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स्मृति ईरानी ने हरियाणा भाजपा की टटोली नब्ज: कार्यकर्ताओ को दिया मंत्र; हारे उम्मीदवारों के साथ किया मंथन

Fri, 23 Oct 2026 06:10 PM IST
Akash Dubey आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: Akash Dubey Updated Fri, 23 Oct 2026 06:10 PM IST
सार

भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी ने हरियाणा में संगठन को सक्रिय करने के लिए दौरा किया। उन्होंने बूथ स्तर पर मजबूती, पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति और कार्यकर्ताओं की जवाबदेही पर जोर दिया।

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Smriti Irani has stepped up efforts to further energize organization in Haryana
भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी - फोटो : Amar Ujala Digital

विस्तार

हरियाणा में विधानसभा चुनाव भले ही अभी दूर हों, मगर भारतीय जनता पार्टी ने संगठन को और सक्रिय करने की कवायद अभी से शुरू कर दी है। भाजपा प्रभारी स्मृति ईरानी का दो दिवसीय पंचकूला दौरा इसी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरान मौजूदा पदाधिकारियों, पूर्व जनप्रतिनिधियों और विधानसभा चुनाव में पराजित उम्मीदवारों से बातचीत कर उन्होंने पार्टी के जमीनी समीकरणों, संगठन की स्थिति और स्थानीय स्तर पर मौजूद चुनौतियों को जानने की कोशिश की।

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इस दौरे का प्रमुख संदेश बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत बनाने का रहा। उनका स्पष्ट संदेश था कि हरियाणा का हर बूथ मजबूत होना चाहिए। पन्ना प्रमुखों को भी सक्रिय करना होगा। जहां नियुक्ति नहीं है, वहां पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति की जाए। चुनावी राजनीति में बूथ वह इकाई है, जहां मतदाताओं से सीधा संपर्क, सरकारी योजनाओं की जानकारी, स्थानीय समस्याओं की पहचान और मतदान के दिन तक कार्यकर्ताओं का समन्वय महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में भाजपा का हर बूथ को मजबूत बनाने पर जोर देना बताता है कि पार्टी चुनावी तैयारियों को केवल रैलियों, बड़े नेताओं के दौरों और प्रचार अभियानों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि संगठनात्मक ढांचे को लगातार सक्रिय रखने पर ध्यान दे रही है।
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स्मृति ईरानी की बैठकों में मौजूदा पदाधिकारियों के साथ पूर्व जनप्रतिनिधियों और चुनाव हारे उम्मीदवारों को शामिल करना भी राजनीतिक दृष्टि से अहम है। चुनाव में हार का सामना कर चुके उम्मीदवार स्थानीय स्तर पर कार्यकर्ताओं की नाराजगी, जातीय-सामाजिक समीकरणों, प्रत्याशी चयन और जनता की अपेक्षाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दे सकते हैं। इस बार की कवायद को समझने के लिए 2024 के विधानसभा चुनाव के आंकड़े भी महत्वपूर्ण हैं। भाजपा ने 90 में से 48 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार सरकार बनाई, जबकि कांग्रेस को 37 सीटें मिलीं। इसके बावजूद भाजपा 42 सीटों पर जीत दर्ज नहीं कर सकी। ऐसे में पार्टी के सामने अपनी जीती हुई सीटों पर संगठन को सक्रिय बनाए रखने के साथ उन क्षेत्रों में भी अपनी स्थिति की समीक्षा करने का सवाल है, जहां उसे पिछली बार सफलता नहीं मिली।
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जवाबदेही पर स्मृति ईरानी का जोर संगठनात्मक अनुशासन से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेत है। यदि किसी पदाधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो उसके काम की समीक्षा भी होनी चाहिए। केवल बैठकें करने, कार्यक्रम आयोजित करने या कागजों पर संगठन की सक्रियता दिखाने से जमीनी मजबूती सुनिश्चित नहीं होती। वास्तविक कसौटी यह होगी कि कार्यकर्ता जनता के बीच कितना समय बिताते हैं, स्थानीय शिकायतों को कितना सुनते हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने में कितनी मदद करते हैं। भाजपा ने अपने हालिया संगठनात्मक कार्यक्रम में भी बूथ समितियों के गठन और पन्ना प्रमुखों की नियुक्ति को प्राथमिकता दी है। 

वरिष्ठ पदाधिकारियों को यह निर्देश
इसके साथ ही उन्होंने वरिष्ठ पदाधिकारियों से कहा है कि वे रात्रि प्रवास करें और जनता से सीधे संवाद करें। मुख्यमंत्री व कैबिनेट मंत्रियों की बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि पार्टी कार्यकर्ता को अपनी सरकार से बहुत उम्मीद होती है। उसकी उम्मीदों को पूरा करना सरकार की जिम्मेदारी है। कार्यकर्ताओं की समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए, ताकि सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं का भरोसा कायम रहे।


कुल मिलाकर, पंचकूला में हो रहा मंथन केवल आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी नहीं, बल्कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल, कार्यकर्ताओं की भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व की जवाबदेही को परखने का अवसर भी है। हालांकि, बैठकों से निकले निर्देश कितने प्रभावी साबित होते हैं, यह उनके क्रियान्वयन से ही स्पष्ट होगा। असली चुनौती यही है कि संगठनात्मक सक्रियता बैठकों और घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि लगातार जनसंपर्क और समस्याओं के समाधान में दिखाई दे।

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