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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   500 standard 52-seater buses will be added to the roadways depot.

Chandigarh-Haryana News: 52 सीट की 500 साधारण बसें होंगी रोडवेज डिपो में शामिल

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बजट में घोषणा के अनुसार 500 इलेक्ट्रिक और 500 साधारण बसों की होगी खरीद
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सितंबर के पहले सप्ताह में खुलेगा यह टेंडर, बसों की अनुमानित कीमत 175 करोड़
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में रोडवेज बसों की कमी को दूर करने के लिए राज्य परिवहन विभाग 500 साधारण बसें खरीदने जा रहा है। ऐसे में बसों की खरीद के लिए ई-टेंडर लगाया गया है। 52-52 सीट की इन साधारण बसों की अनुमानित खरीद की लागत करीब 175 करोड़ रुपये होगी। बीएस-6 श्रेणी की बसें होने के कारण यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) या नॉन एनसीआर के सभी 23 जिलों में कहीं भी आवागमन कर सकेंगी।
राज्य परिवहन विभाग के दिल्ली-चंडीगढ़ सहित 24 डिपो और 13 सब डिपो से 4042 रोडवेज की बस हैं। रोडवेज के बेड़े में अधिकतम 5300 बसों को शामिल किया जा सकता है। अभी करीब 1300 बसों की कमी है। राज्य परिवहन विभाग के प्रस्ताव को बजट 2026-2027 में शामिल किया गया है। साथ ही 1000 साधारण बसों की खरीद का सरकार ने निर्णय लिया है। कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बसों की खरीद से संबंधित बैठक के दौरान इस प्रस्ताव में बदलाव के निर्देश दिए थे। सभी 1000 साधारण बसों की बजाय 500 साधारण और 500 इलेक्ट्रिक बसें खरीदने के निर्देश दिए थे।
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अब बजट की घोषणा के अनुसार साधारण बसों की खरीद के लिए जो टेंडर किए गए हैं वह सितंबर के पहले सप्ताह में खुलेंगे। जो भी खरीद एजेंसी दिलचस्पी दिखाएंगी उसका प्रस्ताव हाईपावर कमेटी में रखा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद बसों की खरीद पूरी होने में करीब 6 माह से अधिक समय लग सकता है। परिवहन मंत्री अनिल विज के अनुसार यात्रियों की सुविधा के लिए बसों की खरीद की घोषणा सरकार ने की थी और उन्हीं योजनाओं पर आगामी कार्य होना है।
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विभाग में अधिकारियों के लगातार तबादले भी एक वजह
राज्य परिवहन विभाग में निदेशक पद पर लंबे समय से अधिकारी टिक नहीं पा रहे हैं। अप्रैल माह में तत्कालीन निदेशक प्रदीप कुमार को सरकार ने निलंबित कर दिया था। इनके स्थान पर अतुल कुमार को अतिरिक्त कार्य सौंपा था। फिर निदेशक पद पर मई माह में डॉ. वीरेंद्र दहिया आए। इनका भी हाल ही में तबादला हो चुका है। कुछ दिन के लिए प्रभजोत को भी जिम्मा मिला। अब निदेशक का जिम्मा धीरेंद्र खड़गटा को मिला है। अधिकारियों के लगातार स्थानांतरण के कारण भी कार्यों में बाधा आ रही है।
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