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Chandigarh-Haryana News: गरीबों के लिए निशुल्क शव वाहन नीति बनाने के निर्देश
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ठेले पर शव ले जाने की घटना पर मानवाधिकार आयोग सख्त
अस्पतालों में सुविधाओं और जागरूकता की कमी पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एक संवेदनशील मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के स्वास्थ्य व प्रशासनिक तंत्र को मृतकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य सरकार को गरीबों के लिए निशुल्क शव परिवहन की समग्र नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने अस्पताल स्टाफ को संवेदनशील बनाने, सभी स्वास्थ्य संस्थानों में शव वाहन की जानकारी प्रदर्शित करने और प्रत्येक जिले में कम से कम एक शव वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही शवगृहों के बाहर पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया ताकि किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
मामला 30 जनवरी 2026 का है जिसमें फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में 35 वर्षीय अनुराधा की मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा आर्थिक तंगी के चलते शव को मोटर चलित ठेले पर घर ले जाने की घटना सामने आई थी। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा व सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने इसे मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली घटना बताते हुए 2 फरवरी को आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार मृत्यु के बाद भी गरिमा के अधिकार को समाहित करता है। चार अप्रैल को हुई सुनवाई में अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर सामने आया कि फरीदाबाद सिविल अस्पताल में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से निशुल्क शव वाहन उपलब्ध है लेकिन जागरूकता की कमी के कारण परिजन इसका लाभ नहीं उठा सके। आयोग ने सभी सिविल सर्जनों से 13 अगस्त 2026 की सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की मृत्यु के बाद उसकी गरिमा आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं हो सकती।
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अस्पतालों में सुविधाओं और जागरूकता की कमी पर उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एक संवेदनशील मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के स्वास्थ्य व प्रशासनिक तंत्र को मृतकों की गरिमा सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने राज्य सरकार को गरीबों के लिए निशुल्क शव परिवहन की समग्र नीति बनाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने अस्पताल स्टाफ को संवेदनशील बनाने, सभी स्वास्थ्य संस्थानों में शव वाहन की जानकारी प्रदर्शित करने और प्रत्येक जिले में कम से कम एक शव वाहन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। साथ ही शवगृहों के बाहर पुलिस सुरक्षा सुनिश्चित करने को भी कहा गया ताकि किसी प्रकार की अवैध गतिविधियों को रोका जा सके।
मामला 30 जनवरी 2026 का है जिसमें फरीदाबाद के बादशाह खान सिविल अस्पताल में 35 वर्षीय अनुराधा की मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा आर्थिक तंगी के चलते शव को मोटर चलित ठेले पर घर ले जाने की घटना सामने आई थी। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा व सदस्यों कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पूर्ण पीठ ने इसे मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाली घटना बताते हुए 2 फरवरी को आदेश जारी किया। आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन का अधिकार मृत्यु के बाद भी गरिमा के अधिकार को समाहित करता है। चार अप्रैल को हुई सुनवाई में अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर सामने आया कि फरीदाबाद सिविल अस्पताल में रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से निशुल्क शव वाहन उपलब्ध है लेकिन जागरूकता की कमी के कारण परिजन इसका लाभ नहीं उठा सके। आयोग ने सभी सिविल सर्जनों से 13 अगस्त 2026 की सुनवाई से पहले विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी नागरिक की मृत्यु के बाद उसकी गरिमा आर्थिक स्थिति पर निर्भर नहीं हो सकती।
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