संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। श्री बांके बिहारी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर वृंदावन से आए कथावाचक शशांक भारद्वाज ने राजा परीक्षित के श्राप प्रसंग का वर्णन करते हुए कहा कि संतों का क्रोध भी करुणा से भरा होता है। उन्होंने जोर दिया कि परिस्थितियां कैसी भी हों, इंसान के पास सकारात्मक दृष्टि होनी चाहिए। जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि के सिद्धांत पर चलते हुए विषम परिस्थितियों को भी प्रभु का प्रसाद समझना चाहिए।
युवा पीढ़ी में बढ़ते डिप्रेशन और आत्महत्या के मामलों पर चिंता जताते हुए महाराज ने कहा कि छोटी-छोटी बातों पर टूटने के बजाय खुद को मानसिक रूप से मजबूत बनाना अनिवार्य है। उन्होंने लिव-इन रिलेशनशिप पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज का इंसान मंदिर में दिमाग और दुनिया में दिल लगा रहा है, जबकि होना इसके विपरीत चाहिए। कथा के दौरान वामन अवतार, नरसिंह अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। सभा के प्रधान दिनेश बहल ने बताया कि कथा में शिव मंदिर प्रीत नगर व परशुराम समिति के सदस्यों सहित भारी संख्या में श्रद्धालु उमड़े। इस अवसर पर सतीश दुआ, संजय गौरी, राकेश बेरी व अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

अंबाला छावनी के गोविंद नगर स्थित श्री बांके बिहार मंदिर में प्रवचन करते कथावाचक। प्रवक्ता