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657 करोड़ का गबन: CBI ने दाखिल की दो चार्जशीट, आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से शेल कंपनियों में किया गया है ट्रांफसर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 13 Jun 2026 11:25 AM IST
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सार
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से सरकारी फंड को फर्जी लेन-देन के जरिए शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। इस घोटाले में हरियाणा सरकार को 504 करोड़ रुपये और सीएससीएल को 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
आईडीएफसी बैंक
- फोटो : फाइल
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विस्तार
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड (सीएससीएल) के फंड में हुए कुल 657 करोड़ रुपये के गबन के मामले में दो अलग-अलग चार्जशीट दाखिल की हैं।
अधिकारियों के मुताबिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से सरकारी फंड को फर्जी लेन-देन के जरिए शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। इस घोटाले में हरियाणा सरकार को 504 करोड़ रुपये और सीएससीएल को 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामले में सीबीआई ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया है। इससे पहले एजेंसी इस मामले में 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल थे।
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चार्जशीट में आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार मामलों में कई स्तरों पर वित्तीय अनियमितताएं और प्रक्रियागत उल्लंघन पाए गए हैं।
सीबीआई ने ये मामले अन्य एजेंसियों से अपने अधीन लिए थे। हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से ली गई थी, जबकि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट से जुड़े मामलों की जांच चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से अपने हाथ में ली गई। जांच एजेंसी के अनुसार हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में सरकारी खजाने को लगभग 504 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन से संबंधित मामलों में करीब 153 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि सामने आई है। दोनों मामलों में कुल 657 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।
अधिकारियों के मुताबिक आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से सरकारी फंड को फर्जी लेन-देन के जरिए शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर किया गया था। इस घोटाले में हरियाणा सरकार को 504 करोड़ रुपये और सीएससीएल को 153 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सीबीआई का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले समय में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।
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हरियाणा सरकार के फंड के दुरुपयोग से जुड़े मामले में सीबीआई ने पंचकूला स्थित विशेष सीबीआई अदालत में दूसरी चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में दो निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है, जिन्हें अपराध से अर्जित धन का लाभार्थी बताया गया है। इससे पहले एजेंसी इस मामले में 15 आरोपियों और संस्थाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। इनमें तीन सरकारी कर्मचारी, छह बैंक अधिकारी, दो कंपनियां और चार निजी व्यक्ति शामिल थे।
पहली चार्जशीट चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में दायर
वहीं, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड से जुड़े मामले में पहली चार्जशीट चंडीगढ़ की विशेष सीबीआई अदालत में दायर की गई है। इसमें सात आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें पांच बैंक अधिकारी, सीएससीएल का एक अधिकारी और एक निजी व्यक्ति शामिल हैं। सीबीआई के अनुसार प्रारंभिक जांच में इन सभी की भूमिका सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं में सामने आई है।चार्जशीट में आरोपियों पर आपराधिक साजिश, आपराधिक विश्वासघात, जालसाजी और धोखाधड़ी समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। साथ ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गई हैं। जांच एजेंसी के अनुसार मामलों में कई स्तरों पर वित्तीय अनियमितताएं और प्रक्रियागत उल्लंघन पाए गए हैं।
सीबीआई ने ये मामले अन्य एजेंसियों से अपने अधीन लिए थे। हरियाणा सरकार से जुड़े मामले की जांच हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से ली गई थी, जबकि चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट से जुड़े मामलों की जांच चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) से अपने हाथ में ली गई। जांच एजेंसी के अनुसार हरियाणा सरकार से जुड़े मामले में सरकारी खजाने को लगभग 504 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि चंडीगढ़ प्रशासन से संबंधित मामलों में करीब 153 करोड़ रुपये की वित्तीय हानि सामने आई है। दोनों मामलों में कुल 657 करोड़ रुपये से अधिक की राशि के गबन और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।