{"_id":"6acf56dc4a5dd65bcd0a6f24","slug":"farmers-anger-erupts-over-procurement-below-msp-and-delays-in-lifting-of-produce-in-haryana-2026-10-14","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा: कई जिलों की अनाज मंडियों में की तालाबंदी, एमएसपी से कम खरीद व उठान में देरी पर फूटा किसानों का गुस्सा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा: कई जिलों की अनाज मंडियों में की तालाबंदी, एमएसपी से कम खरीद व उठान में देरी पर फूटा किसानों का गुस्सा
Wed, 14 Oct 2026 03:48 PM IST
Naveen
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
अमर उजाला नेटवर्क, हरियाणा
Published by: Naveen
Updated Wed, 14 Oct 2026 03:48 PM IST
सार
यमुनानगर जिले के रादौर, जगाधरी, बिलासपुर, साढौरा और छछरौली में किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालयों के बाहर धरना दिया। भाकियू (टिकैत) नेता हरपाल सुढैल ने कहा कि नमी की कड़ी शर्तों, गेट पास और पोर्टल वेरिफिकेशन की तकनीकी खामियों के कारण किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
मंडी में पड़ी धान की फसल
- फोटो : संवाद
विस्तार
हरियाणा की अनाज मंडियों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद न होने, उठान में देरी और पोर्टल की जटिलताओं को लेकर बुधवार को किसानों का आक्रोश सड़कों पर उतर आया। संयुक्त किसान मोर्चा के प्रदेशव्यापी आह्वान पर विभिन्न किसान संगठनों ने रोहतक, नरवाना, रतिया और यमुनानगर सहित कई जिलों में मार्केट कमेटी कार्यालयों पर सांकेतिक तालाबंदी कर जोरदार प्रदर्शन किया। किसानों ने सरकार पर 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद के खोखले वादे करने का आरोप लगाते हुए व्यवस्था में तत्काल सुधार की मांग की।
विज्ञापन
दावे 24 फसलों के, भाव मिल रहा आधा'
रोहतक की नई अनाज मंडी में किसानों ने सुबह 11 से दोपहर 2 बजे तक मार्केट कमेटी कार्यालय के मुख्य गेट पर ताला जड़कर 3 घंटे की सांकेतिक तालाबंदी की। किसान सभा के महासचिव सुमित दलाल ने कहा कि सरकार ने नए नियम थोपकर किसानों की कमर तोड़ दी है।
विज्ञापन
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी दावों के बावजूद मंडी में बाजरा निर्धारित 2900 रुपये के बजाय 2100 रुपये प्रति क्विंटल और धान 2461 रुपये के बजाय 2000 रुपये से 2100 रुपये में बिक रहा है। समाधान न होने पर किसानों ने प्रदेश स्तर पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।
विज्ञापन
पुराने बाटों से तौल और 'खर्ची-पर्ची' के खेल पर सवाल
नरवाना की नई अनाज मेला मंडी में अखिल भारतीय किसान सभा और अन्य संगठनों के नेतृत्व में किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला लगा दिया। किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि धान का उठान कछुए की गति से चल रहा है और अवैध घोषित हो चुकी तिपाई व पुराने बाटों से आज भी तुलाई की जा रही है। किसानों ने खरीद लिमिट व पोर्टल की अनिवार्यता खत्म करने और जे-फॉर्म में वास्तविक खरीद भाव दर्ज करने की मांग उठाई।
कालाबाजारी का आरोप, हाईवे जाम करने की चेतावनी
रतिया में भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहां) के बैनर तले किसानों ने मार्केट कमेटी दफ्तर पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया। किसानों का आरोप था कि स्थानीय किसानों की धान नहीं खरीदी जा रही, जबकि व्यापारी बाहर से 1900 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर धान लाकर खपा रहे हैं। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि स्थानीय किसानों की खरीद सुनिश्चित नहीं हुई तो दो दिन बाद भाजपा जिला कार्यालय के सामने सरकार का पुतला फूंका जाएगा और नेशनल हाईवे जाम किया जाएगा। मार्केट कमेटी सचिव ओमप्रकाश चहल ने कहा कि वे मंडियों का निरीक्षण कर रहे थे और खरीद नियमानुसार जारी है।
5 मंडियों में प्रदर्शन, बारिश से भीग रही फसल
यमुनानगर जिले के रादौर, जगाधरी, बिलासपुर, साढौरा और छछरौली में किसानों ने मार्केट कमेटी कार्यालयों के बाहर धरना दिया। भाकियू (टिकैत) नेता हरपाल सुढैल ने कहा कि नमी की कड़ी शर्तों, गेट पास और पोर्टल वेरिफिकेशन की तकनीकी खामियों के कारण किसानों को कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है। बेमौसम बारिश के कारण खुले में पड़ी धान की फसल भीगने से भारी नुकसान की आशंका जताई गई। किसानों ने धान का भाव 3100 और गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी।
एमएसपी खरीद की मांग को लेकर धरना
भिवानी की नई अनाज मंडी में भी किसानों ने एमएसपी पर फसल न खरीदे जाने के खिलाफ धरना दिया। किसानों ने कहा कि समय पर खरीद न होने से उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उधर, मार्केट कमेटी सुपरवाइजर योगेश कुमार ने दावा किया कि मंडी में खरीद समय पर सुचारू रूप से चल रही है और किसानों को कोई असुविधा नहीं है।
Trending Videos
धान खरीद प्रक्रिया को लेकर किसान नेताओं ने मार्केट कमेटी कार्यालय पर जड़ा ताला
जिले की मंडियों में धान की खरीद नहीं होने और एमएसपी न मिलने से परेशान किसानों ने बुधवार को करनाल मार्केट कमेटी कार्यालय पर ताला जड़ दिया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) के आह्वान पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत, सर छोटू राम, चढ़ूनी ) सहित अन्य संगठनों के सदस्यों ने कार्यालय के सभी गेट बंद कर दिए। यह तालाबंदी दोपहर दो बजे तक जारी रही। भाकियू के प्रदेश अध्यक्ष रतनमान ने कहा कि मंडियों में धान के दाम में 400 से 500 रुपये प्रति क्विंटल तक कटौती कर किसानों को लूटा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पोर्टल के नाम पर किसानों के धान की खरीद, उठान और भुगतान समय पर नहीं किया जा रहा है। दूसरी ओर, किसानों को परेशान करने के लिए सरकार ने 25.2 क्विंटल प्रति एकड़ की शर्त लगा दी। उन्होंने बताया कि एक एकड़ में 30 क्विंटल के करीब धान निकलती है, किसान उसको कहां बेचेगा। उन्होंने मांग की कि प्रति एकड़ धान की सीमा बढ़ाई जाए, ताकि किसान आराम से अपनी फसल बेच सके।
अपने चहेतों के दुकान पर आते हैं कृषि मंत्री
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री मंडियों में आकर चाय-बिस्कुट पीते हैं और लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की खरीद व्यवस्था सही होती तो किसानों को मंडियों में इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद के इतने बाद भी खरीद और उठान की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे हाईवे जाम करने और अन्य विरोध प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
बारिश में खराब हुई फसल
भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रवक्ता बाहदुर मैहला ने कहा कि उठान नहीं होने के कारण मंडी में अनाज खुले में पड़ा है। बारिश के कारण फसल खराब हो गई। अभी माैसम खराब होने की संभावना है, इससे धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय पर खरीद शुरू करने की मांग को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
केवल एमएसपी से किसानों का भला नहीं होगा
ब्लाॅक प्रधान यशपाल राणा ने कहा कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के दावे करने से किसानों का भला नहीं होगा, बल्कि मंडियों में खरीद, भुगतान और उठान की व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। उन्होंने कहा कि धान की खरीद शुरू होने के बाद भी किसानों की दूसरी समस्याओं को लेकर आंदोलन जारी रह सकता है। किसान संगठनों की मांग है कि मंडियों में धान की खरीद तेजी से कराई जाए, फसल के दाम में कथित कटौती रोकी जाए और उठान की व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि किसानों को मंडियों में लंबे समय तक फसल लेकर न बैठना पड़े।
अपने चहेतों के दुकान पर आते हैं कृषि मंत्री
भाकियू प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कृषि मंत्री मंडियों में आकर चाय-बिस्कुट पीते हैं और लौट जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की खरीद व्यवस्था सही होती तो किसानों को मंडियों में इस तरह परेशान नहीं होना पड़ता। उन्होंने कहा कि सरकारी खरीद के इतने बाद भी खरीद और उठान की व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे हाईवे जाम करने और अन्य विरोध प्रदर्शन करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।
बारिश में खराब हुई फसल
भारतीय किसान यूनियन सर छोटूराम के प्रवक्ता बाहदुर मैहला ने कहा कि उठान नहीं होने के कारण मंडी में अनाज खुले में पड़ा है। बारिश के कारण फसल खराब हो गई। अभी माैसम खराब होने की संभावना है, इससे धान के खराब होने का खतरा बढ़ गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने समय पर खरीद शुरू करने की मांग को गंभीरता से नहीं लिया, जिसके कारण किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
केवल एमएसपी से किसानों का भला नहीं होगा
ब्लाॅक प्रधान यशपाल राणा ने कहा कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के दावे करने से किसानों का भला नहीं होगा, बल्कि मंडियों में खरीद, भुगतान और उठान की व्यवस्था को दुरुस्त करना होगा। उन्होंने कहा कि धान की खरीद शुरू होने के बाद भी किसानों की दूसरी समस्याओं को लेकर आंदोलन जारी रह सकता है। किसान संगठनों की मांग है कि मंडियों में धान की खरीद तेजी से कराई जाए, फसल के दाम में कथित कटौती रोकी जाए और उठान की व्यवस्था दुरुस्त की जाए, ताकि किसानों को मंडियों में लंबे समय तक फसल लेकर न बैठना पड़े।