे पर्दे के माध्यम से लोगों को साक्षात अपने प्रभु श्रीराम के दर्शन हो रहे हों। सड़कें सूनी हो जाया करती थीं। परिवार नहीं, बल्कि पूरा मोहल्ला और गांव साथ में 'रामायण' देखने का आनंद लेते। आइए जानते हैं इस सीरियल की कास्टिंग और निर्माण से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से

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अरुण गोविल-दीपिका चिखलिया - फोटो : एक्स

राम के किरदार के लिए रिजेक्ट हो गए थे अरुण गोविल
अरुण गोविल 17 की उम्र में मुंबई आ गए थे। यहां आकर अपना व्यवसाय शुरू किया। उन्हें एक्टिंग के भी ऑफर मिलने लगे। वर्ष 1977 में उन्हें ‘पहेली’ में  काम करने का ऑफर मिला। ये उनकी डेब्यू फिल्म थी। फिर उन्होंने ‘सावन को आने दो’, ‘सांच को आंच नहीं’, ‘इतनी सी बात’, ‘हिम्मतवाला’, ‘दिलवाला’, ‘हथकड़ी’, और ‘लव-कुश’ जैसी फिल्मों में काम किया। लेकिन, उन्हें लोकप्रियता टीवी शो 'रामायण' से मिली। कहा जाता है कि रामानंद सागर ने जब 'रामायण' धारावाहिक बनाना शुरू किया तो इसकी खबर जैसे अरुण गोविल को मिली वे तुरंत ऑडिशन देने पहुंच गए। निर्माताओं को ‘राम’ की भूमिका के लिए कलाकार की तलाश थी, लेकिन जब अरुण ने ऑडिशन दिया तो रिजेक्ट कर दिया गया। लेकिन, कुछ वक्त बाद उन्हें फिर से बुलाया गया और ‘राम’ के रोल के लिए फाइनल किया गया। राम का किरदार निभा कर इन्होने ऐसी छाप छोड़ी कि दर्शक इनकी तस्वीर की पूजा करने लगे।

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दीपिका चिखलिया - फोटो : सोशल मीडिया

पहले ही ऑडिशन में माता 'सीता' के लिए हुआ दीपिका का चयन
सीरियल 'विक्रम और बेताल' के निर्माण के दौरान रामानंद सागर को यह एहसास हुआ कि दीपिका चिखलिया का चेहरा बहुत ही दिव्य है। हालांकि, 'रामायण' सीरियल में उन्होंने 'सीता' की भूमिका के लिए अन्य लड़कियों का भी ऑडिशन लिया था। मगर, दीपिका चिखलिया का चयन पहले ही राउंड में हो गया। 

दूरदर्शन ने कर दिया था सीरियल को रिजेक्ट
शुरुआत में दूरदर्शन ने 'रामायण' सीरियल को रिजेक्ट कर दिया था। तमाम रिजेक्शन और चुनौतियों को पार कर जब यह सीरीज भारतीय टेलीविजन पर प्रसारित हुई तो बेहिसाब लोकप्रिय हुई। हर हफ्ते 10 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक यह पहुंचने लगी। आईएमडीबी पर प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस सीरियल के प्रसारण के वक्त बसें, ट्रेनें और शहरों के बीच चलने वाले ट्रक रोक दिए जाते थे और हर रविवार सुबह 9:30 बजे दुकानें बंद हो जाती थीं, ताकि लोग एकत्र होकर यह शो देख सकें। गांवों में तो इस शो को देखना अपने आप में एक धार्मिक अनुष्ठान जैसा बन गया था। 

टेलीविजन और बिजली की कमी नहीं बनी बाधा

ग्रामीण क्षेत्रों में तब इक्का-दुक्का घरों में टेलीविजन हुआ करता था और बिजली की पर्याप्त पहुंच नहीं थीं। मगर, इसके प्रसारण के समय लोग घर से टीवी निकालर चबूतरे पर रख लिया करते और ट्रैक्टर की बैटरी से उसे चलाकर सामूहिक रूप से 'रामायण' देखा करते थे। भगवान प्रभु श्रीराम के दृश्यों के दौरान लोग हाथ जोड़कर बैठ जाया करते थे। खासकर बुजुर्ग पीढ़ी बिल्कुल भक्ति विभोर हो जाया करती थी।  सीरियल देखने से पहले लोग कई तरह के हिंदू रीति-रिवाजों का पालन करते थे। सुबह नहाकर सीरियल देखने बैठते थे और टेलीविजन के सामने बैठते समय पैरों में जूते-चप्पल नहीं पहनते थे। वहीं, कुछ लोग सीरियल शुरू होने से पहले अगरबत्तियाँ जलाते थे।

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रामायण सीरियल - फोटो : सोशल मीडिया

सबसे अधिक देखे जाने वाले सीरियल का रिकॉर्ड 
आईएमडीबी के मुताबिक 'रामायण' धारावाहिक अब तक की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली सीरीज थी, जिसके उस समय 200 मिलियन से भी ज्यादा दर्शक थे। यह सीरीज 2020 के कोरोनावायरस लॉकडाउन के दौरान दोबारा दिखाई गई और इसने दुनिया भर में दर्शकों की संख्या के कई रिकॉर्ड तोड़ दिए। इनमें दुनिया का अब तक का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला टीवी शो होने का रिकॉर्ड भी शामिल, जिसे 16 अप्रैल 2020 को 77 मिलियन दर्शकों ने देखा।

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दीपिका चिखलिया - फोटो : इंस्टाग्राम

रामानंद सागर को लगाने पड़े थे सूचना प्रसारण मंत्रालय के खूब चक्कर
'रामायण' शो ने लोकप्रियता का शिखर छुआ, लेकिन कई रिकॉर्ड कायम करने वाले इस शो को शुरुआत में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। रामानंद सागर को 'रामायण' का प्रसारण करने के लिए लगभग दो साल इंतजार करने पड़े। इस शो के लिए उन्होंने दूरदर्शन और सूचना प्रसारण मंत्रालय के कई चक्कर लगाए थे। इस सीरियल को बनाने की अनुमति 1985 में ही मिल गई थी, लेकिन इसका प्रसारण 25 जनवरी 1987 से शुरू हुआ था। दरअसल, रामायण से पहले इस तरह का कोई प्रसारण कभी नहीं हुआ था। ऐसे में सभी आला अधिकारी इसे लेकर काफी सतर्क थे। उन्होंने शो से जुड़ी कई आपत्तियां भी दर्ज कराई, जिसमें सीता का किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस दीपिका चिखलिया की वेशभूषा अहम थी।

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अरुण गोविल, दीपिका, सुनील, रामानंद सागर - फोटो : सोशल मीडिया

पहले एपिसोड को बनाने में लगे थे 15 दिन
शो में माता सीता की भूमिका अदा कने वाली दीपिका चिखलिया ने एक इंटरव्यू में बताया था, 'सीरियल का पहला एपिसोड एक घंटे का था और उसे बनाने में करीब 15 दिन का समय लगा। मैं महीने में 27 दिनों तक वहां रहती थी। वहां मेकअप स्टूडियो होता था तो हम यहीं रहते थे और कोई भी मुंबई नहीं लौटता था'। उन्होंने कहा था, 'एक अभिनेता के तौर पर सबने बेहतरीन प्रदर्शन किया और सबने इसे पसंद किया। छह महीने बीतते-बीतते हमें इस बात का अहसास हो गया था कि हम बड़े स्टार हो गए हैं। वो एक ऐसा समय था जब राम और सीता के किरदार भारतीयों के लिए महाराजा और महारानी की तरह हो गए थे।'

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'रामायण' - फोटो : सोशल मीडिया

कलाकारों की भर्ती के लिए बजाए जाते थे ढोल-नगाड़े
80 के दशक में जब रामायण धारावाहिक टीवी पर आया तो इसके साथ ही कई स्पेशल इफेक्ट्स भी देखने को मिले थे, जैसे हनुमान का संजीवनी बूटी लाना, पुष्पक विमान का उड़ना आदि। प्रेम सागर ने एक साक्षात्कार में खुद यह जिक्र किया कि जब रामायण के दौरान बहुत सारे जूनियर कलाकारों की जरूरत पड़ती थी तो गांव-गांव जाकर ढोल नगाड़ो के साथ घोषणा की जाती थी और कलाकार भर्ती किए जाते थे।

स्पेशल इफेक्ट्स के लिए हॉलीवुड की मदद ली गई
प्रेम सागर ने बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कहा था, 'स्पेशल इफेक्ट्स के बारे में जानने के लिए वे ओरिजिनल किंग कॉन्ग के निर्माता से हॉलीवुड में मिलकर आए थे। साथ ही कई किताबों को पढ़कर रामायण में ये इफेक्ट्स डाले गए।' इस सीरियल के प्रसारण के वक्त हर हफ्ते 'रामायण' के ताजा एपिसोड के कैसेट दूरदर्शन के दफ्तर भेजे जाते थे। कई बार तो ये कैसेट प्रसारण के आधे घंटे पहले भी पहुंचे। रामायण की शूटिंग लगातार 550 से ज्यादा दिनों तक चली थी। बता दें कि जब 'रामायण' में रावण की मृत्यु होती है तो रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी के गांव में शोक मनाया गया था।

कहां शूट हुआ राम सेतु के निर्माण का दृश्य?
रामायण में राम सेतु के निर्माण का दृश्य चेन्नई में शूट किया गया था। प्रेम सागर ने बताया था कि चेन्नई के नीले समुद्र जैसा दृश्य गुजरात में नहीं मिल पाया था, जिस कारण उन्हें उसे चेन्नई में शूट करना पड़ा। कहा जाता है कि उस दौर में रामायण के प्रसारण के दौरान अफसर से लेकर नेता तक किसी से मिलना तो क्या किसी का फोन भी उठाना पसंद नहीं करते थे।

कोर्ट केस में फंस गए थे रामानंद सागर
'रामायण' बनाने के बाद रामानंद सागर को कानूनी लड़ाई तक लड़नी पड़ी थी। दरअसल यह उस समय की बात है, जब दूरदर्शन में हर धारावाहिक 13 एपिसोड का होता था। ऐसे में रामायण को 78 एपिसोड्स की मंजूरी मिली थी, लेकिन जब यह शो हिट हुआ तो लोगों ने इस में लव कुश की कहानी दिखाने की मांग की, जिसके लिए रामानंद सागर तैयार नहीं थे। उनका मानना था कि उनकी कहानी बताएंगे, तो उसके लिए एक काल्पनिक कथा होगी और हुआ भी यही। लव कुश की कहानी प्रसारित होने के बाद शो से जुड़े कई तरह के विवाद सामने आए, जिसके लिए रामानंद सागर को 10 साल तक कोर्ट में केस लड़ना पड़ा।

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