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UP का डिफेंस कॉरिडोर: कैसे रक्षा उत्पादन केंद्र बन रहा उत्तर प्रदेश, कहां-किस हथियार का हो रहा निर्माण?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: Kirtivardhan Mishra Updated Thu, 19 Mar 2026 04:13 PM IST
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सार

भारत के रक्षा उद्योग को विकसित करने में उत्तर प्रदेश के रक्षा औद्योगिक गलियारे की आने वाले वर्षों में अहम भूमिका रहने वाली है। इस गलियारे को 6 मुख्य नोड्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग तरह की रक्षा तकनीक विकसित की जा रही है।

Uttar Pradesh Defence Industrial Corridor UPDIC Weapons from Brahmos to Guns and Products news and updates
यूपी डिफेंस।अ - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

उत्तर प्रदेश में बीते कुछ वर्ष इन्फ्रास्ट्रक्चर और उद्योगों की बढ़ोतरी के लिहाज से अहम रहे हैं। इसका असर यह हुआ है कि न सिर्फ राज्य का सकल घरेलू उत्पादन (जीडीपी) बढ़ा है, बल्कि आर्थिक विकास भी तेज हुआ है। अब इस बीच राज्य को देश के रक्षा उत्पादन का केंद्र बनाने की तैयारियां भी जारी हैं। इसी के मद्देनजर केंद्र और राज्य सरकार ने समन्वय बिठाते हुए यूपी में एक रक्षा औद्योगिक गलियारे को स्थापित करने की मंजूरी दी, जिसके जरिए यूपी को वैश्विक नक्शे पर हथियार के एक अहम निर्यात बिंदु के तौर पर उभारा जाना है। 
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क्या है यूपी का डिफेंस कॉरिडोर?
उत्तर प्रदेश का रक्षा क्षेत्र बीते कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। इसकी एक वजह है राज्य का रक्षा औद्योगिक गलियारा, जिसके जरिए भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की कोशिशें शुरू कर दी गई हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और राज्य को सैन्य निर्माण का वैश्विक केंद्र बनाना है, ताकि भारत को आत्मनिर्भर बनाने में तेजी लाई जा सके। सीधे शब्दों में कहें तो, यह यूपी को एक 'हथियार बनाने वाली फैक्ट्री' के रूप में विकसित करने का प्लान है ताकि भारत अपनी सेना की जरूरतें खुद पूरी कर सके।
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डिफेंस कॉरिडोर में किस तरह के हथियारों का उत्पादन
इस गलियारे को 6 मुख्य नोड्स में बांटा गया है, जहां अलग-अलग तरह की रक्षा तकनीक विकसित की जा रही है।

कानपुर (शस्त्र और गोला-बारूद): यहां अदाणी डिफेंस की तरफ से दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा गोला-बारूद परिसर बनाया गया है। यहां छोटे और मध्यम कैलिबर के हथियार और सैन्य कपड़े तैयार होते हैं।

लखनऊ (मिसाइल और उन्नत तकनीक): यहां ब्रह्मोस मिसाइलों के निर्माण और असेंबली के लिए इकाई स्थापित की गई है। साथ ही ड्रोन और टाइटेनियम कास्टिंग पर भी ध्यान है।

झांसी (मिसाइल और विस्फोटक): भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) यहां मिसाइल प्रोपल्शन सिस्टम (एमपीएस) और विस्फोटकों के शोध के साथ इनका निर्माण कर रही है।

अलीगढ़ (ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक्स): यह नोड मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, सैटेलाइट पार्ट्स और ड्रोन तकनीक में अग्रणी निर्माता के तौर पर विकसित किया जा रहा है।

आगरा और चित्रकूट: इन क्षेत्रों में रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, सुरक्षा उपकरण और ड्रोन हब विकसित किए जा रहे हैं, जो कि भविष्य के युद्ध में निर्णायक साबित होंगे। 

क्या हैं इस रक्षा गलियारे की खास बातें?
निवेश: अब तक इस प्रोजेक्ट में ₹35,526 करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं।
रोजगार: इस कॉरिडोर से लगभग 52,000 नौकरियों के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
कनेक्टिविटी: ये सभी नोड्स बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे जैसे बड़े एक्सप्रेसवे से जुड़े हैं, जिससे परिवहन आसान हो गया है।
सहयोग: आईआईटी कानपुर और आईआईटी-बीएचयू जैसे संस्थान यहां रिसर्च और स्टार्टअप्स को बढ़ावा दे रहे हैं।

रक्षा गलियारे के विकास के लिए क्या कदम उठाए गए?
उत्तर प्रदेश सरकार ने उच्च मूल्य वाली रक्षा परियोजनाओं के सुचारू संचालन के लिए बेहतरीन बुनियादी ढांचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर), औद्योगिक भूमि और लॉजिस्टिक्स कनेक्टिविटी विकसित करने पर खास ध्यान दिया है। गंगा एक्सप्रेस-वे, पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, आदि के जरिए रक्षा उत्पादन को बल देने की कोशिशें की जा रही हैं। 

इसके अलावा योगी सरकार ने रक्षा परियोजनाओं को तेजी से पूरा करने के लिए सरकार 'सिंगल-विंडो क्लीयरेंस' और कई नीतिगत प्रोत्साहन दे रही है। इसके तहत अब तक दर्जनों परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की जा चुकी है। जैसे लखनऊ में ब्रह्मोस परियोजना के लिए 200 एकड़ जमीन, कानपुर में अदाणी की फैक्टरी के लिए स्थान आदि शामिल हैं। 

सरकार ने उत्पादन को स्वदेशी बनाने के लक्ष्य के साथ, उत्तर प्रदेश के अंदर से ही नए वेंडरों और छोटे उद्योगों को ब्रह्मोस की सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) में शामिल किया है। इससे उत्पादन चक्र तेज होगा और गुणवत्ता नियंत्रण में मदद मिल रही है। रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए राज्य के आईआईटी कानपुर और आईआईटी बीएचयू (वाराणसी) को उत्कृष्टता केंद्र के रूप में नामित किया गया है।
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