Gen Z और AI का रिश्ता: जेन जी क्यों नहीं मानते इसे जादू की छड़ी? जरूरत-डर और ब्रेन रॉट की कहानी
Gen Z के लिए AI सहूलियत भी है और चिंता भी। युवा इसका इस्तेमाल काम आसान करने और जल्दी सीखने के लिए कर रहे हैं, लेकिन उन्हें डर है कि ज्यादा निर्भरता सोचने-समझने की क्षमता कमजोर कर सकती है। यही वजह है कि Gen Z, AI को मददगार मानती है, जादू की छड़ी नहीं।
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आज की दुनिया में जहां हर कोई AI के पीछे पागल है, वहीं GEN-Z इस तकनीक के साथ एक बहुत ही अनोखा और जटिल रिश्ता निभा रहा है। अक्सर लोग सोचते हैं कि ये पीढ़ी तो डिजिटल माहौल में पली-बढ़ी पीढ़ी है, तो ये पक्का AI को अपनी लाइफ का हिस्सा बना चुकी होगी। शायद कोई इसे अपना 'थेरेपिस्ट' मान रहा है तो कोई अपना 'रोमांटिक पार्टनर'। लेकिन हार्वर्ड बिजनेस पब्लिशिंग की लेटेस्ट रिसर्च ने इस सोच पर एक बड़ा Reality Check दिया है।
सच तो ये है कि Gen Z, AI को लेकर जितनी उत्साहित है, उतने ही उलझन में भी हैं। वे AI को किसी 'जादुई दुनिया' की तरह नहीं देखते, बल्कि उनके लिए यह एक जरूरत है, जैसे बिजली या इंटरनेट। जहां एक तरफ वे अपने काम करने की क्षमता बढ़ाने के लिए दिन-रात चैट जीपीटी या क्लाउड का सहारा ले रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके मन में एक गहरा डर ये भी है कि कहीं ये 'स्मार्ट मशीन' उनकी खुद की क्रिटिकल थिंकिंग और Originality को पूरी तरह से खत्म न कर दे।
आइए इस रिसर्च के पन्ने पलटते हैं और जानते हैं कि आखिर ये इमोशन से ज्यादा तर्क वाली जनरेशन AI के साथ अपनी जिंदगी कैसे संतुलित कर रही है।
1. एआई का इस्तेमाल: 'काम चोरी' नहीं, स्मार्ट वर्क!
जेन जी के लिए AI केवल एक बातचीत करने वाला डिजिटल साधन नहीं, उनका पर्सनल असिस्टेंट है। वे इसे इन चीजों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं:
- Google को 'Bye-Bye' (65%): जेन जी अब घंटों सर्च इंजन पर अपनी जानकारी नहीं जुटाता। सीधे AI से पूछता है और सटीक जवाब हासिल करता है।
- Work & Office (52%): लंबे ईमेल्स ड्राफ्ट करना हो या बोरिंग एक्सेल शीट, AI सब संभाल लेता है। इसने ऑफिस के काम को आसान बनाया है।
- Relationship Advice (32%): जब दोस्त व्यस्त हों, तो "क्या मुझे अपने Ex को मैसेज भेजना चाहिए?" जैसे सवालों के लिए AI ही काम आता है!
- The Myth of Loneliness: लोग सोचते हैं कि युवा AI को अपना प्रेमी/प्रेमिका बना रहे हैं, पर शोध कहता है कि सिर्फ 10% ही ऐसा सोचते हैं। बाकी सबके लिए यह सिर्फ एक मशीन है।

2. डर का एक अलग पहलू: क्या AI हमें डम्ब बना रहा है?
Gen Z काफी सेल्फ अवेयर हैं। वे AI यूज तो कर रहे हैं पर उन्हें इस बात की टेंशन भी है:
- Brain Rot का डर: लगभग 79% युवाओं को लगता है कि AI लोगों को आलसी बना रहा है।
- सोचने की क्षमता कर रहा कमजोर: यह रिसर्च का सबसे बड़ा पॉइंट है। जब AI हमारे लिए सब कुछ लिखता या सोचता है, तो हमारा दिमाग 'अच्छे से सोचना' भूल जाता है। इसे ही 'कॉग्निटिव डेट' कहते हैं। इसका मतलब है जब हम बार-बार किसी तकनीक, खासकर AI, पर सोचने, लिखने, याद रखने या निर्णय लेने के लिए निर्भर होने लगते हैं, तो धीरे-धीरे हमारे दिमाग की खुद से सोचने और विश्लेषण करने की क्षमता कमजोर होने लगती है।
- Loss of Skills: जेनजी को डर है कि कहीं वे बेसिक स्किल्स (जैसे कोडिंग या राइटिंग) न भूल जाएं।
3. 'व्यावहारिक तरीका': काम भी निकले और दिमाग भी चले
रिसर्च के अनुसार, स्मार्ट Gen Z यूजर्स AI को नकल की तरह नहीं, बल्कि किसी भी टॉपिक पर अपने विचार रखने वाले साथी की तरह इस्तेमाल करते हैं।
- उल्टा समझने का Process: AI से कुछ लिखवाकर उसे समझना कि उसने ऐसा क्यों लिखा, ताकि खुद की स्किल बढ़ सके।
- नजरिया बदलना: "अगर मैं एक CEO होती, तो इस प्रॉब्लम को कैसे देखती?" ऐसे अलग नजरिए पाने के लिए AI बेस्ट है।
- Admin Tasks Outsource: वो काम जो दिमाग थका देते हैं (जैसे मीटिंग नोट्स बनाना), वो AI को दे दिए जाते हैं ताकि असली 'Creativity' के लिए वक्त बचे।

हार्वर्ड की इस रिसर्च में कुछ ऐसी छुपी हुई जानकारी और दिलचस्प बातें भी सामने आई हैं जो पहली नजर में नहीं दिखतीं। चलिए, इस रडार के थोड़ा और अंदर चलते हैं और देखते हैं कि Gen Z और AI के बीच और क्या 'पक' रहा है।
4. The AI Paradox: इस्तेमाल भी और नफरत भी
इस रिसर्च का सबसे मजेदार हिस्सा यह है कि Gen Z, AI के साथ एक पसंद-नापसंद वाले रिश्ते में है।
- The Struggle is Real: जहां एक तरफ वे अपनी नौकरी में सबसे आगे रहने के लिए एआई के साधनों का इस्तेमाल करते हैं, वहीं दूसरी तरफ वे सोशल मीडिया पर ऐसी चीजों को पसंद करते हैं जो "पूरी तरह मानवीय" हों।
- Authenticity की भूख: शोध बताती है कि जितना ज्यादा एआई से बना कंटेंट बढ़ रहा है, जेन जी उतना ही ज्यादा हाथ से बना, कच्चा और बिना छेड़छाड़ वाला कंटेंट तलाश रहा है। उनके लिए एआई 'काम' के लिए अच्छा है, लेकिन 'भरोसे' के लिए नहीं।

5. AI शिक्षक नहीं, मार्गदर्शक है
जेन जी अब पारंपरिक तरीके से नहीं सीख रहे हैं। वे AI को एक निजी मार्गदर्शक की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
- असान भाषा में जानकारी: AI हर किसी को पांच साल के बच्चे की तरह समझता है और मुश्किल सवालों को आसान भाषा में समझाने में मदद करता है।
- आत्मविश्वास बढ़ाने वाला: इंटरव्यू से पहले तैयारी के लिए AI से बेहतर कोई नहीं है. किसी मुश्किल सवालों का जवाब देना हो, Gen Z अब AI का इस्तेमाल अपनी घबराहट कम करने और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए कर रहा है।
6. The Prompt Engineers: नई भाषा का जन्म
शोध के अनुसार, इस पीढ़ी ने अनजाने में एक नई कौशल क्षमता हासिल कर ली है, जिसे संकेत देकर काम करवाना कहते हैं।
- आज के युवा जानते हैं कि मशीन से सही काम कैसे निकलवाना है।
- जहां पुरानी पीढ़ी AI से डरी हुई है, जेन जी इसे एक रचनात्मक साथी की तरह दिशा दे रहा है। वे जानते हैं कि AI एक बेहतरीन कलाकार है, लेकिन उसका निर्देशक हमेशा एक इंसान ही रहना चाहिए।

7. नौकरी जाने का डर नहीं : Gen Z को सता रही कॉम्पटीशन बढ़ने की चिंता
जेन जी को अपनी नौकरी जाने का डर कम है, बल्कि उन्हें डर है कि AI में माहिर लोग उनकी जगह ले लेंगे। रिसर्च में पता चलता है कि जेन जी अब अपने रिज्यूम में सिर्फ अपनी डिग्री नहीं, बल्कि यह भी दिखाना चाहते हैं कि AI के इस्तेमाल में वो कितना माहिर हैं। वे जानते हैं कि भविष्य AI vs Human नहीं, बल्कि "Human + AI vs Only Human" का है।