{"_id":"6abe126f1a9a9448e509ad28","slug":"haryana-bijli-nigam-petition-to-recover-1-134-crore-dismissed-consumers-not-bear-burden-of-negligence-2026-10-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा में बिजली निगमों को झटका: 1134 करोड़ वसूलने की याचिका खारिज, लापरवाही का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा में बिजली निगमों को झटका: 1134 करोड़ वसूलने की याचिका खारिज, लापरवाही का बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं
Thu, 01 Oct 2026 01:28 PM IST
Nivedita
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Thu, 01 Oct 2026 01:28 PM IST
सार
र्व मंत्री एवं इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने बताया कि नवंबर 2025 की एफएसए राशि निर्धारित समय में उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में नहीं जोड़ी गई थी।
विज्ञापन
electric bill
- फोटो : istock
विस्तार
हरियाणा विद्युत नियामक आयोग ने उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम और दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम की नवंबर 2025 की 1,134.54 करोड़ रुपये की फ्यूल सरचार्ज एडजस्टमेंट (एफएसए) राशि वसूलने की याचिका खारिज कर दी है। पूर्व मंत्री एवं इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने इसे बिजली उपभोक्ताओं के हित में फैसला बताया है।
विज्ञापन
संपत सिंह के अनुसार, नवंबर 2025 की एफएसए राशि निर्धारित समय में उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में नहीं जोड़ी गई थी। नियमों के मुताबिक समय पर वसूली नहीं होने के कारण जनवरी 2026 में यह राशि जब्त हो गई थी। इसके बावजूद दोनों बिजली निगमों ने इसकी दोबारा वसूली की अनुमति मांगी थी। उन्होंने आयोग के समक्ष इस पर आपत्ति दर्ज कराई थी।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि निगमों की देरी या प्रशासनिक लापरवाही का आर्थिक बोझ उपभोक्ताओं पर नहीं डाला जा सकता। आयोग द्वारा दोबारा वसूली की अनुमति नहीं देना इसी सिद्धांत को मजबूत करता है।
विज्ञापन
संपत सिंह ने आरोप लगाया कि वर्ष 2021 से उपभोक्ताओं को मिलने वाले कई नकारात्मक एफएसए समायोजनों का लाभ भी नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2027-28 की अनुमानित वार्षिक राजस्व प्राप्तियों पर होने वाली सुनवाई में वे इस मुद्दे को उठाएंगे।
उन्होंने फिक्स्ड चार्ज, बढ़ते बिजली शुल्क और नगर निकायों के टैक्स से घरों व छोटे कारोबारों पर पड़ रहे अतिरिक्त बोझ की समीक्षा की मांग भी की। उन्होंने कहा कि बिजली दरों से जुड़ी आगामी नियामकीय प्रक्रियाओं पर नजर रखी जाएगी और उपभोक्ताओं के हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा।