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Charkhi Dadri News: प्राकृतिक खेती के प्रति जागरूक करने के लिए नरसिंहवास में जागरूकता शिविर संपन्न
संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
Updated Thu, 18 Jun 2026 11:53 PM IST
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चरखी दादरी। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से गांव नरसिंहवास में किसान जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती की ओर प्रेरित किया गया। इस दौरान किसानों को यूरिया न डीएपी और न दवा फिर भी होगी बंपर पैदावार के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
शिविर के दौरान कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक और व्यावहारिक तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक रासायनिक खेती में उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों का अंधाधुंध प्रयोग न केवल खेती की लागत को बढ़ा रहा है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में रसायनों के स्थान पर जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। ये तत्व न केवल मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करते हैं बल्कि उसमें जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने किसानों को इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक लाभ देने का एक प्रभावी माध्यम है। इससे तैयार उत्पादों की गुणवत्ता उच्च होती है जिसके कारण बाजार में इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न का उत्पादन न केवल उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम है।
शिविर के दौरान कृषि विभाग के अधिकारी डॉ. राकेश कुमार ने किसानों को प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक और व्यावहारिक तकनीकों से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक रासायनिक खेती में उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवार नाशकों का अंधाधुंध प्रयोग न केवल खेती की लागत को बढ़ा रहा है बल्कि मिट्टी के स्वास्थ्य को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती में रसायनों के स्थान पर जीवामृत, घनजीवामृत और बीजामृत जैसे जैविक संसाधनों का उपयोग किया जाता है। ये तत्व न केवल मिट्टी की उर्वरता को पुनर्जीवित करते हैं बल्कि उसमें जैविक गतिविधियों को बढ़ावा देकर दीर्घकालिक उत्पादन क्षमता को सुरक्षित रखते हैं। उन्होंने किसानों को इस बात पर जोर दिया कि प्राकृतिक खेती कम लागत में अधिक लाभ देने का एक प्रभावी माध्यम है। इससे तैयार उत्पादों की गुणवत्ता उच्च होती है जिसके कारण बाजार में इनकी मांग भी लगातार बढ़ रही है। सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्यान्न का उत्पादन न केवल उपभोक्ताओं के लिए लाभकारी है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक क्रांतिकारी कदम है।
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