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सांस्कृतिक पहलों ने बदली फिजा: सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश, जानें कैसे सहेजी जा रही विरासत

इवेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Tue, 17 Feb 2026 02:44 PM IST
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सार

उत्तर प्रदेश सरकार अलग-अलग स्थलों के साथ सरकार विशिष्ट स्थानों, स्थानीय कारीगरों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के भी प्रयास कर रही है।

Uttar Pradesh Cultural Centre of India know initiatives of UP Government under CM Yogi Adityanath from worship
सांस्कृतिक विरासत को सहेज रहा उत्तर प्रदेश। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में शुरू की गई सांस्कृतिक पहलों ने राज्य में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन में बड़ा इजाफा किया है। इसके साथ ही यूपी को पर्यटन के अहम केंद्र के तौर पर स्थापित करने की कोशिश भी की गई है। इन पहलों में आध्यात्मिक गलियारों का निर्माण, भव्य उत्सवों का आयोजन, स्थानीय कलाओं को प्रोत्साहन और भाषाई एकीकरण जैसे कदम शामिल हैं।
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 1. आध्यात्मिक और धार्मिक विरासत का विकास

प्रयागराज-विंध्याचल-काशी और प्रयागराज-अयोध्या-गोरखपुर जैसे पांच प्रमुख मार्गों को विकसित किया जा रहा है, ताकि पवित्र स्थलों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर हो सके। अयोध्या का दीपोत्सव और मथुरा का रंगोत्सव अब वार्षिक आयोजन बन चुके हैं, जो राज्य की परंपराओं को वैश्विक स्तर पर प्रदर्शित करते हैं। प्राचीन आश्रमों (जैसे भृगु और दुर्वासा) और पूर्वी यूपी के जैन मंदिरों के नवीनीकरण की योजनाएं चल रही हैं। अयोध्या में टाटा संस के सहयोग से एक संग्रहालय बनाया जा रहा है जो भारत की विविध मंदिर वास्तुकला शैलियों को प्रदर्शित करेगा।
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2. स्थानीय कला और खान-पान को प्रोत्साहन

अलग-अलग स्थलों के साथ सरकार विशिष्ट स्थानों, स्थानीय कारीगरों और उनके पारंपरिक व्यंजनों को नई पहचान दिलाने के भी प्रयास कर रही है।

वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुजीन (ODOC): 2026 की शुरुआत में लॉन्च की गई इस पहल के तहत अलग-अलग जिलों के एक सिग्नेचर पारंपरिक व्यंजन (जैसे आगरा का पेठा, वाराणसी का मलइयो) को पर्यटन और स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने के लिए पहचाना गया है।

माटी कला बोर्ड: पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों की कला को पुनर्जीवित करने के लिए कुम्हारों को इलेक्ट्रिक चाक जैसे आधुनिक उपकरण और मिट्टी उपलब्ध कराई जा रही है।

सांस्कृतिक नीति: सरकार लोक कलाकारों और भजन मंडलियों की एक डिजिटल डायरेक्टरी बनाने के लिए एक व्यापक सांस्कृतिक नीति का मसौदा तैयार कर रही है। 

3. भाषाई और क्षेत्रीय एकीकरण

'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' योजना के तहत उत्तर प्रदेश अन्य राज्यों के साथ सांस्कृतिक सेतु बना रहा है। व्यावसायिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में तमिल, तेलुगु, मलयालम और कन्नड़ जैसी भाषाओं को वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया गया है, जिसका खर्च सरकार वहन करती है। इसी तरह काशी तमिल संगमम काशी (वाराणसी) और तमिलनाडु के बीच साझा आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को अकादमिक और कलात्मक आदान-प्रदान के माध्यम से मजबूत करता है।

4. जनजातीय और विरासत संरक्षण

'जनजाति भागीदारी उत्सव' जैसे आयोजनों के माध्यम से थारू और मुसहर जैसी जनजातियों के पारंपरिक संगीत, नृत्य और शिल्प का संरक्षण और प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके अलावा सरकार पीपीपी मॉडल के तहत 11 प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों को हेरिटेज होटल या सांस्कृतिक केंद्रों में विकसित किया जा रहा है।
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