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Fatehabad News: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में देरी पर बदले नियम, एक साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी

Mon, 10 Aug 2026 11:26 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, फतेहाबाद Updated Mon, 10 Aug 2026 11:26 PM IST
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Rules revised for delayed birth and death certificates; Judicial Magistrate's permission required after one year
फतेहाबाद के नगर परिषद कार्यालय में जन्म-मृत्यु पंजीकरण कार्यालय संवाद
फतेहाबाद। जन्म और मृत्यु के पंजीकरण में देरी होने पर अब प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। केंद्र सरकार ने पंजीकरण जन्म और मृत्यु (संशोधन) अधिनियम, 2026 को अधिसूचित कर दिया है। कानून एवं न्याय मंत्रालय की ओर से 6 अगस्त को जारी राजपत्र के अनुसार, जन्म या मृत्यु की सूचना निर्धारित समय के बाद दिए जाने पर अलग-अलग स्तर पर मजिस्ट्रेट की अनुमति आवश्यक होगी।
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संशोधित प्रावधान के अनुसार यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक लेकिन दो वर्ष के भीतर रजिस्ट्रार को दी जाती है तो संबंधित क्षेत्र के जिला मजिस्ट्रेट, उपमंडल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। इसके लिए मजिस्ट्रेट जन्म या मृत्यु से संबंधित जानकारी की सत्यता की जांच करेंगे और निर्धारित शुल्क भी लिया जाएगा। संवाद
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दो साल बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट की मंजूरी जरूरी
नए प्रावधान में दो वर्ष से अधिक समय बाद जन्म या मृत्यु का पंजीकरण कराने के लिए प्रक्रिया को और सख्त किया गया है। दो साल से अधिक देरी होने पर प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। न्यायिक मजिस्ट्रेट संबंधित क्षेत्र में जन्म या मृत्यु की घटना की जांच कर जानकारी की सत्यता सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद निर्धारित शुल्क जमा करने पर पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। अधिनियम में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट से आशय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 14 की उपधारा (1) के तहत नियुक्त कार्यकारी मजिस्ट्रेट से होगा।
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जिले में हर माह आती हैं 50 से ज्यादा फाइल
जन्म और मृत्यु पंजीकरण को लेकर सरकार की तरफ से पहले भी सख्ती थी लेकिन प्रक्रिया के तहत सीएमओ स्तर पर अनुमति के बाद पंजीकरण हो जाता था लेकिन अब एक साल से ज्यादा देरी पर सख्ती हो गई है। जिले में माह ऐसे 50 से ज्यादा आवेदन पोर्टल पर होते हैं लेकिन अब देरी पर कोर्ट की अनुमति लेनी पड़ेगी।
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केंद्र सरकार की तरफ से नोटिफिकेशन जारी किया गया है। अगर एक साल से भी ज्यादा देरी होती है तो नए नियमों के अनुसार अनुमति लेनी होगी।
-डॉ. बुधराम, सिविल सर्जन
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