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Chandigarh-Haryana News: साध्वियों के यौन शोषण मामले में राम रहीम की सजा के खिलाफ अपील, सीबीआई से जवाब तलब
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- डेरा मुखी राम रहीम ने दोषी करार देने और सजा के आदेश को दी है चुनौती
- बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के दोषी ठहराकर सजा सुनाने की दी गई है दलील
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को इस मामले में सीबीआई व पीड़ित पक्ष को 23 अप्रैल तक जवाब दायर करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि अभी यह अपील हमारी विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई है लेकिन आगे कौन-सी बेंच सुनवाई करेगी इस पर प्रशासनिक स्तर पर फैसला लिया जाएगा। डेरे की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में डेरा मुखी को दोषी करार देते हुए उसे 10-10 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही 30.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। पहले मामले में दस वर्ष की सजा पूरी होने के बाद दूसरे मामले में दस वर्ष की सजा शुरू होनी है। सजा को डेरा मुखी ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।
अपील में राम रहीम ने कहा कि सीबीआई अदालत ने बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के उसे दोषी ठहराकर सजा सुना दी है। इस मामले में एफआईआर ही दो-तीन सालों की देरी से दायर हुई। यह एक गुमनाम शिकायत पर दर्ज की गई। इसमें शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं था। पीड़िता के बयान ही इस केस में सीबीआई ने छह सालों के बाद रिकॉर्ड किए थे।
सीबीआई का कहना था कि वर्ष 1999 में यौन शोषण हुआ था लेकिन बयान वर्ष 2005 में दर्ज किए गए जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की तब कोई शिकायतकर्ता ही नहीं था। अपनी अपील में डेरा मुखी ने सवाल उठाया कि, यह कहना कि पीड़िताओं पर कोई दबाव नहीं था गलत है। क्योंकि दोनों पीड़िता सीबीआई के संरक्षण में थी। ऐसे में प्रॉसिक्यूशन का उन पर दबाव था। 30 जुलाई 2007 तक बिना किसी शिकायत के जांच की जाती रही और पूरी की गई। उसके पक्ष के साक्ष्य और गवाहों पर सीबीआई अदालत ने गौर ही नहीं किया। यहां तक कि सीबीआई ने डेरा मुखी के मेडिकल एग्जामिनेशन तक की जरूरत नहीं समझी कि डेरा मुखी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए है वह सही भी हो सकते है या नहीं। लिहाजा इन सभी आधारों को लेकर डेरा मुखी ने अपने खिलाफ सुनाई गई सजा को रद्द कर उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करने की हाई कोर्ट से मांग की है।
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- बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के दोषी ठहराकर सजा सुनाने की दी गई है दलील
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने साध्वियों के यौन शोषण मामले में सजा काट रहे डेरा मुखी गुरमीत सिंह की सजा के खिलाफ अपील पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को इस मामले में सीबीआई व पीड़ित पक्ष को 23 अप्रैल तक जवाब दायर करने का आदेश दिया है।
शुक्रवार को चीफ जस्टिस शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की खंडपीठ ने कहा कि अभी यह अपील हमारी विशेष पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई है लेकिन आगे कौन-सी बेंच सुनवाई करेगी इस पर प्रशासनिक स्तर पर फैसला लिया जाएगा। डेरे की दो साध्वियों के यौन शोषण मामले में पंचकूला की सीबीआई कोर्ट ने अगस्त 2017 में डेरा मुखी को दोषी करार देते हुए उसे 10-10 साल की सजा सुनाई थी। साथ ही 30.20 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया था। पहले मामले में दस वर्ष की सजा पूरी होने के बाद दूसरे मामले में दस वर्ष की सजा शुरू होनी है। सजा को डेरा मुखी ने हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए अपील दायर की थी।
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अपील में राम रहीम ने कहा कि सीबीआई अदालत ने बिना उचित साक्ष्यों और गवाहों के उसे दोषी ठहराकर सजा सुना दी है। इस मामले में एफआईआर ही दो-तीन सालों की देरी से दायर हुई। यह एक गुमनाम शिकायत पर दर्ज की गई। इसमें शिकायतकर्ता का नाम तक नहीं था। पीड़िता के बयान ही इस केस में सीबीआई ने छह सालों के बाद रिकॉर्ड किए थे।
सीबीआई का कहना था कि वर्ष 1999 में यौन शोषण हुआ था लेकिन बयान वर्ष 2005 में दर्ज किए गए जब सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की तब कोई शिकायतकर्ता ही नहीं था। अपनी अपील में डेरा मुखी ने सवाल उठाया कि, यह कहना कि पीड़िताओं पर कोई दबाव नहीं था गलत है। क्योंकि दोनों पीड़िता सीबीआई के संरक्षण में थी। ऐसे में प्रॉसिक्यूशन का उन पर दबाव था। 30 जुलाई 2007 तक बिना किसी शिकायत के जांच की जाती रही और पूरी की गई। उसके पक्ष के साक्ष्य और गवाहों पर सीबीआई अदालत ने गौर ही नहीं किया। यहां तक कि सीबीआई ने डेरा मुखी के मेडिकल एग्जामिनेशन तक की जरूरत नहीं समझी कि डेरा मुखी के खिलाफ जो आरोप लगाए गए है वह सही भी हो सकते है या नहीं। लिहाजा इन सभी आधारों को लेकर डेरा मुखी ने अपने खिलाफ सुनाई गई सजा को रद्द कर उसके खिलाफ लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करने की हाई कोर्ट से मांग की है।