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इसलिए योगी आदित्यनाथ को भैया कहती हैं यूपी की महिलाएं
डॉ. श्रुति रंजना मिश्रा
Published by: Love Gaur
Updated Sun, 08 Mar 2026 11:16 AM IST
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सार
सिंगापुर दौरे के दौरान एक कार्यक्रम में भारतीय मूल की महिला स्वाति ने सीएम योगी आदित्यनाथ को 'भैया' कहकर संबोधित किया और कहा कि उनके नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में महिलाओं को पहले से ज्यादा सुरक्षा और निडरता का माहौल मिला है।
यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ
- फोटो : ANI Photos
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विस्तार
पिछले दिनों जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने आधिकारिक सिंगापुर दौरे पर थे, तो वहां ग्लोबल इंडियन इंटरनेशनल स्कूल में एक कार्यक्रम के दौरान भारतीय मूल की महिला स्वाति ने योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए कहा, 'मैं उत्तर प्रदेश से हूं और आपकी बहन हूं। मैं उत्तर प्रदेश की साढ़े ग्यारह करोड़ महिलाओं की ओर से आपको भैया कहकर बुलाती हूं, क्योंकि यूपी में अब बहन-बेटियों को सुरक्षा का माहौल मिला है। अब वे रात में भी निडर होकर बाहर निकल सकती हैं, अपराधियों में कानून का भय है।' स्वाति ने संस्कृत में यह भी कहा कि "योगी नेतृत्वे प्रदेशः भवति सुरक्षितम शुभम", अर्थात योगी के नेतृत्व में प्रदेश सुरक्षित है और मंगलमय (शुभ) है।
स्वाति का यह बयान निराधार नहीं था। यूपी में 9-10 साल पहले किसी भी छोटे-बड़े शहर में एक नजारा बड़ा आम था। स्कूटर या मोटर साइकिल पर अपने पिता या भाई के साथ स्कूल-कॉलेज ले जाई जाती बेटियां। सुबह के वक्त पिता को कोई जरूरी काम होता था तो यह ड्यूटी भाई को निभानी पड़ती थी। स्कूल या कॉलेज की छुट्टी के समय भी पिता दफ्तर से छुट्टी लेकर बिटिया को लेने पहुंच जाते थे। इस पूरी कवायद के केंद्र में एक ही बात थी कि कोई भी बेटी घर के बाहर अकेले सुरक्षित नहीं थी। सरेराह लड़कियों को तंग किया जाता था और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रहती। अधिसंख्य बेटियों को शाम के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। कामकाजी महिलाएं इवनिंग या नाइट शिफ्ट में काम करने के बजाय नौकरी छोड़ना पसंद करती थीं।
आंकड़ों पर नजर डालें तो, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 में राज्य में रेप के 3,050 मामले दर्ज किए गए, जो 2012 की तुलना में 50 फीसदी से भी अधिक थे। 2016 तक ये आंकड़ा बढकर 4,816 तक पहुंच गया था। चौतरफा आलोचना झेल रही सपा सरकार ने छवि सुधारने के लिए 1090 महिला हेल्पलाइन जरूर शुरू की, लेकिन इससे भी स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला।
अब एक नजर उत्तर प्रदेश के मौजूदा परिदृश्य पर डालिए। राजनीतिक विरोध में कोई कुछ भी कह सकता है, लेकिन एक अहसास सबने किया है- सुरक्षा का, मजबूत कानून-व्यवस्था का। सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले ‘गुंडाराज’ का लेबल हटाने का काम किया। योगी ने इसके लिए अपने विश्वस्त व काबिल अफसरों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। सबसे पहले पुलिस के दागी अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित किया गया और उनके स्थान पर ऐसे लोगों को लाया गया, जो अपराधियों के प्रति सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते थे।
योगी ने पहली प्राथमिकता भी बेटियों की सुरक्षा को दी
हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन। इस टीम ने तमाम स्कूल-कॉलेजों, पार्कों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मंडराने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्ती से लगाम लगानी शुरू की। एक अभियान की तरह महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों की न सिर्फ धरपकड़ होने लगी, बल्कि अपराध की प्रवृत्ति के अनुसार ऐसे लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई भी की गईं। एंटी रोमियो स्क्वायड की लगभग 1700 टीमों ने गत वर्षों में स्कूल-कॉलेज, सार्वजनिक स्थलों, चौराहों, मॉल्स, मार्केट्स, पार्क आदि मिलाकर लगभग सवा करोड़ स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान साढ़े चार करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों की चेकिंग की गई। करीब 25 हजार मामले दर्ज किए गए, जिनमें 30 हजार से ज्यादा अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी हुई। डेढ़ करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा गया। संदेश स्पष्ट था, किसी ने भी महिला की अस्मिता को चुनौती दी तो उसका बच पाना नामुमकिन है। इस कार्रवाई का व्यापक असर हुआ और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे। भय का माहौल काफी हद तक काबू में आ चुका था।
इसके बाद योगी सरकार ने महिला सुरक्षा की दिशा में अगला कदम बढ़ाते हुए 'मिशन शक्ति' अभियान की शुरुआत की। यह तात्कालिक राहत देने के बजाय महिलाओं की स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली महात्वाकांक्षी योजना थी। इसके तहत वे सभी जरूरी उपाय किए गए, जिससे महिलाओं में सुरक्षा का स्थायी भाव जन्म ले सके। करीब 45 हजार महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई। बिना थाने जाए महिला संबंधी शिकायतों के निस्तारण एवं तत्काल पुलिस सहायता सुनिश्चित करने के लिए महिला हेल्पलाइन -1090 तथा आपातकालीन हेल्पलाइन-112 का इंट्रीग्रेशन किया गया। इससे निष्क्रिय पड़ी हेल्पलाइन-1090 को नया जीवन मिला और तेजी से महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई होने लगी। संवेदनशीलता दिखाते हुए सुनिश्चित किया गया कि महिला शिकायतकर्ता की समस्या महिला पुलिसकर्मी द्वारा ही सुनी जाए। इसके लिए प्रदेश के समस्त दूरस्थ थानों तक महिला हेल्प डेस्क पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। यूपी देश का पहला राज्य बना, जिसमें पूरे प्रदेश में एक स्वतंत्र महिला बीट प्रणाली लागू की और इसके लिए 19 हजार से ज्यादा महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। ‘सेफ सिटी’ स्कीम के तहत 17 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में करीब 8 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
इस व्यापक कार्रवाई से अपेक्षित परिणाम मिले। इन प्रयासों के चलते योगी सरकार में महिलाएं भयमुक्त हुईं, जबकि अपराधियों में भय व्याप्त हुआ। सनातनी समाज में रक्षाबंधन पर्व का खास महत्व है। इस दिन हर बहन अपने भैया (भाई) की कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से राज्य की महिलाओं को किसी भी समय बे-रोकटोक सड़कों पर आने-जाने की आजादी दिलाई, वह कोई वचनबद्ध भाई ही कर सकता था।
(यह लेखिका के निजी विचार हैं। लेखिका दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। सामाजिक मुद्दों पर निरंतर लेखन करती हैं।)
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स्वाति का यह बयान निराधार नहीं था। यूपी में 9-10 साल पहले किसी भी छोटे-बड़े शहर में एक नजारा बड़ा आम था। स्कूटर या मोटर साइकिल पर अपने पिता या भाई के साथ स्कूल-कॉलेज ले जाई जाती बेटियां। सुबह के वक्त पिता को कोई जरूरी काम होता था तो यह ड्यूटी भाई को निभानी पड़ती थी। स्कूल या कॉलेज की छुट्टी के समय भी पिता दफ्तर से छुट्टी लेकर बिटिया को लेने पहुंच जाते थे। इस पूरी कवायद के केंद्र में एक ही बात थी कि कोई भी बेटी घर के बाहर अकेले सुरक्षित नहीं थी। सरेराह लड़कियों को तंग किया जाता था और पुलिस मूकदर्शक बनकर देखती रहती। अधिसंख्य बेटियों को शाम के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। कामकाजी महिलाएं इवनिंग या नाइट शिफ्ट में काम करने के बजाय नौकरी छोड़ना पसंद करती थीं।
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आंकड़ों पर नजर डालें तो, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 में राज्य में रेप के 3,050 मामले दर्ज किए गए, जो 2012 की तुलना में 50 फीसदी से भी अधिक थे। 2016 तक ये आंकड़ा बढकर 4,816 तक पहुंच गया था। चौतरफा आलोचना झेल रही सपा सरकार ने छवि सुधारने के लिए 1090 महिला हेल्पलाइन जरूर शुरू की, लेकिन इससे भी स्थिति में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला।
अब एक नजर उत्तर प्रदेश के मौजूदा परिदृश्य पर डालिए। राजनीतिक विरोध में कोई कुछ भी कह सकता है, लेकिन एक अहसास सबने किया है- सुरक्षा का, मजबूत कानून-व्यवस्था का। सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले ‘गुंडाराज’ का लेबल हटाने का काम किया। योगी ने इसके लिए अपने विश्वस्त व काबिल अफसरों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की। सबसे पहले पुलिस के दागी अधिकारियों व कर्मचारियों को चिह्नित किया गया और उनके स्थान पर ऐसे लोगों को लाया गया, जो अपराधियों के प्रति सख्त रुख अपनाने के लिए जाने जाते थे।
योगी ने पहली प्राथमिकता भी बेटियों की सुरक्षा को दी
हर जिले में एंटी रोमियो स्क्वायड का गठन। इस टीम ने तमाम स्कूल-कॉलेजों, पार्कों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर मंडराने वाले असामाजिक तत्वों पर सख्ती से लगाम लगानी शुरू की। एक अभियान की तरह महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों की न सिर्फ धरपकड़ होने लगी, बल्कि अपराध की प्रवृत्ति के अनुसार ऐसे लोगों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई भी की गईं। एंटी रोमियो स्क्वायड की लगभग 1700 टीमों ने गत वर्षों में स्कूल-कॉलेज, सार्वजनिक स्थलों, चौराहों, मॉल्स, मार्केट्स, पार्क आदि मिलाकर लगभग सवा करोड़ स्थानों पर छापेमारी की। इस दौरान साढ़े चार करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों की चेकिंग की गई। करीब 25 हजार मामले दर्ज किए गए, जिनमें 30 हजार से ज्यादा अभियुक्तों की गिरफ्तारी भी हुई। डेढ़ करोड़ से ज्यादा व्यक्तियों को कड़ी चेतावनी देकर छोड़ा गया। संदेश स्पष्ट था, किसी ने भी महिला की अस्मिता को चुनौती दी तो उसका बच पाना नामुमकिन है। इस कार्रवाई का व्यापक असर हुआ और इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आने लगे। भय का माहौल काफी हद तक काबू में आ चुका था।
इसके बाद योगी सरकार ने महिला सुरक्षा की दिशा में अगला कदम बढ़ाते हुए 'मिशन शक्ति' अभियान की शुरुआत की। यह तात्कालिक राहत देने के बजाय महिलाओं की स्थायी सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली महात्वाकांक्षी योजना थी। इसके तहत वे सभी जरूरी उपाय किए गए, जिससे महिलाओं में सुरक्षा का स्थायी भाव जन्म ले सके। करीब 45 हजार महिला पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई। बिना थाने जाए महिला संबंधी शिकायतों के निस्तारण एवं तत्काल पुलिस सहायता सुनिश्चित करने के लिए महिला हेल्पलाइन -1090 तथा आपातकालीन हेल्पलाइन-112 का इंट्रीग्रेशन किया गया। इससे निष्क्रिय पड़ी हेल्पलाइन-1090 को नया जीवन मिला और तेजी से महिलाओं की शिकायतों पर कार्रवाई होने लगी। संवेदनशीलता दिखाते हुए सुनिश्चित किया गया कि महिला शिकायतकर्ता की समस्या महिला पुलिसकर्मी द्वारा ही सुनी जाए। इसके लिए प्रदेश के समस्त दूरस्थ थानों तक महिला हेल्प डेस्क पर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। यूपी देश का पहला राज्य बना, जिसमें पूरे प्रदेश में एक स्वतंत्र महिला बीट प्रणाली लागू की और इसके लिए 19 हजार से ज्यादा महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। ‘सेफ सिटी’ स्कीम के तहत 17 नगर निगमों और गौतम बुद्ध नगर में करीब 8 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।
इस व्यापक कार्रवाई से अपेक्षित परिणाम मिले। इन प्रयासों के चलते योगी सरकार में महिलाएं भयमुक्त हुईं, जबकि अपराधियों में भय व्याप्त हुआ। सनातनी समाज में रक्षाबंधन पर्व का खास महत्व है। इस दिन हर बहन अपने भैया (भाई) की कलाई पर राखी बांधती है और भाई अपनी बहन की रक्षा का वचन देता है। उत्तर प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से राज्य की महिलाओं को किसी भी समय बे-रोकटोक सड़कों पर आने-जाने की आजादी दिलाई, वह कोई वचनबद्ध भाई ही कर सकता था।
(यह लेखिका के निजी विचार हैं। लेखिका दिल्ली विश्वविद्यालय के पी.जी.डी.ए.वी. कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। सामाजिक मुद्दों पर निरंतर लेखन करती हैं।)