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हार्दिक राठी मौत मामला: मानव अधिकार आयोग ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट,  प्रशासनिक लापरवाही पर उठाए सवाल

अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़ Published by: शाहिल शर्मा Updated Sun, 22 Feb 2026 12:57 PM IST
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सार

आयोग का मत है कि यदि बास्केटबॉल पोल जंग लगा हुआ एवं खतरनाक स्थिति में था तथा बार-बार चेतावनियों के बावजूद उसकी मरम्मत या प्रतिस्थापन नहीं किया गया, तो यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं वैधानिक कर्तव्य में गंभीर चूक को दर्शाता है।

Human Rights Commission raises questions in basketball player Hardik Rathi death case
हार्दिक राठी, मृतक बास्केट बॉल खिलाड़ी - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार

हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने गांव लाखन माजरा, रोहतक स्थित स्पोर्ट्स नर्सरी में बास्केटबॉल पोल गिरने की घटना, जिसमें एक उभरते हुए राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी हार्दिक की मौत को अत्यंत गंभीरता से लिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है तथ्यों के आधार पर यह घटना प्रथम दृष्टया मानव अधिकारों के गंभीर उल्लंघन को दर्शाती है। विशेष रूप से भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन, सुरक्षा एवं गरिमा के अधिकार का।
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आयोग द्वारा 18 दिसम्बर 2025 को दिए गए आदेश की अनुपालन में उपायुक्त, रोहतक द्वारा भेजी गई रिपोर्ट में घटना के वास्तविक कारणों, सुरक्षा मानकों के पालन तथा शोक संतप्त परिवार को मुआवजा प्रदान किए जाने के संबंध में कोई ठोस विवरण उपलब्ध नहीं है। रिपोर्ट में केवल बास्केटबॉल स्टेडियम निर्माण हेतु MPLADS पोर्टल से ₹17,80,294 की राशि स्वीकृत किए जाने का उल्लेख है।आयोग ने यह भी पाया कि 26 नवंबर 2025 को एक जांच समिति गठित की गई थी, किंतु उसकी विस्तृत रिपोर्ट अब तक प्रस्तुत नहीं की गई है। साथ ही, खेल उपकरणों एवं अवसंरचना की सुरक्षा जांच, नियमित निरीक्षण, संरचनात्मक स्थिरता परीक्षण तथा मुआवजा प्रदान करने हेतु मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के संबंध में भी कोई स्पष्ट व्यवस्था परिलक्षित नहीं होती।
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हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा के नवीनतम आदेश में कहा है कि हरियाणा राज्य खेलों के क्षेत्र में अग्रणी रहा है और राज्य सरकार द्वारा खेल अवसंरचना के विकास पर पर्याप्त सार्वजनिक धन व्यय किया गया है। ऐसी स्थिति में सार्वजनिक धन से निर्मित खेल सुविधाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता नियंत्रण एवं नियमित रखरखाव सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है। किसी भी प्रकार की लापरवाही न केवल खेल प्रोत्साहन के उद्देश्य को विफल करती है, बल्कि युवा खिलाड़ियों के जीवन एवं गरिमा को भी संकट में डालती है।

आयोग का मत है कि यदि बास्केटबॉल पोल जंग लगा हुआ एवं खतरनाक स्थिति में था तथा बार-बार चेतावनियों के बावजूद उसकी मरम्मत या प्रतिस्थापन नहीं किया गया, तो यह संबंधित अधिकारियों की घोर लापरवाही एवं वैधानिक कर्तव्य में गंभीर चूक को दर्शाता है। राज्य तंत्र की इस प्रकार की निष्क्रियता, जिसके परिणामस्वरूप एक युवा जीवन की क्षति हुई, राज्य के संवैधानिक दायित्व का उल्लंघन है।

उपरोक्त परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते ललित बत्रा ने व्यापक जनहित में निम्न महत्वपूर्ण निर्देश एवं अनुशंसाएँ जारी की है कि  प्रमुख सचिव, हरियाणा सरकार, खेल विभाग, चंडीगढ़ को निर्देशित किया गया है कि वे एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन करें।
 
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