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हरियाणा मानवाधिकार आयोग का निर्देश: सरकार हर जिले में शव वाहन की व्यवस्था अनिवार्य करे, मांगी रिपोर्ट
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: Nivedita
Updated Sat, 02 May 2026 11:23 AM IST
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सार
आयोग ने यह कार्रवाई फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में एक महिला की मृत्यु के बाद आर्थिक तंगी के चलते परिजनों द्वारा शव को मोटर चालित ठेले पर ले जाने की घटना के बाद की है।
हरियाणा मानवाधिकार आयोग
- फोटो : फाइल
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विस्तार
हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने मृतकों की गरिमा और उनके परिजनों के अधिकारों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने राज्य के स्वास्थ्य और प्रशासनिक तंत्र को निर्देश देते हुए हर जिले में शव वाहन की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने और इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
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आयोग ने यह कार्रवाई फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में एक महिला की मृत्यु के बाद आर्थिक तंगी के चलते परिजनों द्वारा शव को मोटर चालित ठेले पर ले जाने की घटना के बाद की है। आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले को गंभीर मानवीय और प्रशासनिक चूक बताया।
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अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा, सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार मृत्यु के बाद भी गरिमा के साथ जुड़ा है। आयोग ने कहा कि यह घटना सिस्टम की कमी को उजागर करती है, जहां गरीब परिवारों को बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिल पातीं।
आयोग ने राज्य सरकार को गरीबों के लिए निःशुल्क शव परिवहन नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पतालों में शव वाहन सेवा की जानकारी स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करने, स्टाफ को संवेदनशील बनाने और हर जिले में कम से कम एक कार्यशील शव वाहन उपलब्ध कराने को कहा गया है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि फरीदाबाद अस्पताल में रेड क्रॉस के जरिए शव वाहन उपलब्ध था, लेकिन जागरूकता की कमी से परिजन इसका लाभ नहीं ले सके। आयोग ने मृतशालाओं के बाहर पुलिस सुरक्षा बढ़ाने और आधुनिक कोल्ड रूम स्थापित करने पर भी जोर दिया है।
सभी सिविल सर्जनों को 13 अगस्त 2026 से पहले अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की मृत्यु के बाद उसकी गरिमा आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।
