Fact Check: अलवर में मंदिर पर झंडा लगाने के पुराने वीडियो को अभी की घटना बताकर किया जा रहा शेयर
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, इस वीडियो में कुछ लोग एक मंदिर के ऊपर नीले रंग का झंडा लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को हालिया घटना बताकर शेयर किया जा रहा है। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है।
विस्तार
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में कुछ लोग एक मंदिर के ऊपर चढ़कर नीले रंग का झंड़ा लगाते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह मामला राजस्थान के अलवर की हालिया घटना है, जहां एक बौद्ध समर्थक अंबेडकरवादी समूह ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी जांच में सामने आया कि यह वीडियो 2024 का है। पुराने वीडियो को अभी की घटना बताकर भ्रामक दावा किया जा रहा है।
क्या है दावा
मंदिर के ऊपर चढ़े लोगों के वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है यह घटना राजस्थान के अलवर जिले में हुई है। जहां मंदिर को तोड़ा जा रहा है।
ऑन रिकॉर्ड (@OnRecordIndia) नाम के एक एक्स अकाउंट ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा, “राजस्थान के अलवर में दलित कार्यकर्ताओं ने संत रविदास मंदिर के शिखर पर चढ़कर नीले रंग के अंबेडकरवादी झंडे फहराए। उन्होंने यह विरोध मंदिर में प्रवेश करने पर एक दलित लड़के पर कथित तौर पर लगाए गए जुर्माने के खिलाफ किया। वीडियो में कुछ लोग मंदिर की संरचना पर चढ़ते और बौद्ध चक्र के निशान वाले झंडे फहराते हुए दिखाई दे रहे हैं। जहां कुछ लोग इसे तोड़फोड़ बता रहे हैं, वहीं इसमें शामिल लोगों का कहना है कि यह जातिगत भेदभाव के खिलाफ एक प्रतीकात्मक विरोध है, क्योंकि इस मंदिर का संबंध दलितों के पूजनीय संत, संत रविदास से है।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें यह वीडियो एक यूट्यूब चैनल पर 18 अप्रैल 2024 को पोस्ट मिला। इस वीडियो के साथ कैप्शन लिखा गया था “अलवर में मंदिर के ऊपर बाबा साहब का झंडा लगाया”
आगे हमें राजस्थान पुलिस के एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट मिला। यहां इस वीडियो को झूठा बताया गया था। इस पोस्ट में लिखा गया था “फेक न्यूज से सावधान! ऐसी फेक न्यूज का राजस्थान पुलिस द्वारा खंडन किया जाता है। विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक वीडियो साझा कर यह दावा किया जा रहा है कि अलवर में किसी प्राचीन मंदिर में तोड़फोड़ की घटना हुई है। तथ्य जांच में सामने आया कि वायरल किया जा रहा वीडियो करीब 2 वर्ष पुराना है। इस वीडियो का वर्तमान समय या हालिया घटना से कोई संबंध नहीं है। इस प्रकार की भ्रामक जानकारी से सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका रहती है। राजस्थान पुलिस की अपील है कि किसी भी खबर/वीडियो को शेयर करने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें। अफवाह फैलाने या फेक न्यूज शेयर करने वालों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हमारा संकल्प है कि राजस्थान में शांति, सुरक्षा और सामाजिक सौहार्द बनाए रखना। सतर्क रहें, सुरक्षित रहें।”
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में साफ है कि पुराने वीडियो को हालिया घटना बताकर शेयर किया जा रहा है।