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'जॉब ऐसी हो जो लाइफ के साथ फिट बैठे': Cool Office का Craze खत्म! Gen Z को चाहिए अपनी शर्तों वाली नौकरी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Mon, 25 May 2026 04:19 PM IST
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सार

Gen Z अब सिर्फ चमकदार ऑफिस और फ्री स्नैक्स नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी, वर्क-लाइफ बैलेंस और अपनी पसंद की नौकरी चाहती है। Randstad की रिपोर्ट के मुताबिक युवा बेहतर सैलरी के साथ काम में आजादी, करियर ग्रोथ और सीखने के मौके को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। बड़ी संख्या में Gen Z एक ही नौकरी पर निर्भर नहीं रहना चाहती और AI व हाइब्रिड वर्क को तेजी से अपना रही है।

Gen Z Jobs Trend: Cool Office Craze Fades as Young Professionals Want Flexibility and Work Life Balance
जेन जी को चाहिए कैसे नौकरी? - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

एक वक्त था जब बड़ा केबिन, फ्री स्नैक्स और चमकदार ऑफिस नौकरी के दौरान युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करता था। लेकिन अब नई पीढ़ी की सोच बदल चुकी है। आज का युवा यह नहीं देख रहा कि ऑफिस कितना कूल है, बल्कि यह देख रहा है कि नौकरी उसकी जिंदगी के साथ कितनी आसानी से चल सकती है। Gen Z अब ऐसी नौकरी चाहते हैं जहां काम के साथ निजी जिंदगी, सीखने के मौके और अपनी पसंद की आजादी भी मिले।


Randstad की 2025 Gen Z Workplace Blueprint रिपोर्ट में भारत के प्रोफेशनल्स पर किए गए सर्वे में यह बड़ा बदलाव साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट बताती है कि अब युवाओं की प्रायोरिटी (प्राथमिकता)बदल चुकी हैं और कंपनियों को भी अपने पुराने तरीके बदलने होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक Gen Z कर्मचारियों के लिए अब सिर्फ ऑफिस का माहौल नहीं, बल्कि फ्लेक्सिबिलिटी (लचीलापन) और बेहतर जीवन ज्यादा मायने रखता है।
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रिपोर्ट के बड़े आंकड़े:

  • 37% युवाओं ने बेहतर सैलरी को सबसे पहली  प्राथमिकता बताया।
  • 25% युवा फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स में काम करना पसंद करते हैं।
  • 22% कर्मचारियों के लिए वर्क-लाइफ बैलेंस सबसे पहली जरूरत है।
  • 02% युवा ने ऑफिस पर्क्स जैसे हॉबी अलाउंस या एक्स्ट्रा लीव को अहमियत दी।

देश में कितने हैं जेन जी वर्कफोर्स?

रिपोर्ट के अनुसार भारत की Gen Z आबादी अभी देश के करीब 25% वर्कफोर्स का हिस्सा है और 2035 तक यह आंकड़ा बढ़कर 47% तक पहुंच सकता है। यानी आने वाले वर्षों में कंपनियों की दिशा और वर्क कल्चर काफी हद तक यही पीढ़ी तय करेगी।
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Randstad India के सीईओ विश्वनाथ पीएस का कहना है कि आज की युवा पीढ़ी फ्री लंच या फूसबॉल टेबल जैसी सुविधाओं से प्रभावित नहीं होती। वे अपने समय पर नियंत्रण, सही करियर ग्रोथ और बेहतर अवसर चाहते हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि आज के युवा एक ही कंपनी में लंबे समय तक रुकने के पक्ष में नहीं हैं।

जॉब बदलने को लेकर Gen Z की सोच:

  • Gen Z की बात करें तो 38% कर्मचारी एक कंपनी में एक साल से कम समय तक रहने की योजना बना रहे हैं।
  • पारंपरिक लाइफटाइम जॉब का कॉन्सेप्ट नई पीढ़ी में तेजी से कमजोर पड़ रहा है।

एक नौकरी पर नहीं रहना चाहते हैं निर्भर 

  • अब युवा केवल नौकरी नहीं बल्कि कई आय के स्रोत बनाना चाहते हैं। रिपोर्ट के अनुसार भारत के 43% Gen Z प्रोफेशनल्स फुल-टाइम नौकरी के साथ साइड बिजनेस भी करना चाहते हैं। यह आंकड़ा वैश्विक औसत से काफी ज्यादा है।
  • हाइब्रिड वर्क और रिमोट जॉब्स ने भी युवाओं की सोच बदल दी है। अब कई युवा बड़े और महंगे शहरों को छोड़कर अपने होमटाउन में रहना पसंद कर रहे हैं। इससे उन्हें बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस और कम खर्च दोनों का फायदा मिल रहा है।
  •  जानकारों का कहना है कि Gen Z अब नौकरी को सिर्फ वेतन से नहीं जोड़ती। वे लगातार सीखने, नए एक्सपीरियंस लेने और अपने हिसाब से करियर बनाने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल Voltas में 70% Gen Z कर्मचारियों ने फॉर्मल लर्निंग प्रोग्राम्स में हिस्सा लिया।
  • आज फ्लेक्सिबिलिटी का मतलब सिर्फ घर से काम करना नहीं रह गया है। अब युवा ऐसी नौकरी चाहते हैं जो उनकी लाइफस्टाइल, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास के हिसाब से हो। नई पीढ़ी कंपनियों से सिर्फ सुविधाएं ही नहीं बल्कि भरोसा, स्वतंत्रता और फैसले लेने की आजादी चाहती है।




नौकरी के साथ AI बन रही बड़ी जरूरत

  • 82% युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को लेकर Excited हैं।
  • 83% ऑफिस की परेशानी हल करने के लिए AI का इस्तेमाल कर रहे।

क्या है विशेषज्ञों की राय?

विशेषज्ञों का मानना है कि अब कंपनियों को अपने कर्मचारियों के लिए फ्लेक्सिबल माहौल, नई स्किल्स सीखने के मौके, बेहतर मानसिक संतुलन और परिणाम आधारित वर्क कल्चर तैयार करना होगा। तभी वे युवा प्रतिभाओं को अपने साथ लंबे समय तक जोड़ पाएंगे।

यह बदलाव केवल भारत तक सीमित नहीं है। Deloitte की 2025 Gen Z and Millennial Survey में भी सामने आया कि दुनियाभर के युवा वर्क-लाइफ बैलेंस और फ्लेक्सिबल जॉब्स को सबसे ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
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