हरियाणा पुलिस के तीन जांबाज: जहां फेल हो जाती हैं मशीनें वहां बोल्ट, रैंबो और रोमियो सूंघ लेते हैं सुराग
स्निफर डॉग्स पुलिस के लिए सबसे भरोसेमंद कड़ी साबित हो रहे हैं। कई मामलों में डॉग्स के संकेत मिलने के बाद ही पुलिस को ऐसे ठिकानों तक पहुंचने में सफलता मिली, जहां सामान्य तलाशी से कुछ भी मिल पाना मुश्किल था।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नशा तस्कर अब सिर्फ पुलिस से नहीं, बल्कि उन चार पैरों वाले जवानों बोल्ट, रैंबो और रोमियों से भी डरने लगे हैं जिनकी सूंघने की क्षमता उनके हर नए हथकंडे पर भारी पड़ रही है। वाहन की गुप्त बॉडी, खेत की मिट्टी, मकान की दीवार, गोदाम का कोना या सामान के बीच छिपाकर रखे गए मादक पदार्थ. जहां इंसानी नजर और कई बार तकनीक भी चूक जाती है, वहां हरियाणा पुलिस के प्रशिक्षित स्निफर डॉग सटीक इशारा कर देते हैं।
यही वजह है कि वर्ष 2026 की पहली छमाही में हरियाणा राज्य नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एचएसएनसीबी) और जिला पुलिस की संयुक्त टीमों ने स्निफर डॉग्स की मदद से 48 एनडीपीएस मामलों का सफल खुलासा किया। इन अभियानों में चिट्टा (हेरोइन), स्मैक, गांजा, चरस, अफीम, डोडा पोस्त और चूरा पोस्त जैसी बड़ी मात्रा में नशीले पदार्थ बरामद किए गए।
इस दौरान सबसे अधिक चर्चा तीन स्निफर डॉग्स बोल्ट, रैम्बो और रोमियो की रही है। बोल्ट ने 15, रैंबो ने 14 और रोमियो ने 12 अभियानों में अहम भूमिका निभाई हैं। रैंबो की सहायता से आदमपुर में 5 क्विंटल 50 किलो 300 ग्राम डोडा पोस्त की बरामदगी हुई, जो इस अवधि का सबसे बड़ा एक्शन है।
तस्करों के बदलते तरीके
नशा तस्करी का नेटवर्क लगातार अपने तरीके बदल रहा है। कभी वाहन की सीटों के नीचे गुप्त चैंबर बनाए जाते हैं तो कभी खेतों या गोदामों में नशीले पदार्थ छिपाए जाते हैं। ऐसे मामलों में स्निफर डॉग्स पुलिस के लिए सबसे भरोसेमंद कड़ी साबित हो रहे हैं। कई मामलों में डॉग्स के संकेत मिलने के बाद ही पुलिस को ऐसे ठिकानों तक पहुंचने में सफलता मिली, जहां सामान्य तलाशी से कुछ भी मिल पाना मुश्किल था।
कई जिलों में बड़ी कार्रवाई
पहले छह महीनों में हिसार, फतेहाबाद, सिरसा (डबवाली), गुरुग्राम, फरीदाबाद, भिवानी, कुरुक्षेत्र और हिसार जीआरपी सहित कई जिलों में संयुक्त अभियान चलाए गए। प्रमुख बरामदगियों में आदमपुर से 5.50 क्विंटल से अधिक डोडा पोस्त, फतेहाबाद से 10.160 किलोग्राम डोडा पोस्त तथा फरीदाबाद से गांजा, डोडा पोस्त, चरस और अन्य मादक पदार्थों की कई बड़ी खेप शामिल हैं।
इन सफलताओं के पीछे केवल स्निफर डॉग्स की सूंघने की क्षमता ही नहीं, बल्कि उनके हैंडलर्स की महीनों की मेहनत भी है। सिपाही अनिल, सुनील, रीत, प्रदीप, विकास और रविंदर ने अपने-अपने डॉग्स के साथ ऐसा तालमेल विकसित किया है कि ऑपरेशन के दौरान बिना किसी भ्रम के संकेतों को समझकर कार्रवाई की जा सके। ब्रिगेडियर (सेवानिवृत्त) संदीप सिंह कश्यप के अनुसार प्रत्येक स्निफर डॉग और उसके हैंडलर को वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षित किया जाता है।