Sunscreen Tips: आ गया है मानसून! क्या अब भी लगानी चाहिए सनस्क्रीन? जानिए बरसात का स्किन केयर रूटीन
Monsoon Skincare Tips: क्या मानसून में सनस्क्रीन लगानी चाहिए? मानसून में भी सूर्य की UVA और कुछ UVB किरणें बादलों के बीच से त्वचा तक पहुंच सकती हैं। यदि आप दिन के समय बाहर जाते हैं या खिड़की के पास लंबे समय तक रहते हैं, तो ब्रॉड-स्पेक्ट्रम SPF 30 या उससे अधिक वाली सनस्क्रीन लगाना त्वचा की सुरक्षा के लिए लाभदायक माना जाता है।
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Skincare Tips: मानसून आ गया है। इस मौसम में बारिश भले ही गर्मी से राहत देती है लेकिन इसके साथ त्वचा से जुड़ी कई नई समस्याएं भी सामने आने लगती हैं। इस मौसम में भी सही स्किन केयर की जरूरत रहती है लेकिन कई लोगों को लगता है कि मानसून में धूप नहीं होती, इसलिए सनस्क्रीन लगाने की जरूरत नहीं है। इसी वजह से बरसात के मौसम में बहुत से लोग अपनी स्किनकेयर रूटीन से सनस्क्रीन को पूरी तरह हटा देते हैं। लेकिन क्या ऐसा करना सही है? क्या मानसून में सनस्क्रीन नहीं लगानी चाहिए?
त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून में बादलों के बावजूद सूर्य की यूवीए और यूवीबी किरणों का एक बड़ा हिस्सा धरती तक पहुंच सकता है। खासकर UVA किरणें, जो समय से पहले झुर्रियां, पिग्मेंटेशन और त्वचा को लंबे समय तक नुकसान पहुंचाने से जुड़ी होती हैं, बादलों को काफी हद तक पार कर सकती हैं। यदि आप दफ्तर जाने, कॉलेज, बाजार या किसी भी काम से बाहर निकलते हैं, तो मानसून में भी त्वचा को सूरज की किरणों से सुरक्षा की जरूरत हो सकती है।
हालांकि, हर व्यक्ति की त्वचा अलग होती है। इसलिए सनस्क्रीन का चुनाव भी स्किन टाइप, बाहर बिताए जाने वाले समय और गतिविधि के अनुसार करना चाहिए। आइए जानते हैं कि मानसून में सनस्क्रीन लगानी चाहिए या नहीं, कौन-सी सनस्क्रीन बेहतर रहती है, कितनी मात्रा लगानी चाहिए और किन सामान्य गलतियों से बचना चाहिए।
क्या बारिश के मौसम में भी धूप नुकसान पहुंचाती है?
बादल धूप की तीव्रता कम कर सकते हैं, लेकिन सभी पराबैंगनी किरणों को पूरी तरह नहीं रोकते। ध्यान रखें कि,
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UVA किरणें बादलों के बीच से गुजर सकती हैं।
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लंबे समय तक UV एक्सपोज़र से टैनिंग और पिग्मेंटेशन बढ़ सकता है।
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समय से पहले झुर्रियां आने का जोखिम बढ़ सकता है।
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संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी रखनी चाहिए।
मानसून में सनस्क्रीन क्यों जरूरी मानी जाती है?
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त्वचा को UV किरणों से बचाने में मदद करती है।
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टैनिंग और पिग्मेंटेशन का जोखिम कम करने में सहायक।
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समय से पहले एजिंग के संकेत कम करने में मदद।
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स्किन टोन को बेहतर बनाए रखने में सहयोग।
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बाहर रहने के दौरान अतिरिक्त सुरक्षा प्रदान करती है।
मानसून में कैसी सनस्क्रीन चुनें?
सनस्क्रीन खरीदते समय इन बातों का ध्यान रखें, कि
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ब्राॅड स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन चुनें।
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एसपीएफ 30 या उससे अधिक बेहतर विकल्प माना जाता है।
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PA+++ या PA++++ रेटिंग उपयोगी हो सकती है।
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ऑयली स्किन के लिए जेल या मैट फिनिश का उपयोग करें।
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ड्राई स्किन के लिए मॉइस्चराइजिंग फॉर्मूला अपनाएं।
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पसीना या हल्की बारिश होने पर वाटर रेसिस्टेंट विकल्प पर विचार करें।
सनस्क्रीन लगाने का सही तरीका
- चेहरा साफ करने के बाद मॉइस्चराइजर लगाएं।
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इसके बाद पर्याप्त मात्रा में सनस्क्रीन लगाएं।
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बाहर निकलने से लगभग 15-20 मिनट पहले लगाएं।
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यदि लंबे समय तक बाहर हैं, तो हर 2-3 घंटे में दोबारा लगाएं।
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तैराकी, अत्यधिक पसीना या चेहरा धोने के बाद पुनः लगाएं।
मानसून में लोग अक्सर करते हैं ये गलतियां
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बादल देखकर सनस्क्रीन छोड़ देना।
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बहुत कम मात्रा में सनस्क्रीन लगाना।
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केवल चेहरे पर लगाकर गर्दन और हाथों को भूल जाना।
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एक्सपायर्ड सनस्क्रीन का इस्तेमाल करना।
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पूरे दिन दोबारा न लगाना।
सनस्क्रीन के साथ अपनाएं ये स्किनकेयर टिप्स
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दिन में दो बार चेहरा साफ करें।
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त्वचा के अनुसार हल्का मॉइस्चराइज़र इस्तेमाल करें।
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पर्याप्त पानी पिएं।
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संतुलित आहार लें।
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गीली त्वचा को लंबे समय तक नम न रहने दें।
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बारिश में भी छाता या कैप का उपयोग करें।
किन लोगों को सनस्क्रीन जरूर लगानी चाहिए?
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जो रोजाना ऑफिस या कॉलेज जाते हैं।
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दोपहिया वाहन चलाने वाले लोग।
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बाहर काम करने वाले कर्मचारी।
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पिग्मेंटेशन या मेलाज़्मा की समस्या वाले लोग।
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जिनकी त्वचा जल्दी टैन हो जाती है।
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त्वचा विशेषज्ञ की सलाह पर उपचार ले रहे लोग।