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जब्त की गई पुरानी करंसी के बदले नए नोट जारी करे आरबीआई : हाईकोर्ट
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- सीबीआई और आयकर विभाग से क्लीन चिट के बावजूद फंसी हुई थी करेंसी
- नोटबंदी के बाद प्रक्रियाओं में उलझी पुरानी करेंसी को बदलने का रास्ता साफ
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने नोटबंदी के बाद वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी पुरानी करंसी को नई करंसी में बदलने का रास्ता साफ कर दिया है। हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश दिए है कि वह 14.15 लाख रुपये की जब्त और बाद में रिलीज की गई पुरानी करंसी को चार सप्ताह में नई करंसी में बदलकर दे।
जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति की राशि को सरकारी एजेंसियां जांच के बाद वैध मानकर वापस कर चुकी हैं तो उसे केवल इस आधार पर बेकार नहीं छोड़ा जा सकता कि वह पुरानी करंसी में है। याचिकाकर्ता के मामले में राशि पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जब्त की गई थी और बाद में आयकर विभाग ने भी जांच के दायरे में ले लिया।
विस्तृत जांच के बाद आयकर विभाग ने 17 जुलाई 2025 के आदेश के तहत पूरी राशि को वैध मानते हुए रिलीज करने का निर्देश दिया है। इसके बाद 30 जुलाई 2025 को पंचनामा के जरिए 14,15,000 रुपये याचिकाकर्ता को लौटा दिए। हालांकि, समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। नोटबंदी के बाद बंद हो चुकी पुरानी करंसी होने के कारण यह रकम व्यवहार में उपयोग के योग्य नहीं रही। याचिकाकर्ता ने कई बार आरबीआई से संपर्क किया लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अंततः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान आरबीआई ने केंद्र सरकार की 12 मई 2017 की अधिसूचना का हवाला दिया। इसमें प्रावधान है कि किसी भी एजेंसी की ओर से जब्त या जब्ती के बाद लौटाई गई पुरानी करंसी को, यदि उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है तो नई करेंसी में बदला जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में सभी शर्तें पूरी हो चुकी हैं राशि जब्त हुई, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा गया और फिर वैधानिक रूप से वापस भी कर दी गई। ऐसे में आरबीआई की ओर से एक्सचेंज से इनकार करने का कोई आधार नहीं बनता। यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि नोटबंदी के बाद लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।
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- नोटबंदी के बाद प्रक्रियाओं में उलझी पुरानी करेंसी को बदलने का रास्ता साफ
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने नोटबंदी के बाद वर्षों तक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उलझी पुरानी करंसी को नई करंसी में बदलने का रास्ता साफ कर दिया है। हाईकोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक को निर्देश दिए है कि वह 14.15 लाख रुपये की जब्त और बाद में रिलीज की गई पुरानी करंसी को चार सप्ताह में नई करंसी में बदलकर दे।
जस्टिस जगमोहन बंसल की पीठ ने स्पष्ट किया कि जब किसी व्यक्ति की राशि को सरकारी एजेंसियां जांच के बाद वैध मानकर वापस कर चुकी हैं तो उसे केवल इस आधार पर बेकार नहीं छोड़ा जा सकता कि वह पुरानी करंसी में है। याचिकाकर्ता के मामले में राशि पहले केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो की ओर से जब्त की गई थी और बाद में आयकर विभाग ने भी जांच के दायरे में ले लिया।
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विस्तृत जांच के बाद आयकर विभाग ने 17 जुलाई 2025 के आदेश के तहत पूरी राशि को वैध मानते हुए रिलीज करने का निर्देश दिया है। इसके बाद 30 जुलाई 2025 को पंचनामा के जरिए 14,15,000 रुपये याचिकाकर्ता को लौटा दिए। हालांकि, समस्या यहीं खत्म नहीं हुई। नोटबंदी के बाद बंद हो चुकी पुरानी करंसी होने के कारण यह रकम व्यवहार में उपयोग के योग्य नहीं रही। याचिकाकर्ता ने कई बार आरबीआई से संपर्क किया लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। अंततः हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सुनवाई के दौरान आरबीआई ने केंद्र सरकार की 12 मई 2017 की अधिसूचना का हवाला दिया। इसमें प्रावधान है कि किसी भी एजेंसी की ओर से जब्त या जब्ती के बाद लौटाई गई पुरानी करंसी को, यदि उसका पूरा रिकॉर्ड मौजूद है तो नई करेंसी में बदला जा सकता है। कोर्ट ने पाया कि इस मामले में सभी शर्तें पूरी हो चुकी हैं राशि जब्त हुई, उसका पूरा रिकॉर्ड रखा गया और फिर वैधानिक रूप से वापस भी कर दी गई। ऐसे में आरबीआई की ओर से एक्सचेंज से इनकार करने का कोई आधार नहीं बनता। यह फैसला न केवल याचिकाकर्ता के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि नोटबंदी के बाद लंबे समय से लंबित ऐसे मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण नजीर बन सकता है।