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Bhiwani News: पावर ग्रिड मुआवजे में हेरफेर के आरोप पर किसानों का अनिश्चितकालीन धरना शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी, भिवानी
Updated Wed, 17 Jun 2026 12:21 AM IST
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तोशाम में धरना देते ग्राम स्वराज मोर्चा के पदाधिकारी।
- फोटो : 1
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तोशाम। हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के लिए भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में हेरफेर और पावर ग्रिड तथा प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत के विरोध में किसानों ने मंगलवार से एसडीएम कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। ग्राम स्वराज किसान मोर्चा और पावर ग्रिड बनाम किसान संघर्ष समिति के बैनर तले किसानों ने मुआवजे की दरों में बदलाव को बड़ा घोटाला बताते हुए इसकी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र तालू और प्रदेश महासचिव मा. रघुबीर सिंह भेरा ने कहा कि यह सीधे तौर पर किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन मिलकर किसानों की जमीनों को कौड़ियों के भाव हड़पना चाहते हैं। उनका कहना था कि जिस मुआवजे की राशि को पहली बैठक में सर्वसम्मति से करोड़ों रुपये प्रति एकड़ तय किया गया था उसे महज आठ दिन बाद ही अधिकारियों ने बंद कमरों में बैठकर आधा या उससे भी कम कर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की तानाशाही और कथित धोखाधड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
किसान नेताओं ने बताया कि मुआवजे की दरें तय करने के लिए छह मई को पहली आधिकारिक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में अधिकारियों और किसानों के बीच सहमति से प्रति एकड़ सम्मानजनक और करोड़ों रुपये की राशि तय की गई थी। उनका आरोप है कि इसके आठ दिन बाद यानी 14 मई को हुई दूसरी बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए मुआवजे की दरों को काफी कम कर दिया।
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उन्होंने कहा कि दोनों बैठकों के फैसलों में जमीन-आसमान का अंतर है जो अधिकारियों की कथित मिलीभगत और किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान भागुराम, युद्धवीर, मंगल सिंह खरेटा, राज सिंह धनाना, राजपाल चाहर तथा युवा किसान नेता मनोज मिराण सहित अन्य किसान मौजूद रहे।
ग्राम स्वराज किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष जोगेंद्र तालू और प्रदेश महासचिव मा. रघुबीर सिंह भेरा ने कहा कि यह सीधे तौर पर किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक अधिकारी और पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन मिलकर किसानों की जमीनों को कौड़ियों के भाव हड़पना चाहते हैं। उनका कहना था कि जिस मुआवजे की राशि को पहली बैठक में सर्वसम्मति से करोड़ों रुपये प्रति एकड़ तय किया गया था उसे महज आठ दिन बाद ही अधिकारियों ने बंद कमरों में बैठकर आधा या उससे भी कम कर दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की तानाशाही और कथित धोखाधड़ी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
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किसान नेताओं ने बताया कि मुआवजे की दरें तय करने के लिए छह मई को पहली आधिकारिक बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में अधिकारियों और किसानों के बीच सहमति से प्रति एकड़ सम्मानजनक और करोड़ों रुपये की राशि तय की गई थी। उनका आरोप है कि इसके आठ दिन बाद यानी 14 मई को हुई दूसरी बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए मुआवजे की दरों को काफी कम कर दिया।
उन्होंने कहा कि दोनों बैठकों के फैसलों में जमीन-आसमान का अंतर है जो अधिकारियों की कथित मिलीभगत और किसी बड़े भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। किसानों ने चेतावनी दी कि जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरने के दौरान भागुराम, युद्धवीर, मंगल सिंह खरेटा, राज सिंह धनाना, राजपाल चाहर तथा युवा किसान नेता मनोज मिराण सहित अन्य किसान मौजूद रहे।