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Ambala News: कागजों पर बाग लगाकर डकार गए सब्सिडी के फल
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बागवानी विभाग में घोटाले की लंबी जांच के बाद हुए चौंकाने वाले खुलासे
माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बागवानी विभाग में हुए एक बड़े घोटाले की लंबी जांच की है। यह घोटाला राष्ट्रीय बागवानी मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ा है। एसीबी ने इन योजनाओं के लाभार्थियों के पास जाकर सत्यापन किया।
जांच में सामने आया कि कागजों पर फर्जी बाग दिखाकर सब्सिडी हड़प ली गई थी। जिन स्थानों पर बाग होने का दावा किया गया था, वहां वास्तव में कोई बाग मौजूद नहीं थे। इसके अतिरिक्त, जहां वर्मी कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, वहां बागवानी फसलें नहीं मिले। पुराने बागों की केवल मरम्मत दिखाकर भी खानापूर्ति की गई थी। इस प्रकार सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।
1. कागजों पर बागवानी, धरातल पर शून्य
उज्ज्वल माजरी (नारायणगढ़) : एक ही परिवार (निशा देवी, वीरेंद्र कुमार, देवेंद्र सिंह) के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 1.2 हेक्टेयर में आम और 0.4 हेक्टेयर में अमरूद के बाग लगाने का लाभ दिखाया गया लेकिन मौके पर एक भी पौधा नहीं मिला।
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अब्दुल्लागढ़ (बराड़ा) : किसान अजय सूरी को ऑर्गेनिक खेती और वर्मी कंपोस्ट का प्रोत्साहन दिया गया लेकिन जमीन पर कोई बागवानी फसल मौजूद नहीं थी।
हुसैनी (नारायणगढ़) : किसान अशोक के नाम पर 2.5 एकड़ में फर्जी तरीके से पुराने बागों का जीर्णोद्धार के इनपुट्स दिखाकर कागजी खानापूर्ति की गई।
2. मशरूम शेड और राशन कार्ड का खेल :
पंजोखरा गांव : किसान सुखविंदर सिंह को 25,000 रुपये की सब्सिडी जारी की गई। जब जांच टीम पहुंची तो पाया गया कि कोई यूनिट थी ही नहीं, सिर्फ खानापूर्ति के लिए एक पुराने कमरे में मशरूम के 160 थैले रख दिए गए थे।
दुखेड़ी गांव : तीन लाभार्थियों के नाम पर अलग-अलग 25-25 हजार (कुल 75,000 रुपये) की सब्सिडी ली गई, लेकिन तीनों यूनिट को केवल एक ही कमरे में दिखाकर गबन किया गया।
3. बिना खेत के मिलीं शेडिंग नेट सब्सिडी
नारायणगढ़ और बराड़ा क्षेत्र में किसानों के नाम पर 1000 वर्ग मीटर के शेडिंग नेट स्वीकृत दिखाए गए जबकि खेतों में कोई नेट नहीं लगाया गया था। छोटी कोहड़ी गांव के एक ही परिवार के 7 सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से 1,09,20,000 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत दिखाकर बड़ा घोटाला अंजाम दिया गया।
4. वर्मी कंपोस्ट में भूमिहीनों को बांटा फंड
नियमों को ताक पर रखकर ऐसे लोगों को सब्सिडी दी गई जो भूमिहीन थे। केसरी गांव में 500 वर्ग फीट के बजाय 235 वर्ग फीट के बंद कमरों में यूनिट दिखाकर 30,000 रुपये की सब्सिडी डकार ली गई। अब्दुल्लागढ़ में जिन वर्मी कंपोस्ट यूनिटों पर 30-30 हजार सब्सिडी ली गई, वे मौके पर बंद मिलीं और उनमें चारा भरा हुआ पाया गया।
5. ड्रिप सिंचाई में कागजी ड्रम और डेमो
डेरा गांव में पात्र किसानों को ड्रिप सिस्टम लगाने के बावजूद सब्सिडी का बिल जमा नहीं कराया गया। वहीं उज्ज्वल माजरी में 125 एकड़ क्षेत्र में फर्जी ड्रिप डेमोनस्ट्रेशन का रिकॉर्ड तैयार कर सहायता राशि का गबन किया गया।
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माई सिटी रिपोर्टर
अंबाला सिटी। राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बागवानी विभाग में हुए एक बड़े घोटाले की लंबी जांच की है। यह घोटाला राष्ट्रीय बागवानी मिशन और अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़ा है। एसीबी ने इन योजनाओं के लाभार्थियों के पास जाकर सत्यापन किया।
जांच में सामने आया कि कागजों पर फर्जी बाग दिखाकर सब्सिडी हड़प ली गई थी। जिन स्थानों पर बाग होने का दावा किया गया था, वहां वास्तव में कोई बाग मौजूद नहीं थे। इसके अतिरिक्त, जहां वर्मी कंपोस्ट के उपयोग को बढ़ावा दिया गया, वहां बागवानी फसलें नहीं मिले। पुराने बागों की केवल मरम्मत दिखाकर भी खानापूर्ति की गई थी। इस प्रकार सरकारी धन का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग किया गया।
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1. कागजों पर बागवानी, धरातल पर शून्य
उज्ज्वल माजरी (नारायणगढ़) : एक ही परिवार (निशा देवी, वीरेंद्र कुमार, देवेंद्र सिंह) के नाम पर फर्जीवाड़ा कर 1.2 हेक्टेयर में आम और 0.4 हेक्टेयर में अमरूद के बाग लगाने का लाभ दिखाया गया लेकिन मौके पर एक भी पौधा नहीं मिला।
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अब्दुल्लागढ़ (बराड़ा) : किसान अजय सूरी को ऑर्गेनिक खेती और वर्मी कंपोस्ट का प्रोत्साहन दिया गया लेकिन जमीन पर कोई बागवानी फसल मौजूद नहीं थी।
हुसैनी (नारायणगढ़) : किसान अशोक के नाम पर 2.5 एकड़ में फर्जी तरीके से पुराने बागों का जीर्णोद्धार के इनपुट्स दिखाकर कागजी खानापूर्ति की गई।
2. मशरूम शेड और राशन कार्ड का खेल :
पंजोखरा गांव : किसान सुखविंदर सिंह को 25,000 रुपये की सब्सिडी जारी की गई। जब जांच टीम पहुंची तो पाया गया कि कोई यूनिट थी ही नहीं, सिर्फ खानापूर्ति के लिए एक पुराने कमरे में मशरूम के 160 थैले रख दिए गए थे।
दुखेड़ी गांव : तीन लाभार्थियों के नाम पर अलग-अलग 25-25 हजार (कुल 75,000 रुपये) की सब्सिडी ली गई, लेकिन तीनों यूनिट को केवल एक ही कमरे में दिखाकर गबन किया गया।
3. बिना खेत के मिलीं शेडिंग नेट सब्सिडी
नारायणगढ़ और बराड़ा क्षेत्र में किसानों के नाम पर 1000 वर्ग मीटर के शेडिंग नेट स्वीकृत दिखाए गए जबकि खेतों में कोई नेट नहीं लगाया गया था। छोटी कोहड़ी गांव के एक ही परिवार के 7 सदस्यों के नाम पर फर्जी तरीके से 1,09,20,000 रुपये की सहायता राशि स्वीकृत दिखाकर बड़ा घोटाला अंजाम दिया गया।
4. वर्मी कंपोस्ट में भूमिहीनों को बांटा फंड
नियमों को ताक पर रखकर ऐसे लोगों को सब्सिडी दी गई जो भूमिहीन थे। केसरी गांव में 500 वर्ग फीट के बजाय 235 वर्ग फीट के बंद कमरों में यूनिट दिखाकर 30,000 रुपये की सब्सिडी डकार ली गई। अब्दुल्लागढ़ में जिन वर्मी कंपोस्ट यूनिटों पर 30-30 हजार सब्सिडी ली गई, वे मौके पर बंद मिलीं और उनमें चारा भरा हुआ पाया गया।
5. ड्रिप सिंचाई में कागजी ड्रम और डेमो
डेरा गांव में पात्र किसानों को ड्रिप सिस्टम लगाने के बावजूद सब्सिडी का बिल जमा नहीं कराया गया। वहीं उज्ज्वल माजरी में 125 एकड़ क्षेत्र में फर्जी ड्रिप डेमोनस्ट्रेशन का रिकॉर्ड तैयार कर सहायता राशि का गबन किया गया।