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Chandigarh-Haryana News: पुलिस ने एक साल में 17 हजार से अधिक बिछड़ों को अपनों से मिलाया

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एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों ने मानव तस्करी, गुमशुदगी, बाल श्रम व भिक्षावृत्ति के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। राज्य पुलिस ने एक वर्ष में मानवीयता, संवेदनशीलता और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की है जिसने कानून के साथ-साथ करुणा का भी भरोसा मजबूत किया है। प्रदेशभर में चलाए गए अभियानों के दौरान पुलिस ने 17000 से अधिक बिछड़े लोगों को उनके परिवारों से मिलवाकर हजारों सूने घरों में फिर से खुशियां लौटा दीं।

पिछले एक वर्ष में हरियाणा पुलिस ने 13,529 वयस्कों को उनके परिजनों से मिलवाया है। इनमें 4130 पुरुष और 9399 महिलाएं शामिल हैं। वहीं, 3122 नाबालिगों को सुरक्षित उनके माता-पिता तक पहुंचाया गया जिनमें 1113 लड़के और 2,009 लड़कियां शामिल रहीं। इसके अतिरिक्त पुलिस ने 184 भीख मांगने को मजबूर बच्चों का पुनर्वास कराया और 191 बाल मजदूरों को शोषण से मुक्त करवाकर नई राह दिखाई।
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स्टेट क्राइम ब्रांच की 22 एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिटों (एएचटीयू) ने मानव तस्करी, गुमशुदगी, बाल श्रम और भिक्षावृत्ति के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की। इन यूनिटों ने 700 वयस्कों और 538 नाबालिगों को उनके परिवारों से मिलवाया है। साथ ही 1,473 बच्चों को भीख मांगने की मजबूरी से बाहर निकालकर सुरक्षित किया जबकि 2,313 बाल मजदूरों को मजदूरी की बेड़ियों से आजादी दिलाई।

पिछले वर्ष मार्च में चलाए गए ऑपरेशन मुस्कान के तहत जिला पुलिस और एएचटीयू ने मिलकर 1798 लोगों को उनके अपनों से मिलवाया। अभियान के दौरान 437 शेल्टर होम्स की जांच, 563 बच्चों का रेस्क्यू और 890 बाल मजदूरों की मुक्ति सुनिश्चित की गई।
पुलिस महानिदेशक अजय सिंघल ने गुमशुदा लोगों की तलाश को और प्रभावी बनाने के लिए स्टेट क्राइम ब्रांच के विशेष सेल को सशक्त करने के निर्देश दिए हैं। आधुनिक तकनीक, उच्च गुणवत्ता की तस्वीरें, सक्रिय एएचटीयू और स्पष्ट जवाबदेही के साथ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि जब वर्दी में संवेदना होती है तो कानून सिर्फ सख्त नहीं बल्कि सहारा भी बनता है।



25 साल बाद बेटी व 22 साल बाद बेटे की घर वापसी
यमुनानगर एएचटीयू की संवेदनशीलता से 25 साल बाद दुर्गा देवी की घर वापसी संभव हो सकी। बचपन की एक धुंधली याद के सहारे पुलिस ने महाराष्ट्र के भंडारा जिले में परिवार को खोज निकाला। वहीं पंचकूला एएचटीयू ने केवल कुछ यादों के आधार पर 22 साल बाद बेटे अमित को उसकी मां से मिलवाया जो भरोसे और धैर्य की अनूठी मिसाल है।



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