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Hisar News: इंसाफ मिला पर हार गई जिंदगी...14 साल बाद धुला गबन का दाग मगर उससे पहले ही दुनिया को अलविदा कह गए सेवानिवृत्त स्टोरकीपर सदानंद

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Sep 2026 01:11 AM IST
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Justice was served, but life was lost... 14 years later, the stain of embezzlement was cleared, but the retired storekeeper Sadanand had already said goodbye to the world.
हिसार। चौदह वर्षों तक चले कानूनी संघर्ष के बाद दयानंद महाविद्यालय के सेवानिवृत्त स्टोरकीपर सदानंद को गबन के आरोपों से बरी कर दिया गया। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक की अदालत ने उनके परिवार को निलंबन अवधि के वेतन-भत्ते, ग्रेच्युटी और अन्य देय सेवा लाभ ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं।
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हालांकि इस फैसले का इंतजार करते हुए सदानंद का दो साल पहले निधन हो चुका है। सदानंद की पत्नी मंजू देवी ने कहा कि फैसले से परिवार के माथे पर लगे भ्रष्टाचार और गबन के आरोपों का दाग हट गया है। उन्होंने कहा कि न्याय देर से मिला। अपने हक के वेतन-भत्ते पाने की लड़ाई लड़ते हुए सदानंद का 4 जनवरी 2024 को निधन हो गया। अदालत ने 14 अगस्त को अपना फैसला सुनाया है।
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सदानंद के पुत्र विजेंद्र कुमार ने बताया कि उनके पिता की वर्ष 1978 में दयानंद महाविद्यालय में स्टोरकीपर के पद पर नियुक्ति हुई थी। उन्हें विद्यार्थियों के बस पास बनवाने के लिए हरियाणा रोडवेज विभाग से समन्वय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी दी गई थी।
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सदानंद ने आरोपों और सेवा संबंधी कार्रवाई के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया। वह अपने सम्मान, बकाया वेतन-भत्तों और गबन के आरोपों से मुक्ति के लिए कानूनी लड़ाई लड़ते रहे। 30 नवंबर 2016 को सदानंद सेवानिवृत्त हो गए लेकिन उनका कानूनी संघर्ष जारी रहा। न्याय की प्रतीक्षा के दौरान 4 जनवरी 2024 को उनका निधन हो गया।

इसके बाद उनकी विधवा पत्नी और परिवार ने अदालत में लड़ाई जारी रखी। परिवार की ओर से बकाया वेतन, सेवा लाभ और गबन के आरोपों से मुक्ति की मांग रखी गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अलका मलिक की अदालत ने सदानंद को गबन के आरोपों से बरी कर दिया। साथ ही परिवार को निलंबन अवधि के वेतन-भत्ते, ग्रेच्युटी और अन्य देय सेवा लाभ ब्याज सहित देने के आदेश दिए।
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