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Fatehabad News: मां की रसोई हर दिन 500 से अधिक जरूरतमंदों का भर रही पेट
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Sun, 15 Mar 2026 11:06 PM IST
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मां की रसोई में खाना खाते हुए जरूरतमंद लोग :संवाद
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रतिया। बुढलाडा रोड स्थित कम्युनिटी सेंटर से संचालित मां की रसोई गरीब और जरूरतमंद के लिए वरदान साबित हो रही है। मात्र 10 रुपये सहयोग शुल्क में सिर्फ दोपहर के समय भरपेट भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जो लोग सहयोग देने में असमर्थ होते हैं उन्हें भी कभी भूखा नहीं लौटना पड़ता।
मुख्य सेवादार वीरेंद्र पपरेजा ने बताया कि अब क्षेत्र की लगभग सभी सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं अपने स्थापना दिवस, जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या अपनों की बरसी के अवसर पर सेवा और दान के लिए मां की रसोई का चयन करती हैं। जरूरतमंदों को खाने में दो सब्जी, सलाद, आचार और रोटी उपलब्ध करवाई जाती है। इसके साथ मीठा पकवान भी दिया जाता है।
संस्थान की ओर से नागरिक अस्पताल में सुबह के समय मरीजों को दूध-चाय वितरित किया जाता है। संस्थान के बढ़ते योगदान के कारण अब खाना बनाने के बर्तन और अन्य मशीनरी भी संस्था ने स्वयं खरीदी हैं। भविष्य की योजना में रोटी बनाने वाली मशीन लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि बढ़ती जरूरतमंदों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सेवा का दायरा और बढ़ाया जा सके। संवाद
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पांच सेवादारों से शुरू हुआ सफर, अब 75 का कारवां
संचालक वीरेंद्र पपरेजा उर्फ राजू ने नैना देवी और अरुणाय जैसे धार्मिक स्थलों पर लंगर सेवा का अनुभव रखने वाले अपने चार साथियों सतनाम, राजू ठक्कर, धनीराम और दलबीर के साथ मिलकर इसकी योजना बनाई। इस सेवा कार्य की नींव 1 जुलाई 2022 को रखी गई थी। फतेहाबाद के रोटी बैंक से प्रेरित होकर इन पांचों ने आपसी सहयोग से धन जुटाया और कम्युनिटी सेंटर में सेवा शुरू की। साढ़े तीन साल के इस सफर में आज संस्था के साथ 75 से ज्यादा सेवादार तन-मन-धन से जुड़ चुके हैं।
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अस्पतालों से लेकर श्मशान घाट तक सेवा का विस्तार
नागरिक अस्पताल और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 100 टिफिन भेजे जाते हैं ताकि मरीजों के परिजनों को खाने के लिए भटकना न पड़े। श्मशान घाट (रामबाग) में अंतिम संस्कार के दौरान आने वाले लोगों के लिए पानी की व्यवस्था भी संस्था की ओर से की जाती है। शहर में होने वाले किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में लंगर या जल सेवा के लिए संस्था के सेवादार सदैव तत्पर रहते हैं। वहीं मां की रसोई क्षेत्र में जरूरतमंदों के इलाज का खर्चा भी उठाने की सेवा का काम भी कर रही है।
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गैस की कमी हुई तो चूल्हा तैयार
गैस की कमी के बाद भी रसोई फिलहाल सुचारू रूप से चल रही है। वीरेंद्र के अनुसार अभी दो दिन का स्टॉक बाकी है। अगर गैस की कमी बनी रहती है तो उनके पास व्यवस्था के तौर चूल्हा है। इस पर लकड़ी से खाना तैयार किया जाएगा और जरूरतमंदों में वितरित किया जाएगा।
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मुख्य सेवादार वीरेंद्र पपरेजा ने बताया कि अब क्षेत्र की लगभग सभी सामाजिक और धार्मिक संस्थाएं अपने स्थापना दिवस, जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ या अपनों की बरसी के अवसर पर सेवा और दान के लिए मां की रसोई का चयन करती हैं। जरूरतमंदों को खाने में दो सब्जी, सलाद, आचार और रोटी उपलब्ध करवाई जाती है। इसके साथ मीठा पकवान भी दिया जाता है।
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संस्थान की ओर से नागरिक अस्पताल में सुबह के समय मरीजों को दूध-चाय वितरित किया जाता है। संस्थान के बढ़ते योगदान के कारण अब खाना बनाने के बर्तन और अन्य मशीनरी भी संस्था ने स्वयं खरीदी हैं। भविष्य की योजना में रोटी बनाने वाली मशीन लगाने की तैयारी की जा रही है, ताकि बढ़ती जरूरतमंदों की संख्या को ध्यान में रखते हुए सेवा का दायरा और बढ़ाया जा सके। संवाद
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पांच सेवादारों से शुरू हुआ सफर, अब 75 का कारवां
संचालक वीरेंद्र पपरेजा उर्फ राजू ने नैना देवी और अरुणाय जैसे धार्मिक स्थलों पर लंगर सेवा का अनुभव रखने वाले अपने चार साथियों सतनाम, राजू ठक्कर, धनीराम और दलबीर के साथ मिलकर इसकी योजना बनाई। इस सेवा कार्य की नींव 1 जुलाई 2022 को रखी गई थी। फतेहाबाद के रोटी बैंक से प्रेरित होकर इन पांचों ने आपसी सहयोग से धन जुटाया और कम्युनिटी सेंटर में सेवा शुरू की। साढ़े तीन साल के इस सफर में आज संस्था के साथ 75 से ज्यादा सेवादार तन-मन-धन से जुड़ चुके हैं।
अस्पतालों से लेकर श्मशान घाट तक सेवा का विस्तार
नागरिक अस्पताल और निजी अस्पतालों में प्रतिदिन करीब 100 टिफिन भेजे जाते हैं ताकि मरीजों के परिजनों को खाने के लिए भटकना न पड़े। श्मशान घाट (रामबाग) में अंतिम संस्कार के दौरान आने वाले लोगों के लिए पानी की व्यवस्था भी संस्था की ओर से की जाती है। शहर में होने वाले किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में लंगर या जल सेवा के लिए संस्था के सेवादार सदैव तत्पर रहते हैं। वहीं मां की रसोई क्षेत्र में जरूरतमंदों के इलाज का खर्चा भी उठाने की सेवा का काम भी कर रही है।
गैस की कमी हुई तो चूल्हा तैयार
गैस की कमी के बाद भी रसोई फिलहाल सुचारू रूप से चल रही है। वीरेंद्र के अनुसार अभी दो दिन का स्टॉक बाकी है। अगर गैस की कमी बनी रहती है तो उनके पास व्यवस्था के तौर चूल्हा है। इस पर लकड़ी से खाना तैयार किया जाएगा और जरूरतमंदों में वितरित किया जाएगा।