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Ambala News: पालने में संघर्ष कर रुद्राक्ष छीन लाया जीवन
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अंबाला का रुद्राक्ष। संवाद
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- दो दिन के मासूम को था कैंसर, तीन माह में बीमारी को हराया, रोटरी अंबाला कैंसर अस्पताल में सामने आया मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो और सही समय पर इलाज मिले तो मौत को भी हराया जा सकता है। अंबाला में दो दिन के नवजात रुद्राक्ष में डाउन सिंड्रोम व एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) नामक ब्लड कैंसर पाया गया था। यह केस अंबाला कैंट के रोटरी अंबाला कैंसर व जनरल अस्पताल में तीन माह पहले सामने आया था। जन्म के बाद नवजात की जांच करने पर टीएलसी एक लाख के ऊपर पाए गए थे जो हजारों में होनी चाहिए थी। उसके बाद बोन मैरो का टेस्ट व खून की जांच की गई थी।
इसके अलावा डाउन सिंड्रोम का टेस्ट भी करवाया गया था। तब जाकर एएमएल (टीएएम) नाम का कैंसर पाया गया था। कैंसर शुरुआती चरण में ही पकड़े जाने पर दवाओं से उपचार किया गया है। अब नवजात तीन माह का हो गया है व अंबाला कैंट निवासी रुद्राक्ष डॉक्टरों की निगरानी में है। हर माह उसकी जांच की जा रही है। डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। वे सामान्य बच्चे से अलग व्यवहार करते हैं। उनका विकास भी सही तरीके से नहीं होता है। अध्ययन से सामने आया है कि ऐसे बच्चों में ब्लड कैंसर का भी खतरा ज्यादा होता है। डाउन सिंड्रोम व एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) नामक ब्लड कैंसर में अनुमान से भी ज्यादा गहराई से जुड़े हैं।
दो साल के भीतर चार बच्चों ने दी ब्रेन ट्यूमर को मात
बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजिस्ट व ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विनीत आनंद ने बताया कि दो साल के भीतर 5 से 16 साल के चार बच्चों में ब्रेन ट्यूमर पाया गया था। कीमोथेरेपी, ऑपरेशन व रेडिएशन के जरिये दो साल में कैंसर को जड़ से खत्म किया गया है। अब बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इसके अलावा किडनी के कैंसर के ग्रस्त तीन बच्चों ने भी यह जंग जीत ली है। इसके अलावा ब्लड कैंसर से ग्रस्त 30 बच्चे ठीक हो चुके हैं। 5 से 7 बच्चे यह जंग लड़ रहे हैं। इसके अलावा बच्चों में हड्डी का कैंसर, लिम्फोमा कैंसर पाया जा रहा है। वर्ष 2025 की बात करें तो अंबाला कैंट के रोटरी कैंसर अस्पताल में 62 से 70 बच्चों में कैंसर पाया गया है व उनका उपचार किया गया है तो कुछ उपचाराधीन है।
बच्चों में कैंसर में लक्षण-
- खून की कमी जो दवाइयों से ठीक नहीं हो रहीं।
- प्लेटलेट्स कम हैं या नीले धब्बे पड़ रहे।
- किसी को पेट व गर्दन आदि शरीर में गांठें हैं।
- बच्चे का वजन बढ़ने की जगह कम हो रहा हो।
- दौरे पड़ना व धुंधला दिखना।
- हड्डी व पेट में सूजन आना।
बड़ों की अपेक्षा बच्चों में कैंसर का उपचार संभव है। जरूरत है तो शुरूआत में ही कैंसर के लक्षणों को पहचानने व संबंधित विशेषज्ञ को दिखाने की ताकि समय रहते उपचार शुरू कर कैंसर को खत्म किया जा सके। 20 साल तक के बच्चों में कैंसर बढ़ता जा रहा है। अंबाला कैंट के रोटरी अस्पताल में 18 साल व उससे कम उम्र के बच्चों को नि:शुल्क कीमोथेरेपी की दवाइयां दे रहे हैं। बच्चे कैंसर को मात भी दे रहे हैं। बच्चों में ज्यादातर कैंसर जेनेटिक म्यूटेशन से होता है।
- डाॅ. विनीत आनंद, बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजिस्ट व ऑन्कोलॉजिस्ट अंबाला
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संवाद न्यूज एजेंसी
अंबाला। कहते हैं कि अगर हौसला बुलंद हो और सही समय पर इलाज मिले तो मौत को भी हराया जा सकता है। अंबाला में दो दिन के नवजात रुद्राक्ष में डाउन सिंड्रोम व एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) नामक ब्लड कैंसर पाया गया था। यह केस अंबाला कैंट के रोटरी अंबाला कैंसर व जनरल अस्पताल में तीन माह पहले सामने आया था। जन्म के बाद नवजात की जांच करने पर टीएलसी एक लाख के ऊपर पाए गए थे जो हजारों में होनी चाहिए थी। उसके बाद बोन मैरो का टेस्ट व खून की जांच की गई थी।
इसके अलावा डाउन सिंड्रोम का टेस्ट भी करवाया गया था। तब जाकर एएमएल (टीएएम) नाम का कैंसर पाया गया था। कैंसर शुरुआती चरण में ही पकड़े जाने पर दवाओं से उपचार किया गया है। अब नवजात तीन माह का हो गया है व अंबाला कैंट निवासी रुद्राक्ष डॉक्टरों की निगरानी में है। हर माह उसकी जांच की जा रही है। डाउन सिंड्रोम से ग्रस्त बच्चों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। वे सामान्य बच्चे से अलग व्यवहार करते हैं। उनका विकास भी सही तरीके से नहीं होता है। अध्ययन से सामने आया है कि ऐसे बच्चों में ब्लड कैंसर का भी खतरा ज्यादा होता है। डाउन सिंड्रोम व एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया (एएमएल) नामक ब्लड कैंसर में अनुमान से भी ज्यादा गहराई से जुड़े हैं।
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दो साल के भीतर चार बच्चों ने दी ब्रेन ट्यूमर को मात
बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजिस्ट व ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. विनीत आनंद ने बताया कि दो साल के भीतर 5 से 16 साल के चार बच्चों में ब्रेन ट्यूमर पाया गया था। कीमोथेरेपी, ऑपरेशन व रेडिएशन के जरिये दो साल में कैंसर को जड़ से खत्म किया गया है। अब बच्चे पूरी तरह से सुरक्षित हैं। इसके अलावा किडनी के कैंसर के ग्रस्त तीन बच्चों ने भी यह जंग जीत ली है। इसके अलावा ब्लड कैंसर से ग्रस्त 30 बच्चे ठीक हो चुके हैं। 5 से 7 बच्चे यह जंग लड़ रहे हैं। इसके अलावा बच्चों में हड्डी का कैंसर, लिम्फोमा कैंसर पाया जा रहा है। वर्ष 2025 की बात करें तो अंबाला कैंट के रोटरी कैंसर अस्पताल में 62 से 70 बच्चों में कैंसर पाया गया है व उनका उपचार किया गया है तो कुछ उपचाराधीन है।
बच्चों में कैंसर में लक्षण-
- खून की कमी जो दवाइयों से ठीक नहीं हो रहीं।
- प्लेटलेट्स कम हैं या नीले धब्बे पड़ रहे।
- किसी को पेट व गर्दन आदि शरीर में गांठें हैं।
- बच्चे का वजन बढ़ने की जगह कम हो रहा हो।
- दौरे पड़ना व धुंधला दिखना।
- हड्डी व पेट में सूजन आना।
बड़ों की अपेक्षा बच्चों में कैंसर का उपचार संभव है। जरूरत है तो शुरूआत में ही कैंसर के लक्षणों को पहचानने व संबंधित विशेषज्ञ को दिखाने की ताकि समय रहते उपचार शुरू कर कैंसर को खत्म किया जा सके। 20 साल तक के बच्चों में कैंसर बढ़ता जा रहा है। अंबाला कैंट के रोटरी अस्पताल में 18 साल व उससे कम उम्र के बच्चों को नि:शुल्क कीमोथेरेपी की दवाइयां दे रहे हैं। बच्चे कैंसर को मात भी दे रहे हैं। बच्चों में ज्यादातर कैंसर जेनेटिक म्यूटेशन से होता है।
- डाॅ. विनीत आनंद, बाल चिकित्सा हेमेटोलॉजिस्ट व ऑन्कोलॉजिस्ट अंबाला
