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चिंता करना मस्तिष्क का स्वभाव : भारती

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 02 Feb 2026 02:21 AM IST
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Worrying is the nature of the mind: Bharti
शहर मॉडल टाउन स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। - फोटो : अयोध्या-प्रयागराज हाईवे के कूरेभार चौराहे से साइकिल पर दूध लेकर जाता दू​धिया। संवाद
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अंबाला सिटी। मॉडल टाउन स्थित दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान आश्रम में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन किया गया। इस दौरान साध्वी पूजा भारती ने मानव जीवन से जुड़े कुछ पहलुओं के बारे में जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि चिंता करना मस्तिष्क का स्वभाव है। भूतकाल में लिए गए गलत निर्णयों की चिंता, आज वर्तमान में जीवन यापन की चिंता अथवा भविष्य की सुरक्षा की चिंता प्रत्येक मनुष्य को होती है, किंतु यदि विचार करके देखें तो अधिकतर चिंताओं का कारण निराधार होता है।
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उन्होंने कहा कि हम अपनी अधिकतर ऊर्जा चिंता करने में ही व्यर्थ कर देते हैं। एक ब्रह्मज्ञानी साधक जब ध्यान साधना से ब्रह्म के चिंतन में जुड़ जाता है तो वह परम सत्ता स्वयं हमारी सभी चिंताओं का निवारण करने के लिए तत्पर रहती है। वास्तविक रूप में चिंतन ध्यान कि वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा हमारी अंतर आत्मा सीधे उस परब्रह्म सत्ता से संपर्क साध लेती है। संवाद
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