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Hindi News ›   Haryana ›   Chandigarh-Haryana News ›   The power corporation has gone from a profit of Rs 800 crore to a loss of Rs 4484 crore. The losses should not be imposed on the public: Prof. Sampath

बिजली निगम 800 करोड़ के लाभ से 4484 करोड़ के घाटे तक पहुंची, अब जनता पर न थोपा जाए नुकसान : प्रो. संपत

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अमर उजाला ब्यूरो
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चंडीगढ़। हरियाणा इलेक्टि्रटी रेगुलेटरी कमीशन(एचईआरसी) पर उपभोक्ताओं के हितों बजाय सरकार के इशारे पर काम करने के आरोप लगाए हैं। इनेलो के राष्ट्रीय संरक्षक ने प्रेसवार्ता करके तथ्यों के साथ बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम(डीएचबीवीएन) और उत्तरी हरियाणा बिजली वितरण निगम(यूएचबीवीएन) वर्ष 2020-2021 तक 800 करोड़ के मुनाफे थे। वर्ष 2023-2024 में मुनाफे के बजाय 4484 करोड़ रुपये का घाटा कैसे हो गया।
पूर्व मंत्री और इंडियन नेशनल लोकदल के राष्ट्रीय संरक्षक प्रो. संपत सिंह ने शुक्रवार को चंडीगढ़ स्थित पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता करके विस्तृत ब्योरा दिया। प्रो. संपत ने बताया कि सरकार के आदेश पर जनहित के बजाय जनविरोधी फैसला लिया जा रहा है। संपत ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए आरोप लगाए कि जो नुकसान हो रहा है उसे आम उपभोक्ताओं पर थोपने की तैयारी है। यह भी आरोप लगाया कि एचईआरसी के द्वारा अनुमोदित औसत पावर लागत 3.12 रुपए प्रति यूनिट है। बावजूद इसके फरीदाबाद गैस पावर प्लांट से 85 रुपए से 153 रुपए प्रति यूनिट और पानीपत थर्मल से 6.50 रुपए प्रति यूनिट पर महंगी बिजली खरीद रही है। उपभोक्ताओं को 7.29 रुपए प्रति यूनिट बिजली बेची जा रही है। प्रदेश में करीब 22 लाख बकाएदारों पर करीब 8000 करोड़ रुपये का बकाया है। बकाएदारों से रकम की वसूली न होने से आम उपभोक्ताओं पर इसका बोझ पड़ रहा है। संपत ने मांग करते हुए कहा कि एचईआरसी इस बात की जांच करे कि कहां और कैसे नुकसान हो रहा है।
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