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Chandigarh-Haryana News: सीसीटीवी की निगरानी में करना होगा आयुष्मान मरीजों का इलाज
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पैनलबद्ध अस्पतालों को आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में भर्ती होने वाले लाभार्थियों को लाइव सीसीटीवी की निगरानी में रखने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही अस्पतालों को यह सीसीटीवी फीड राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के साथ साझा करना होगा ताकि सत्यापन, निगरानी और दावों की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके। यह निर्देश आयुष्मान भारत-हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी हुए थे।
इस फैसले पर डॉक्टरों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आपत्ति जताई है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन ने कहा आईसीयू लाइव वीडियो निगरानी मरीजों की गोपनीयता और मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन हो सकती है। आईसीयू में मरीज गंभीर हालत में होता है, ऐसे में वीडियो रिकॉर्डिंग से डाटा लीक या दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। उधर, कई बार संपर्क करने के बाद भी हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से दावा किया गया कि यह कदम योजना के दुरुपयोग को रोकने और अस्पतालों पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। निर्देश में कहा गया है कि मरीज वेंटिलेटर पर हों या न हों सभी आयुष्मान भारत मरीजों की आईसीयू और एचडीयू में मौजूदगी और इलाज की पुष्टि के लिए कैमरे लगाए जाएं। प्राधिकरण का मानना है कि इससे योजना के गलत उपयोग पर अंकुश लगेगा। नई व्यवस्था से लाभार्थियों को वास्तविक जरूरत के आधार पर ही सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि सीसीटीवी का इंतजाम अस्पतालों को ही करना होगा। हरियाणा में करीब 1.8 करोड़ लोग इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं। योजना के अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
आईएमए की आपत्ति के बाद कहा- कॉरिडोर में लगाएं सीसीटीवी
विवाद बढ़ने पर प्राधिकरण की ओर से प्रेस नोट जारी किया गया कि रोगी देखभाल क्षेत्रों के अंदर किसी भी प्रकार के कैमरे स्थापित नहीं किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरे केवल आईसीयू व एचडीयू के प्रवेश द्वार व कॉरिडार में ही लगाए जाएंगे। किसी भी स्थिति में कैमरे रोगियों की ओर से सीधे नहीं लगाए जाएंगे। रोगियों की गोपनीयता सुरक्षित रखी जाएगी। हालांकि इस पत्र पर विभाग की ओर से कोई हस्ताक्षर नहीं था। इस बारे में जब बात करने की कोशिश की गई तो प्राधिकरण की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।
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चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पैनलबद्ध अस्पतालों को आईसीयू और हाई डिपेंडेंसी यूनिट (एचडीयू) में भर्ती होने वाले लाभार्थियों को लाइव सीसीटीवी की निगरानी में रखने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही अस्पतालों को यह सीसीटीवी फीड राज्य स्वास्थ्य एजेंसी के साथ साझा करना होगा ताकि सत्यापन, निगरानी और दावों की प्रक्रिया सुचारू रूप से हो सके। यह निर्देश आयुष्मान भारत-हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से जारी हुए थे।
इस फैसले पर डॉक्टरों और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) ने आपत्ति जताई है। आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अजय महाजन ने कहा आईसीयू लाइव वीडियो निगरानी मरीजों की गोपनीयता और मेडिकल एथिक्स का उल्लंघन हो सकती है। आईसीयू में मरीज गंभीर हालत में होता है, ऐसे में वीडियो रिकॉर्डिंग से डाटा लीक या दुरुपयोग का खतरा बढ़ जाता है। उधर, कई बार संपर्क करने के बाद भी हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से कोई अधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
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हरियाणा स्वास्थ्य संरक्षण प्राधिकरण की ओर से दावा किया गया कि यह कदम योजना के दुरुपयोग को रोकने और अस्पतालों पर बेहतर निगरानी सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। निर्देश में कहा गया है कि मरीज वेंटिलेटर पर हों या न हों सभी आयुष्मान भारत मरीजों की आईसीयू और एचडीयू में मौजूदगी और इलाज की पुष्टि के लिए कैमरे लगाए जाएं। प्राधिकरण का मानना है कि इससे योजना के गलत उपयोग पर अंकुश लगेगा। नई व्यवस्था से लाभार्थियों को वास्तविक जरूरत के आधार पर ही सुविधाएं मिलेंगी। हालांकि सीसीटीवी का इंतजाम अस्पतालों को ही करना होगा। हरियाणा में करीब 1.8 करोड़ लोग इस स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत पंजीकृत हैं। योजना के अंतर्गत गरीब और जरूरतमंद परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है।
आईएमए की आपत्ति के बाद कहा- कॉरिडोर में लगाएं सीसीटीवी
विवाद बढ़ने पर प्राधिकरण की ओर से प्रेस नोट जारी किया गया कि रोगी देखभाल क्षेत्रों के अंदर किसी भी प्रकार के कैमरे स्थापित नहीं किए जाएंगे। सीसीटीवी कैमरे केवल आईसीयू व एचडीयू के प्रवेश द्वार व कॉरिडार में ही लगाए जाएंगे। किसी भी स्थिति में कैमरे रोगियों की ओर से सीधे नहीं लगाए जाएंगे। रोगियों की गोपनीयता सुरक्षित रखी जाएगी। हालांकि इस पत्र पर विभाग की ओर से कोई हस्ताक्षर नहीं था। इस बारे में जब बात करने की कोशिश की गई तो प्राधिकरण की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई।