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Fatehabad News: देवर-भाभी की कोरड़ामार होली में झलका प्यार व परंपरा

संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Thu, 05 Mar 2026 11:14 PM IST
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Love and tradition reflected in brother-in-law and sister-in-law's Kordamar Holi
भूना। फाग उत्सव में महिला चुन्नी और रस्सी से बने कोरड़े से अपने देवर पर वार करती हुई । आयोजक
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भूना। बैजलपुर गांव में हरियाणा की लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव हर वर्ष फाग के मौके पर धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल भी बुधवार से शुरू हुए तीन दिन के फाग उत्सव में वीरवार तक 84 देवर-भाभी की जोड़ियों ने कोरड़ा होली में भाग लिया। उत्सव के अंत में विजेता जोड़ियों को सम्मानित किया जाएगा।
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गांव में सामूहिक फाग उत्सव की शुरुआत 2004 में हुई थी। उस समय हवलदार सतबीर सिंह झाझड़िया, मास्टर रोहताश भाखर और धर्मवीर कादियान ने एक कमेटी बनाई थी, ताकि होली के दौरान होने वाले झगड़ों को रोका जा सके और गांव में भाईचारा कायम रहे। पहले गांव के अलग-अलग मोहल्लों में होली खेली जाती थी, जिससे अक्सर विवाद हो जाते थे।
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सार्वजनिक चौक में सामूहिक आयोजन शुरू होने के बाद माहौल में सुधार आया और आपसी सौहार्द बढ़ा। फाग उत्सव कमेटी के प्रधान सतबीर सिंह झाझड़िया के नेतृत्व में गांव के कई सदस्य आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे हैं। इसमें रण सिंह ओला, बलवान सिंह, धर्मबीर सिंह, जसबीर ओला, विकास मावलिया, जगदीश चंद्र, मोनू सिंह सहित अन्य सदस्य शामिल हैं।

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महिलाएं कोरड़े से मारती हैं, देवर पानी डालते हैं



फाग उत्सव के दौरान देवर-भाभी की कोरड़ा मार होली सबसे खास मानी जाती है। गांव के सार्वजनिक चौक में सैकड़ों लोग एकत्रित होकर इस अनोखी परंपरा को देखते हैं। यहां लोहे की बड़ी कढ़ाई में पानी भरा जाता है और आसपास पानी के टैंकर भी रखे जाते हैं। विवाहित महिलाएं चुन्नी और रस्सी से बने कोरड़े से अपने देवरों पर वार करती हैं, जबकि युवक कढ़ाई से पानी निकालकर महिलाओं पर डालते हैं। उत्सव के अंत में सबसे ज्यादा दमखम दिखाने वाली देवर-भाभी की जोड़ी को आकर्षक उपहार देकर सम्मानित किया जाता है।

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भाईचारा और पानी बचाना मुख्य उद्देश्य



फाग उत्सव कमेटी के प्रधान सतबीर सिंह झाझड़िया के अनुसार 22 साल पहले गांव के सामाजिक लोगों ने होली के दौरान बिगड़ते भाईचारे को बचाने और पानी की बर्बादी रोकने के उद्देश्य से सामूहिक कोरड़ामार होली की शुरुआत की थी। आज भी युवाओं की टीम बुजुर्गों की इस परंपरा को आगे बढ़ा रही है। बैजलपुर की यह अनोखी होली अब दूर-दूर तक प्रसिद्ध हो चुकी है।
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