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न्याय का उद्देश्य केवल दंड नहीं, बल्कि वास्तविक समाधान भी : हाईकोर्ट

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चेक बाउंस मामले में दोषसिद्धि के बाद भी समझौते को अदालत ने माना वैध
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हिसार अदालत का सजा व मुआवजा आदेश हाईकोर्ट ने किया निरस्त



अमर उजाला ब्यूरो

चंडीगढ़। करीब एक दशक पुराने चेक बाउंस मामले में हिसार की न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि, एक वर्ष के कठोर कारावास और 8 लाख रुपये मुआवजे के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्याय का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि विवाद का वास्तविक समाधान करना भी है। हाईकोर्ट ने कहा कि चेक अनादरण जैसे मामलों में मुकदमे के हर चरण पर, यहां तक कि दोषसिद्धि के बाद भी, समझौते की गुंजाइश बनी रहती है।

याचिकाकर्ता विनोद कुमार यादव ने बताया कि वर्ष 2018 में ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए एक वर्ष की सजा और 8 लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का आदेश दिया था। सेशन कोर्ट ने भी उनकी अपील खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बताया गया कि 1 अप्रैल 2026 को दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया। समझौते के तहत आरोपी ने 4 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट शिकायतकर्ता को सौंप दिया, जिसे शिकायतकर्ता ने स्वीकार करते हुए मामले के निपटारे पर सहमति जताई।
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अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में प्रतिकरात्मक न्याय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और उद्देश्य पक्षों के बीच विवाद का व्यावहारिक समाधान निकालना होना चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता वर्ष 2016 से इस मामले में मानसिक और कानूनी पीड़ा झेल रहा था, इसलिए उस पर अतिरिक्त जुर्माना लगाना उचित नहीं होगा। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों को समझौते की शर्तों का पालन करने का निर्देश दिया और कहा कि यदि भविष्य में किसी पक्ष द्वारा शर्तों का उल्लंघन किया जाता है, तो पीड़ित पक्ष को आदेश वापस लेने की मांग करने का अधिकार होगा।
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