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Fatehabad News: मंडियों में ठेकेदारों की मनमानी पर लगे रोक, आढ़तियों को मिले उठान का जिम्मा
Thu, 20 Aug 2026 10:51 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
Updated Thu, 20 Aug 2026 10:51 PM IST
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फतेहाबाद। लघुसचिवालय में रोष प्रदर्शन करते किसान। संघ
फतेहाबाद। भारतीय किसान संघ की बैठक वीरवार को किसान विश्राम गृह में जिलाध्यक्ष रोहतास पंघाल की अध्यक्षता में संपन्न हुई। बैठक के उपरांत किसान प्रतिनिधियों के एक शिष्टमंडल ने अतिरिक्त उपायुक्त अनुराग ढालिया से मुलाकात कर उन्हें मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
किसानों ने ज्ञापन में प्रदेश के धान व अन्य फसल उत्पादक किसानों की समस्याओं के तुरंत समाधान की मांग की गई है। बैठक के दौरान जिलाध्यक्ष रोहतास ने किसानों को आगाह किया कि वे अपने परमल धान का पोर्टल विवरण किसी भी व्यापारी या बिचौलिए को न दें। व्यापारियों को पोर्टल देने से किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए वे अपनी फसल का ब्योरा खुद सुरक्षित रखें।
उन्होंने कहा कि हरियाणा में कम अवधि वाली धान की कटाई 15 सितंबर तक शुरू हो जाती है। किसानों को मंडी में फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े इसलिए 15 सितंबर से ही सरकारी खरीद शुरू की जाए। वर्तमान में 95 प्रतिशत कटाई कंबाइन से होती है जिससे नमी अधिक रहती है इसलिए धान में स्वीकार्य नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए।
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उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की लापरवाही से मंडियों में जाम लगता है। इससे किसानों को फसल उतारने व बेचने में भारी परेशानी होती है। ऐसे में धान उठान का जिम्मा ठेकेदारों के बजाय आढ़तियों को दिया जाए। सभी मंडियों में पारदर्शी जांच के लिए डिजिटल नमी मापक मशीनें उपलब्ध कराई जाएं।
मंडी में बिक्री के बाद बायोमेट्रिक जैसी जटिल प्रक्रियाओं से किसानों को परेशान न किया जाए। नरमा, बाजरा, मूंग, ग्वार की भी समय पर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर महिपाल बड़दु, देवी लाल गोदारा, एडवोकेट सुधीर मेहता, सुरेंद्र बहादुर, धर्मपाल जांगड़ा, रीना रानी, अजीत बेनीवाल आदि उपस्थित रहे।
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किसानों ने ज्ञापन में प्रदेश के धान व अन्य फसल उत्पादक किसानों की समस्याओं के तुरंत समाधान की मांग की गई है। बैठक के दौरान जिलाध्यक्ष रोहतास ने किसानों को आगाह किया कि वे अपने परमल धान का पोर्टल विवरण किसी भी व्यापारी या बिचौलिए को न दें। व्यापारियों को पोर्टल देने से किसानों को सीधा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है इसलिए वे अपनी फसल का ब्योरा खुद सुरक्षित रखें।
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उन्होंने कहा कि हरियाणा में कम अवधि वाली धान की कटाई 15 सितंबर तक शुरू हो जाती है। किसानों को मंडी में फसल बेचने के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े इसलिए 15 सितंबर से ही सरकारी खरीद शुरू की जाए। वर्तमान में 95 प्रतिशत कटाई कंबाइन से होती है जिससे नमी अधिक रहती है इसलिए धान में स्वीकार्य नमी की सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत की जाए।
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उन्होंने कहा कि ठेकेदारों की लापरवाही से मंडियों में जाम लगता है। इससे किसानों को फसल उतारने व बेचने में भारी परेशानी होती है। ऐसे में धान उठान का जिम्मा ठेकेदारों के बजाय आढ़तियों को दिया जाए। सभी मंडियों में पारदर्शी जांच के लिए डिजिटल नमी मापक मशीनें उपलब्ध कराई जाएं।
मंडी में बिक्री के बाद बायोमेट्रिक जैसी जटिल प्रक्रियाओं से किसानों को परेशान न किया जाए। नरमा, बाजरा, मूंग, ग्वार की भी समय पर सरकारी खरीद सुनिश्चित की जाए। इस अवसर पर महिपाल बड़दु, देवी लाल गोदारा, एडवोकेट सुधीर मेहता, सुरेंद्र बहादुर, धर्मपाल जांगड़ा, रीना रानी, अजीत बेनीवाल आदि उपस्थित रहे।