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महिला आरक्षण पर क्यों भड़के खरगे?: परिसीमन को लेकर भी लगाए कई आरोप, कहा- चुनावी फायदा लेना चाहती है सरकार
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Fri, 10 Apr 2026 08:23 PM IST
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सार
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महिला आरक्षण और परिसीमन को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार जल्दबाजी में संशोधन बिल लाकर चुनावी फायदा लेना चाहती है। खरगे ने इसे मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन बताया और कहा कि इससे चुनावी व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। आइए, विस्तार से मामले को समझते हैं।
मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
महिला आरक्षण कानून और परिसीमन को लेकर देश की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सरकार का यह कदम चुनावी फायदा लेने के लिए उठाया जा रहा है और इसके “गंभीर परिणाम” हो सकते हैं। उन्होंने साफ कहा कि इस मुद्दे पर बिना गहराई से चर्चा किए कोई भी फैसला देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
खरगे ने कहा कि सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जिसका मकसद महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़ा संशोधन बिल जल्दबाजी में पास करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई है और सभी दलों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाने की बात कही है।
क्या महिला आरक्षण लागू करने के पीछे राजनीतिक फायदा है?
खरगे ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने की बात कर रही है, लेकिन इसके पीछे चुनावी लाभ लेने की मंशा छिपी है। उनका आरोप है कि सरकार आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
ये भी पढ़ें- यमुना में भयानक हादसा: 10 लोगों की मौत, 12 घायल और पांच लापता; मोटर बोट बन गई काल; देखें तस्वीरें
क्या लोकसभा सीटें बढ़ाने की योजना से बदलेगा समीकरण?
खरगे के मुताबिक सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है। साथ ही राज्यों की विधानसभा सीटों में भी बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह का परिसीमन देश के चुनावी ढांचे को पूरी तरह बदल सकता है और इसके दूरगामी असर होंगे।
क्या विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया गया?
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है।
क्या लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ेगा?
खरगे ने कहा कि इस तरह के फैसले लोकतंत्र को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस हमेशा से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के पक्ष में रही है और पंचायत से लेकर शहरी निकायों तक आरक्षण की पहल उसी ने की थी।
खरगे ने कहा कि अब विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के खिलाफ रणनीति बनाएगा और संसद में इस पर जोरदार तरीके से अपनी बात रखेगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कानून का मामला नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा बड़ा सवाल है।
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खरगे ने कहा कि सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुला रही है, जिसका मकसद महिला आरक्षण कानून को लागू करने से जुड़ा संशोधन बिल जल्दबाजी में पास करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट का उल्लंघन है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस पर आपत्ति जताई है और सभी दलों के साथ मिलकर संयुक्त रणनीति बनाने की बात कही है।
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क्या महिला आरक्षण लागू करने के पीछे राजनीतिक फायदा है?
खरगे ने कहा कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने की बात कर रही है, लेकिन इसके पीछे चुनावी लाभ लेने की मंशा छिपी है। उनका आरोप है कि सरकार आने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर इस मुद्दे को तेजी से आगे बढ़ा रही है, ताकि इसका राजनीतिक फायदा उठाया जा सके।
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क्या लोकसभा सीटें बढ़ाने की योजना से बदलेगा समीकरण?
खरगे के मुताबिक सरकार लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने की योजना बना रही है। साथ ही राज्यों की विधानसभा सीटों में भी बढ़ोतरी की बात कही जा रही है। उनका कहना है कि इस तरह का परिसीमन देश के चुनावी ढांचे को पूरी तरह बदल सकता है और इसके दूरगामी असर होंगे।
क्या विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया गया?
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मुद्दे पर विपक्ष को भरोसे में नहीं लिया। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने संसदीय कार्य मंत्री से अनुरोध किया था कि पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद सर्वदलीय बैठक बुलाई जाए, लेकिन सरकार ने इसे नजरअंदाज कर दिया और अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी है।
क्या लोकतंत्र और चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ेगा?
खरगे ने कहा कि इस तरह के फैसले लोकतंत्र को कमजोर कर सकते हैं। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि वह इन मुद्दों पर ध्यान नहीं दे रहा है। साथ ही उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस हमेशा से महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के पक्ष में रही है और पंचायत से लेकर शहरी निकायों तक आरक्षण की पहल उसी ने की थी।
खरगे ने कहा कि अब विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार के खिलाफ रणनीति बनाएगा और संसद में इस पर जोरदार तरीके से अपनी बात रखेगा। उनका कहना है कि यह सिर्फ एक कानून का मामला नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे से जुड़ा बड़ा सवाल है।
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