{"_id":"69b3b421670c34b190035f00","slug":"india-defence-production-growing-rapidly-what-is-uttar-pradesh-role-in-achieving-self-reliance-2026-03-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"UP: कैसे तेजी से बढ़ रहा भारत का रक्षा उत्पादन, आत्मनिर्भर बनाने में उत्तर प्रदेश की क्या भूमिका?","category":{"title":"Events Coverage","title_hn":"इवेंट कवरेज","slug":"events-coverage"}}
UP: कैसे तेजी से बढ़ रहा भारत का रक्षा उत्पादन, आत्मनिर्भर बनाने में उत्तर प्रदेश की क्या भूमिका?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नोएडा
Published by: Sandhya Kumari
Updated Fri, 13 Mar 2026 01:50 PM IST
विज्ञापन
सार
भारत में किस तेजी से रक्षा उत्पादन बढ़ा है? इसमें उत्तर प्रदेश की क्या भूमिका रही है? यूपी में कहां-कहां रक्षा औद्योगिक गलियारा तैयार किया गया है? पूर्व राजदूत जेके त्रिपाठी ने इस पर अमर उजाला से अहम जानकारियां साझा कीं।
यूपी में हथियार उत्पादन के लिए रक्षा कॉरिडोर का लक्ष्य
- फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
विस्तार
भारत में बीते एक दशक में रक्षा उत्पादन नई ऊंचाइयों पर पहुंचा है। फिर चाहे देश में ही असॉल्ट राइफल बनाने वाली फैक्टरी से अभूतपूर्व प्रोडक्शन की बात हो या भारत की सुरक्षा के लिए दुश्मनों का काल बनने वाली ब्रह्मोस मिसाइलों की। देश ने ऐसे ही कई हथियारों का उत्पादन से लेकर निर्यात तक शुरू किया है। इसके अलावा बुलेटप्रूफ जैकेट, पैराशूट और अन्य बंदूकों के निर्माण में भी भारत बीते वर्षों में काफी आगे निकल गया है।
रक्षा क्षेत्र में भारत की इस आत्मनिर्भरता की यात्रा में उत्तर प्रदेश की भी बड़ी भूमिका रही है। दरअसल, राज्य में बीते वर्षों में एक के बाद एक विभिन्न प्रकार के हथियारों का निर्माण शुरू हुआ है। यूपी की सत्तासीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने भी इस मौके का लाभ उठाते हुए राज्य में एक पूरे डिफेंस कॉरिडोर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए न सिर्फ यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदलने की कोशिश की जा रही है, बल्कि लालफीताशाही और लॉजिस्टिक (आवाजाही) के लिए मार्गों को भी आसान किया जा रहा है।
भारत में कैसे बढ़ रहा रक्षा क्षेत्र?
भारत के पूर्व राजदूत जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भारत के रक्षा क्षेत्र को लेकर अमर उजाला के साथ कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पहले भारत हथियारों और उनके पुर्जों के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर था और कई देश हमें तकनीक नहीं देते थे। हालांकि, बाद में सरकार ने सोचा कि हमारे यहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग उड़ने को तैयार हैं। ऐसे में इन्हें रोजगार देने से बेहतर कोई बात नहीं होगी। इसलिए भारत की रक्षा नीति में भी सुधार आया। अब भारत बड़े समझौतों में अपनी शर्तों को खुलकर सामने रखता है। अब राफेल जैसी डील्स में तकनीकी हस्तांतरण यानी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तें शामिल की गई हैं।
उन्होंने कहा कि पहले रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं थी, लेकिन अब सरकार ने निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में 90% से 100% तक निवेश और उत्पादन की छूट दे दी है। सरकार ने अपने मेक इन इंडिया पहल को रक्षा क्षेत्र में भी उतारा है।
भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में यूपी की क्या भूमिका?
पूर्व राजदूत ने बताया कि उत्तर प्रदेश जिसे कभी बीमारू राज्य कहा जाता था, अब रक्षा उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 'उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' बनाया गया है, जिसके 6 नोड (लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट) हैं। यहां ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक तैयार की जा रही है। इससे राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जो दूसरे तथाकथित बीमारू राज्य कहे जाते थे, जैसे- बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल उन्हें भी उत्तर प्रदेश से सीखना चाहिए कि राज्य के पढ़े-लिखे युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल करने के लिए औद्योगीकरण बहुत जरूरी है। सरकारों को अपनी पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर निवेश और उद्योगों को आकर्षित करना चाहिए, क्योंकि औद्योगीकरण के बिना राज्य के विकास की गति रुक जाती है।
जेके त्रिपाठी ने यूपी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर निजी कंपनियों को किसी राज्य में निवेश का मौका मिलता है, तो वे अपनी कमाई को पूरी तरह बाहर नहीं ले जातीं, इससे आपके राज्य को भी फायदा मिलता है।
Trending Videos
रक्षा क्षेत्र में भारत की इस आत्मनिर्भरता की यात्रा में उत्तर प्रदेश की भी बड़ी भूमिका रही है। दरअसल, राज्य में बीते वर्षों में एक के बाद एक विभिन्न प्रकार के हथियारों का निर्माण शुरू हुआ है। यूपी की सत्तासीन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने भी इस मौके का लाभ उठाते हुए राज्य में एक पूरे डिफेंस कॉरिडोर के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसके जरिए न सिर्फ यूपी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदलने की कोशिश की जा रही है, बल्कि लालफीताशाही और लॉजिस्टिक (आवाजाही) के लिए मार्गों को भी आसान किया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
भारत में कैसे बढ़ रहा रक्षा क्षेत्र?
भारत के पूर्व राजदूत जितेंद्र कुमार त्रिपाठी ने भारत के रक्षा क्षेत्र को लेकर अमर उजाला के साथ कई अहम जानकारियां साझा कीं। उन्होंने बताया कि पहले भारत हथियारों और उनके पुर्जों के लिए पूरी तरह से विदेशों पर निर्भर था और कई देश हमें तकनीक नहीं देते थे। हालांकि, बाद में सरकार ने सोचा कि हमारे यहां 80 करोड़ से ज्यादा लोग उड़ने को तैयार हैं। ऐसे में इन्हें रोजगार देने से बेहतर कोई बात नहीं होगी। इसलिए भारत की रक्षा नीति में भी सुधार आया। अब भारत बड़े समझौतों में अपनी शर्तों को खुलकर सामने रखता है। अब राफेल जैसी डील्स में तकनीकी हस्तांतरण यानी टेक्नोलॉजी ट्रांसफर की शर्तें शामिल की गई हैं।
उन्होंने कहा कि पहले रक्षा क्षेत्र में निजी कंपनियों को सुरक्षा कारणों से अनुमति नहीं थी, लेकिन अब सरकार ने निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में 90% से 100% तक निवेश और उत्पादन की छूट दे दी है। सरकार ने अपने मेक इन इंडिया पहल को रक्षा क्षेत्र में भी उतारा है।
भारत के रक्षा क्षेत्र को आत्मनिर्भर बनाने में यूपी की क्या भूमिका?
पूर्व राजदूत ने बताया कि उत्तर प्रदेश जिसे कभी बीमारू राज्य कहा जाता था, अब रक्षा उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है। राज्य में 'उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर' बनाया गया है, जिसके 6 नोड (लखनऊ, कानपुर, झांसी, अलीगढ़, आगरा और चित्रकूट) हैं। यहां ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक तैयार की जा रही है। इससे राज्य में प्रत्यक्ष रोजगार के साथ-साथ अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि जो दूसरे तथाकथित बीमारू राज्य कहे जाते थे, जैसे- बिहार, मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल उन्हें भी उत्तर प्रदेश से सीखना चाहिए कि राज्य के पढ़े-लिखे युवाओं की क्षमता का सही इस्तेमाल करने के लिए औद्योगीकरण बहुत जरूरी है। सरकारों को अपनी पार्टी की राजनीति से ऊपर उठकर निवेश और उद्योगों को आकर्षित करना चाहिए, क्योंकि औद्योगीकरण के बिना राज्य के विकास की गति रुक जाती है।
जेके त्रिपाठी ने यूपी का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर निजी कंपनियों को किसी राज्य में निवेश का मौका मिलता है, तो वे अपनी कमाई को पूरी तरह बाहर नहीं ले जातीं, इससे आपके राज्य को भी फायदा मिलता है।