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बंधुआ मजदूरी पर सख्ती: बिना वारंट गिरफ्तारी, 24 घंटे में बचाव अभियान; पहली बार हर कार्रवाई की समय सीमा तय
Mon, 03 Aug 2026 12:52 PM IST
Nivedita
कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़
कुलदीप शुक्ला, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Mon, 03 Aug 2026 12:52 PM IST
सार
श्रम विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करते हुए शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर बचाव अभियान, 48 घंटे में रिहाई प्रमाणपत्र और सात दिन के भीतर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
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बंधुआ मजदूरी
- फोटो : PTI
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विस्तार
हरियाणा में पहली बार बंधुआ मजदूरी के मामलों में बचाव अभियान से लेकर एफआईआर, रिहाई प्रमाणपत्र, आर्थिक सहायता और न्यायिक कार्रवाई तक के लिए स्पष्ट समयसीमा तय कर दी गई है।
श्रम विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करते हुए शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर बचाव अभियान, 48 घंटे में रिहाई प्रमाणपत्र और सात दिन के भीतर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साक्ष्य के आधार पर जरूरत पड़ने पर पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी भी कर सकेगी।
नई एसओपी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप लागू की गई है। इसके तहत शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस को सूचना गोपनीय रखते हुए संयुक्त अभियान चलाना होगा। बचाए गए मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी की जाएगी। यदि प्रथम दृष्टया मामला बंधुआ मजदूरी का पाया जाता है तो 48 घंटे के भीतर रिहाई प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद पीड़ित का आधार और बैंक खाता सुनिश्चित कर एक सप्ताह के भीतर डीबीटी के जरिए तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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श्रम विभाग ने नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करते हुए शिकायत मिलने पर 24 घंटे के भीतर बचाव अभियान, 48 घंटे में रिहाई प्रमाणपत्र और सात दिन के भीतर प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। साक्ष्य के आधार पर जरूरत पड़ने पर पुलिस बिना वारंट गिरफ्तारी भी कर सकेगी।
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नई एसओपी श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के निर्देशों के अनुरूप लागू की गई है। इसके तहत शिकायत मिलते ही जिला प्रशासन और पुलिस को सूचना गोपनीय रखते हुए संयुक्त अभियान चलाना होगा। बचाए गए मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर ले जाकर 24 घंटे के भीतर प्रारंभिक जांच पूरी की जाएगी। यदि प्रथम दृष्टया मामला बंधुआ मजदूरी का पाया जाता है तो 48 घंटे के भीतर रिहाई प्रमाणपत्र जारी करना अनिवार्य होगा। इसके बाद पीड़ित का आधार और बैंक खाता सुनिश्चित कर एक सप्ताह के भीतर डीबीटी के जरिए तत्काल आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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साक्ष्य जब्त कर पुलिस कर सकेगी बिना वारंट गिरफ्तारी
एसओपी के अनुसार पुलिस मोबाइल फोन, वेतन रजिस्टर, बही-खाते, बैंक रिकॉर्ड और बंधुआ मजदूरी से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त करेगी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत आवश्यक होने पर आरोपियों को बिना वारंट गिरफ्तार भी किया जा सकेगा।
24 घंटे में एफआईआर, तीन महीने में निस्तारण का लक्ष्य
नई व्यवस्था में बचाव अभियान के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने, एक सप्ताह के भीतर न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने और तीन महीने के भीतर मामले का निस्तारण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पीड़ितों के पुनर्वास, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
86 मामले लंबित, 19 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त
प्रदेश में फिलहाल बंधुआ मजदूरी से जुड़े 86 मामले लंबित हैं। इनमें अधिकांश मामले ईंट-भट्ठों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े हैं। कार्रवाई में तेजी लाने के लिए जून 2026 में श्रम विभाग ने 19 जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है।
एसओपी के अनुसार पुलिस मोबाइल फोन, वेतन रजिस्टर, बही-खाते, बैंक रिकॉर्ड और बंधुआ मजदूरी से जुड़े अन्य दस्तावेज जब्त करेगी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के प्रावधानों के तहत आवश्यक होने पर आरोपियों को बिना वारंट गिरफ्तार भी किया जा सकेगा।
24 घंटे में एफआईआर, तीन महीने में निस्तारण का लक्ष्य
नई व्यवस्था में बचाव अभियान के 24 घंटे के भीतर एफआईआर दर्ज करने, एक सप्ताह के भीतर न्यायिक प्रक्रिया शुरू करने और तीन महीने के भीतर मामले का निस्तारण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पीड़ितों के पुनर्वास, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की जिम्मेदारी भी जिला प्रशासन को सौंपी गई है।
86 मामले लंबित, 19 जिलों में नोडल अधिकारी नियुक्त
प्रदेश में फिलहाल बंधुआ मजदूरी से जुड़े 86 मामले लंबित हैं। इनमें अधिकांश मामले ईंट-भट्ठों और औद्योगिक इकाइयों से जुड़े हैं। कार्रवाई में तेजी लाने के लिए जून 2026 में श्रम विभाग ने 19 जिलों में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की है।
सोनीपत में सबसे ज्यादा मामले
श्रम आयुक्त के अनुसार सबसे अधिक 10 मामले सोनीपत में लंबित हैं। इसके बाद पलवल (9), यमुनानगर (8), फरीदाबाद और पानीपत (7-7), अंबाला और पंचकूला (5-5), नूंह, झज्जर, कैथल और जींद (4-4), महेंद्रगढ़, कुरुक्षेत्र और हिसार (3-3), रेवाड़ी और करनाल (2-2), जबकि भिवानी और सिरसा में एक-एक मामला लंबित है।
सात विभाग मिलकर करेंगे कार्रवाई
बंधुआ मजदूरी की शिकायत मिलने पर उपायुक्त की अगुवाई में श्रम, पुलिस, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संयुक्त कार्रवाई करेंगे। टीम पीड़ितों को मुक्त कराएगी, एफआईआर दर्ज कराएगी, पहचान सत्यापित करेगी और पुनर्वास व सरकारी सहायता सुनिश्चित करेगी।
पहले क्या व्यवस्था थी?
पहले भी बंधुआ मजदूरों के बचाव, पुनर्वास और मुकदमा दर्ज करने के प्रावधान थे लेकिन किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा तय नहीं थी। नई एसओपी में पहली बार हर चरण के लिए निर्धारित समय सीमा तय कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
हरियाणा में बंधुआ मजदूरी जैसे अभिशाप को जड़ से खत्म करने के लिए नियमों को और सख्त बनाया गया है। प्रत्येक संबंधित जिले में नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्हें लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के भी निर्देश दिए गए हैं। - अनिल विज, श्रम मंत्री, हरियाणा
श्रम आयुक्त के अनुसार सबसे अधिक 10 मामले सोनीपत में लंबित हैं। इसके बाद पलवल (9), यमुनानगर (8), फरीदाबाद और पानीपत (7-7), अंबाला और पंचकूला (5-5), नूंह, झज्जर, कैथल और जींद (4-4), महेंद्रगढ़, कुरुक्षेत्र और हिसार (3-3), रेवाड़ी और करनाल (2-2), जबकि भिवानी और सिरसा में एक-एक मामला लंबित है।
सात विभाग मिलकर करेंगे कार्रवाई
बंधुआ मजदूरी की शिकायत मिलने पर उपायुक्त की अगुवाई में श्रम, पुलिस, राजस्व, महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण, स्वास्थ्य विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण संयुक्त कार्रवाई करेंगे। टीम पीड़ितों को मुक्त कराएगी, एफआईआर दर्ज कराएगी, पहचान सत्यापित करेगी और पुनर्वास व सरकारी सहायता सुनिश्चित करेगी।
पहले क्या व्यवस्था थी?
पहले भी बंधुआ मजदूरों के बचाव, पुनर्वास और मुकदमा दर्ज करने के प्रावधान थे लेकिन किसी भी कार्रवाई के लिए स्पष्ट समयसीमा तय नहीं थी। नई एसओपी में पहली बार हर चरण के लिए निर्धारित समय सीमा तय कर जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
हरियाणा में बंधुआ मजदूरी जैसे अभिशाप को जड़ से खत्म करने के लिए नियमों को और सख्त बनाया गया है। प्रत्येक संबंधित जिले में नोडल अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्हें लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के भी निर्देश दिए गए हैं। - अनिल विज, श्रम मंत्री, हरियाणा