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Hisar News: हड़प्पा सभ्यता के वैभव से महका राखीगढ़ी का आंगन

Mon, 26 Oct 2026 12:24 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार
संवाद न्यूज एजेंसी, हिसार Updated Mon, 26 Oct 2026 12:24 AM IST
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Rakhi Garhis grounds are imbued with the splendor of the Harappan civilization
राखीगढ़ी महोत्सव में कार्यक्रम में शामिल पर्यटन मंत्री डॉ अरविंद शर्मा व सुभाष बराला। स्रोत : स
नारनौंद। हड़प्पा सभ्यता की ऐतिहासिक धरोहर को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय राखीगढ़ी महोत्सव में एक लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया। 10 हजार से ज्यादा छात्र-छात्राओं ने प्राचीन सभ्यता और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जाना।
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महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ऐतिहासिक प्रदर्शनी और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से लोगों को राखीगढ़ी के पुरातात्विक महत्व से रूबरू कराया गया। देश-विदेश से पहुंचे शोधकर्ताओं और पुरातत्व विशेषज्ञों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष बनाया।
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समापन समारोह में हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी प्रदेश की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति के प्रति उनके लगाव को दर्शाती है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की भागीदारी से युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, पूर्वजों की उपलब्धियों और सांस्कृतिक जड़ों को समझने का अवसर मिलता है।
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पुरातत्व विशेषज्ञों ने साझा किए शोध और अनुभव
महोत्सव के तहत आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में पद्मश्री पुरातत्वविद डॉ. आरएस बिष्ट, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व निदेशक डॉ. अमरेंद्र नाथ, एएसआई के उपनिदेशक डॉ. संजय मंजुल, हरियाणा पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार और डॉ. गरिमा सिंह सहित कई विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने हड़प्पाकालीन संस्कृति, प्राचीन नगर नियोजन और पुरातात्विक खोजों से जुड़े अनुभव साझा किए। साथ ही राखीगढ़ी के ऐतिहासिक महत्व और यहां मिले अवशेषों के अध्ययन की उपयोगिता पर चर्चा की।

मकान, नालियां और भट्ठियां बताती हैं प्राचीन जीवनशैली
राखीगढ़ी भारत में हड़प्पा सभ्यता के सबसे बड़े पुरातात्विक स्थलों में शामिल है। राखी खास और राखी शाहपुर गांवों में फैले इस स्थल की खोदाई में कच्ची-पक्की ईंटों से बने मकान और व्यवस्थित जल निकासी प्रणाली के प्रमाण मिले हैं। यहां कुम्हारों की भट्ठियां, चाक पर बने मिट्टी के बर्तन, मुहरें, अन्न भंडारण के अवशेष, मिट्टी की मूर्तियां और दफन स्थल भी मिले हैं। ये अवशेष तत्कालीन समाज की जीवनशैली, शिल्पकला, भंडारण व्यवस्था और अंतिम संस्कार की परंपराओं की जानकारी देते हैं।


देश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में शामिल
केंद्र सरकार ने वर्ष 2020 के बजट में विशिष्ट पहचान के साथ विकसित करने के लिए जिन पांच पुरातात्विक स्थलों की घोषणा की थी उनमें राखीगढ़ी भी शामिल था। महोत्सव के माध्यम से इस स्थल को पर्यटन के साथ शिक्षा और शोध के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में पहचान दिलाने का प्रयास किया गया। विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं की भागीदारी ने इसकी ऐतिहासिक और शैक्षणिक महत्ता को रेखांकित किया।
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